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सुशासन की गूंज : कचना महा-शिविर में उमड़ा 17 गांवों का हुजूम

सुशासन की गूंज : कचना महा-शिविर में उमड़ा 17 गांवों का हुजूम

मतरी। छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को आम जनता के दरवाजे तक पहुँचाने और उनकी समस्याओं पर सीधा प्रहार करने के लिए शुरू हुआ 'सुशासन तिहार 2026' अब धरातल पर एक बड़ा विश्वास बन चुका है।

इसी कड़ी में धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम पंचायत कचना में आयोजित क्लस्टर स्तरीय समाधान शिविर में उम्मीदों और समाधान का एक अनोखा संगम देखने को मिला। शिविर में 165 मामलों का मौके पर ही निपटारा (161 मांग और 4 शिकायतें) कर ग्रामीणों को तत्काल राहत दी गई l

​इस महा-शिविर में कचना सहित आस-पास की कुल 17 ग्राम पंचायतों (सिलीडीह, सिलतरा, नवागांव (क), जी जामगांव, अंवरी, गणेशपुर, मडेली, भैंसबोड़, जरवायडीह, कोलियारी, जोरातराई (अ), थूहा, नवागांव (थू), सिर्वे, कुम्हारी और भेण्डसर) के ग्रामीणों का ऐसा सैलाब उमड़ा, जिसने शासन की इस मुहिम को पूरी तरह सफल बना दिया।

​आवेदनों की 'सेंचुरी', समस्याओं पर तुरंत 'एक्शन'

​शिविर की भव्यता और जनता के विश्वास का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ कुल 819 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 812 आवेदन विभिन्न विकास कार्यों व मांगों से जुड़े थे, तो वहीं 7 आवेदन शिकायतों के रूप में दर्ज किए गए। प्रशासन ने भी मुस्तैदी दिखाते हुए 165 मामलों का मौके पर ही निपटारा (161 मांग और 4 शिकायतें) कर ग्रामीणों को तत्काल राहत की सौगात दी। शेष आवेदनों के लिए समय-सीमा तय कर त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।

​जनप्रतिधियों और अफसरों की जुगलबंदी से बना काम

​ग्रामीणों का हौसला बढ़ाने और उनकी समस्याओं को सीधे सुनने के लिए क्षेत्र के कई दिग्गज जनप्रतिनिधि इस शिविर का हिस्सा बने। जिला पंचायत के उपाध्यक्ष, सभापति और जनपद पंचायत कुरूद की अध्यक्ष ने विशेष रूप से शिरकत की। ​इसके साथ ही बडी संख्या में सरपंच, सचिव और पंचगण मौजूद रहे।

​जब खिले चेहरे: हाथों-हाथ बंटे पट्टे, कार्ड और किट

​इस शिविर की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब सामने आई जब पात्र हितग्राहियों को उनके अधिकार की सामग्रियां और प्रमाण पत्र सौंपे गए। कई सालों से अटके काम जब चंद मिनटों में पूरे हुए, तो ग्रामीणों के चेहरे खुशी से दमक उठे। ​राजस्व विभाग ने जमीन और घर का सपना पूरा करते हुए ग्रामीणों को 'आबादी पट्टा' (भू-स्वामित्व) सौंपा। मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा की छांव देते हुए 'संगठित श्रमिक कार्ड' प्रदान किए गए। इसी तरह ​स्वास्थ्य विभाग ने बुजुर्गों की आंखों को रोशनी देने के लिए 'निःशुल्क चश्मा' और मुफ्त इलाज की गारंटी वाला 'आयुष्मान कार्ड' दिया। ​महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा नौनिहालों के लिए 'पोषण आहार' और बेटियों के सशक्त भविष्य के लिए 'नोनी सुरक्षा योजना' के प्रमाण पत्र बांटे गए। इसके साथ ही ​समाज कल्याण विभाग ने दिव्यांगों और बुजुर्गों के कदम मजबूत करने के लिए 'बैशाखी' और 'पोषण किट' का वितरण किया ।

​कचना का यह क्लस्टर शिविर सुशासन की उस सच्ची परिभाषा को बयां कर गया, जहां सरकार खुद चलकर जनता के द्वार तक पहुंचती है। इस 'सुशासन तिहार' ने ग्रामीणों के चेहरों पर जो मुस्कान बिखेरी है, उसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देगी।

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