Raipur. रायपुर। सिविल लाइन थाना रायपुर में पदस्थ उप निरीक्षक के अनुसार दिनांक 18.04.2026 को थाना प्रभारी द्वारा रेंज सायबर थाना रायपुर से प्राप्त पत्र की जांच के निर्देश दिए गए थे।
जांच के दौरान कार्यालय थाना प्रभारी, रेंज सायबर थाना रायपुर छत्तीसगढ़ द्वारा जारी पत्र क्रमांक था.प्र./रेंज था/राय/350/2025 दिनांक 06.11.2025 का अवलोकन किया गया। अवलोकन में यह तथ्य सामने आया कि प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2), 317(4), 317(5) तथा 3(5) के अंतर्गत अपराध घटित होना पाया गया है। इसके आधार पर संबंधित प्रकरण में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ कर दी गई है।
रेंज सायबर थाना रायपुर द्वारा भेजे गए पत्र में पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देशों का उल्लेख किया गया है, जिसमें साइबर अपराध से जुड़े मामलों में म्यूल बैंक खातों के उपयोग पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। यह भी बताया गया है कि भारत सरकार गृह मंत्रालय द्वारा संचालित भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के समन्वय पोर्टल के माध्यम से साइबर अपराध से जुड़ी जानकारी साझा की जाती है। जांच में यह पाया गया कि बैंक ऑफ बड़ौदा, शाखा सिविल लाइन रायपुर के कुल 49 बैंक खातों में साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त राशि का लेन-देन हुआ है। इन खातों में दिनांक 01.01.2024 से 30.06.2025 के बीच कुल 36,48,280 रुपये की संदिग्ध धनराशि जमा होने की रिपोर्ट साइबर क्राइम पोर्टल में दर्ज की गई है। यह धनराशि साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त बताई गई है। जिसका उपयोग विभिन्न बैंक खाताधारकों, मोबाइल नंबर धारकों तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों द्वारा किया गया है।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि इन म्यूल खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के व्ययन, स्थानांतरण और संवर्धन के लिए किया गया। जांच में यह पाया गया कि संबंधित खाता धारक या उनसे जुड़े अन्य व्यक्ति यह जानते हुए या यह मानने का पर्याप्त कारण रखते हुए कि यह धनराशि अवैध तरीके से प्राप्त की गई है, फिर भी उसका उपयोग, छिपाने या आगे बढ़ाने में शामिल पाए गए हैं। इसे गंभीर साइबर अपराध की श्रेणी में माना गया है। इन सभी तथ्यों के आधार पर रेंज सायबर थाना रायपुर द्वारा आवश्यक कार्रवाई हेतु जानकारी प्रेषित की गई थी। पत्र में 49 खातों के संदर्भ में अभिस्वीकृति संख्या सहित विवरण भी संलग्न किया गया है, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित की जा सके। थाना सिविल लाइन रायपुर द्वारा प्राप्त पत्र और संलग्न दस्तावेजों के आधार पर प्रारंभिक जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है। मामले में बैंक खातों, लेन-देन और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस द्वारा यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन खातों के पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे और साइबर धोखाधड़ी के नेटवर्क का विस्तार किस स्तर तक फैला हुआ है। यह कार्रवाई साइबर अपराधों पर नियंत्रण और म्यूल खातों के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

