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किसानों को राहत, प्याज का सरकारी खरीद मूल्य बढ़ा; इस सीजन में पांचवीं बार हुई बढ़ोतरी​

किसानों को राहत, प्याज का सरकारी खरीद मूल्य बढ़ा; इस सीजन में पांचवीं बार हुई बढ़ोतरी​

Just Abhi News 3 months ago

सरकार ने बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीद कीमत 13% बढ़ा दी है. इसे 1,875 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है. इसका मकसद खरीद बढ़ाना और किसानों को बेहतर दाम दिलाना है.

सरकारी बयान के मुताबिक नई दरें 4 जुलाई 2026 यानी आज से लागू हो गई हैं. इस सीजन में खरीद कीमत में यह पांचवीं बढ़ोतरी है, क्योंकि 'प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड' के तहत 2026 के बफर स्टॉक के लिए सरकार की प्याज खरीद की शुरुआत धीमी रही थी. खरीद कीमत में बारबार बढ़ोतरी के बावजूद 1 जून से अब तक सिर्फ 2,000 टन प्याज ही खरीदा जा सका है.

सीजन शुरू होने के बाद से खरीद कीमत तेजी से बढ़ी है. पहले कीमत 12.70 रुपये प्रति किलो थी, जिसे 22 मई को बढ़ाकर 15.80 रुपये प्रति किलो किया गया. इसके बाद 13 जून को 16.50 रुपये प्रति किलो, 20 जून को 17.30 रुपये प्रति किलो और फिर 18.75 रुपये प्रति किलो किया गया. अब इसे बढ़ाकर 21.25 रुपये प्रति किलो यानी 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है. कृषि और किसान कल्याण विभाग के 202526 के दूसरे एडवांस अनुमान के मुताबिक, प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो 202425 के 307.67 लाख टन उत्पादन के लगभग बराबर है.

प्याज की नहीं है कोई कमी

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कहा कि फिलहाल कुल सप्लाई को लेकर कोई चिंता नहीं है, हालांकि हर साल की तरह सीजनल ट्रेंड के चलते कीमतों में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है. महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात में स्टॉक का स्तर पर्याप्त बना हुआ है और जमा किए गए प्याज में किसी तरह की कमी के संकेत नहीं हैं. देशभर की मंडियों में रोजाना 50,000 टन से ज्यादा प्याज की आवक दर्ज की गई, जिसमें अकेले महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 30,000 टन से ज्यादा रही. इस दौरान औसत मॉडल कीमत करीब 18 रुपये प्रति किलो रही. वहीं देशभर में औसत रिटेल कीमत 31 रुपये प्रति किलो है.

बेहतर क्वालिटी का प्याज अभी भी स्टोरेज में रखा जा रहा है और उम्मीद है कि कम सप्लाई वाले समय में इसे बाजार में उतारा जाएगा. मॉनसून में देरी और कुछ इलाकों में सामान्य से कम बारिश की वजह से कुछ व्यापारियों ने अनुमान के आधार पर खरीदारी शुरू कर दी है, जबकि मौजूदा कीमतों पर बड़े खपत वाले इलाकों में असली मांग अभी भी कमजोर बनी हुई है. नासिक और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों जैसे उत्पादन केंद्रों में सट्टेबाजी वाली ट्रेडिंग देखने को मिल रही है, जो असली मांग के बजाय कीमतें बढ़ने की उम्मीद पर आधारित है. जून में प्याज का एक्सपोर्ट सामान्य रहा और महीने के दौरान करीब 1.50 लाख टन प्याज विदेश भेजा गया. हालांकि व्यापारियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में एक्सपोर्ट की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, क्योंकि पाकिस्तान और चीन की सस्ती नई फसलें खाड़ी देशों, श्रीलंका और सुदूर पूर्व जैसे बड़े बाजारों में भारतीय प्याज को कड़ी टक्कर दे रही हैं. इस बीच महाराष्ट्र के नासिक इलाके में खरीफ बुवाई में करीब 15 दिनों की देरी हुई है, जबकि कर्नाटक के चित्रदुर्ग और चल्लाकेरे बेल्ट में बुवाई का काम सामान्य स्तर के मुकाबले करीब 60 फीसदी तक ही हो पाया है.

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