Shimla. शिमला। हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL) ने प्रशासनिक और सामान्य खर्चों पर कड़ी निगरानी के लिए बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने प्रदेश भर के विभिन्न बिजली मंडलों के लिए मासिक इनिशियल ड्रॉइंग लिमिट (Initial Drawing Limit) तय कर दी है।
यह नई व्यवस्था इस माह से सभी कार्यालयों में लागू कर दी गई है। जारी आदेश के अनुसार, सभी ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर्स (DDO) को निर्धारित सीमा के भीतर ही खर्च करने की अनुमति होगी। राशि हिमाचल प्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के माध्यम से जारी की जाएगी। अलग-अलग डिवीजनों के लिए यह सीमा 20 हजार रुपए से लेकर 1.40 लाख रुपए तक तय की गई है। सबसे अधिक सीमा मंडी डिवीजन के लिए 1.40 लाख रुपए निर्धारित की गई है, जबकि कई अन्य डिवीजनों के लिए 50 हजार रुपए मासिक खर्च की सीमा तय की गई है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी स्थिति में तय सीमा से अधिक खर्च या अन्य मद में राशि का उपयोग (डाइवर्जन) नहीं किया जा सकेगा। यदि किसी लेखा इकाई द्वारा राशि का अनुचित उपयोग पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, प्रत्येक माह के अंत में बची हुई राशि को सरेंडर करना अनिवार्य होगा। बोर्ड ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि किसी डिवीजन को अतिरिक्त राशि (Enhancement) की आवश्यकता होती है, तो उसे अपने बजट आबंटन और अब तक हुए खर्च का पूरा विवरण प्रस्तुत करना होगा। बिना इस जानकारी के अतिरिक्त राशि पर विचार नहीं किया जाएगा।
बोर्ड प्रबंधन की ओर से आदेश की प्रतिलिपि सभी मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और सभी DDO को भेजी गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि जिन डिवीजनों ने समय पर अपनी प्रारंभिक सीमा तय करवाने के लिए प्रस्ताव नहीं भेजा, उनकी सीमा उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अनुमानित रूप से कम करके तय की गई है। इस कदम का उद्देश्य बोर्ड के प्रशासनिक और सामान्य खर्चों पर नियंत्रण रखना, अनुचित खर्च रोकना और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। बोर्ड प्रबंधन का कहना है कि यह नई प्रणाली खर्चों को नियंत्रित करने के साथ-साथ प्रत्येक डिवीजन के बजट प्रबंधन में भी मदद करेगी।

