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क्या होता है टाइम कैप्सूल, अमेरिका ने इसमें कौन सी चीजें रखकर दफन की?​

क्या होता है टाइम कैप्सूल, अमेरिका ने इसमें कौन सी चीजें रखकर दफन की?​

Just Abhi News 1 week ago

जादी के 250 साल पूरे होने पर अमेरिका ने 408 किलो का एक टाइम कैप्सूल जमीन में दफनाया है. इसे फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में दफनाया गया है. दावा किया गया है कि ऐसा इसलिए हुआ ताकि 250 साल बाद आने वाली पीढ़ियां इसे ढूंढ़ सकें.

इसके बारे में जान सकें. इस कैप्सूल में आम लोगों से जुटाई गईं यादगार चीजें संजोई गई हैं. इसमें व्हेल की हड्डी, राइट ब्रदर्स के विमान का कपड़ा, ऐतिहासिक दस्तावेज और दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत शामिल है.

आसान भाषा में समझें तो टाइम कैप्सूल एक बॉक्स या कंटेनर की तरह होता है. जिसे दशकों तक चीजों को सुरक्षित रखने के लिहाज से बनाया गया है ताकि भविष्य में पीढ़ियां उसमें रखी चीजों को समझ सकें. देख सकें. इस टाइम कैप्सूल को उसी फिलाडेल्फिया में दफनाया गया है जहां अमेरिका आजादी का जश्न मनाता है. 4 जुलाई 1776 को फिलाडेल्फिया में स्वतंत्रता घोषणा पत्र को मंजूरी दी गई थी. इसलिए इसी जगह को कैप्सूल के लिए चुना गया. यहां अगले 250 सालों तक कैप्सूल सीलबंद रहेगा और इसे 2276 में खोला जाएगा, जब अमेरिका अपनी 500वीं वर्षगांठ मनाएगा.

कैसे बना टाइम कैप्सूल?

कैप्सूल को बनाने के लिए सबसे अहम बात होती है इसे दशकों तक सुरक्षित रखना. अब सवाल उठता है कि इसे कैसे सुरक्षित रखा जाए.इसके लिए कैप्सूल को बेलन का आकार दिया गया है. कई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कैप्सूल को आयताकार या वर्गाकार इसलिए नहीं बनाया गया क्योंकि समय के साथ इनके कोने कमजोर पड़ जाते हैं. यहां से अंदर नमी जाने का खतरा रहता है.

टाइम कैप्सूल.

10 फीट नीचे दफन

दावा किया गया है कि कैप्सूल को इंडियम धातु से बनाया गया है. यह नरम धातु होती है. यानी कैप्सूल को बंद करने पर यह अपनेआप छोटीमोटी दरारों को भर देती है. आसान भाषा में समझें तो जब इसे दबाया जाता है तो दरारों वाला हिस्सा खुदबखुद जुड़ जाता है.

अगर टाइम कैप्सूल के अंदर बहुत अधिक नमी होती, तो कागज और अन्य संवेदनशील वस्तुएं खराब हो सकती थीं. वहीं, अगर नमी बिल्कुल न होती, तो कई चीजें जरूरत से ज्यादा सूखकर भुरभुरी या टूटने लगतीं, इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए वैज्ञानिकों ने कैप्सूल के अंदर लगभग 35% नमी बनाए रखी है.

A 1,000pound time capsule marking America's 250th birthday was buried at Independence Mall in Philadelphia on July 4, 2026. Organized by the America 250 commission, the 10footdeep, dualsteel repository is set to remain sealed for 250 years and will be reopened on the United pic.twitter.com/swX50MOokP

— Sarahh

इसे 10 फीट नीचे इसलिए दफनाया गया है ताकि तापमान में होने वाले उतारचढ़ाव का इस पर असर न हो सके. यानी तेज गर्मी, अधिक ठंड और तूफानों का असर भी बहुत कम पड़ता है.

अतिरिक्त स्टील का सिलेंडर लगाया गया

वैज्ञानिकों का कहना है कि जमीन के नीचे रखे जाने वाले किसी भी टाइम कैप्सूल के लिए सबसे बड़ा खतरा पानी होता है. इसी वजह से कैप्सूल के चारों ओर एक अतिरिक्त स्टील का सिलेंडर लगाया गया है. दोनों परतों के बीच हवा की एक परत मौजूद रहेगी, जो बाहर से आने वाले पानी को अंदर पहुंचने से रोकने का काम करेगी. यह व्यवस्था उसी सिद्धांत पर आधारित है, जैसे पानी में उल्टी बाल्टी डुबोने पर उसके भीतर हवा फंसी रहती है और पानी अंदर नहीं जा पाता.

अगर भविष्य में भूजल स्तर बढ़ जाए या बाढ़ जैसी स्थिति बन जाए, तब भी यह हवा की परत कैप्सूल को पानी से सुरक्षित रखने में मदद करेगी. इस परियोजना के प्रमुख वैज्ञानिक माइकल बेरिला के अनुसार, अगर कभी इस टाइम कैप्सूल तक पानी पहुंच गया, तो इसका मतलब होगा कि फिलाडेल्फिया शहर लगभग 6 फीट पानी में डूब चुका होगा. उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में चिंता केवल टाइम कैप्सूल की नहीं, बल्कि एक बड़े प्राकृतिक संकट की होगी.

भारत में कब दफनाया गया टाइम कैप्सूल?

भारत में आजादी के 25 साल पूरे होने के पर 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में दिल्ली के लाल किले के पास भारत का पहला सरकारी टाइम कैप्सूल दफनाया गया था. इसे 'कालपात्र' नाम दिया गया था.

इस कैप्सूल को 1,000 साल बाद खोलने की योजना बनाई गई थी, ताकि आने वाली पीढ़ियां यह जान सकें कि स्वतंत्रता के बाद भारत का निर्माण और विकास किस तरह हुआ. इसमें संविधान की एक प्रति, स्वतंत्रता आंदोलन और आजादी के बाद के भारत का विस्तृत इतिहास, सरकारी दस्तावेज तथा उस समय की कई महत्वपूर्ण जानकारियां रखी गई थीं.

हालांकि, यह योजना पूरी नहीं हो सकी. 1977 में केंद्र में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद कालपात्र को जमीन से बाहर निकलवा लिया गया. नई सरकार का आरोप था कि इसमें भारत के इतिहास को तत्कालीन सरकार और नेहरूगांधी परिवार के दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है. इसी विवाद के कारण यह मुद्दा राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का विषय बन गया था.

बाद में इसकी कुछ सामग्री संसद में पेश की गई, लेकिन पूरे रिकॉर्ड को कभी सार्वजनिक नहीं किया गया. आज भी इतिहासकारों के बीच इस बात को लेकर चर्चा होती है कि कालपात्र में वास्तव में क्याक्या रखा गया था और इसे फिलहाल किस सरकारी अभिलेखागार में सुरक्षित रखा गया है.

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