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महंगे हुए टीवी, फ्रिज और स्मार्टफोन, फिर भी जबरदस्त खरीदारी! 90 दिन में लोन का बना नया रिकॉर्ड​

महंगे हुए टीवी, फ्रिज और स्मार्टफोन, फिर भी जबरदस्त खरीदारी! 90 दिन में लोन का बना नया रिकॉर्ड​

Just Abhi News 3 months ago

जहां एक ओर बीते कुछ महीनों में टीवी, फ्रिज और स्मार्टफोन जैसे गैजेट्स की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है. वहीं दूसरी ओर इन सामानों की खरीदारी में भी इजाफा देखने को मिला है.

जिसकी वजह से जून तिमाही में कंज्यूमर फाइनेंसिंग में एक नया रिकॉर्ड देखने को मिला है. रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया , मार्केट रिसर्च करने वाली कंपनियों और दूसरी कंपनियों के डाटा से पता चलता है कि इससे कुल रिटेल सेल्स में इसकी हिस्सेदारी बढ़ी. वास्तव में कंज्यूमर्स ने कीमतों में भारी बढ़ोतरी और आर्थिक अनिश्चितता से निपटने के लिए ज्यादा लोन लिए.

रिपोर्ट के अनुसार इस बढ़ोतरी की वजह स्मार्टफोन, टेलीविजन, लैपटॉप और एयरकंडीशनर जैसे कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए ज्यादा फाइनेंसिंग थी. इन चीजों की कीमतें कंपनियों ने पिछले छह महीनों में 1240 फीसदी तक बढ़ाई थीं. ऐसा इसलिए किया गया ताकि वेस्ट एशिया संकट की वजह से बढ़ी कमोडिटी की लागत और मेमोरी चिप की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की भरपाई की जा सके.

कंज्यूमर लोन में इजाफा

ईटी की रिपोर्ट में क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनी इक्विफैक्स इंडिया के डाटा हवाला दिया गया है. जिसमें कहा गयर है कि इस फाइनेंशियल ईयर में मई तक बैंकों और नॉनबैंक फाइनेंशियल कंपनियों से कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन का बकाया 9.2 फीसदी बढ़कर 1.19 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो मार्च तक 1.09 लाख करोड़ रुपए था. RBI के ताजा डाटा से पता चलता है कि मई के आखिर में बैंकों का कंज्यूमर लोन बकाया मार्च के मुकाबले 4.3 फीसदी बढ़कर 22,906 करोड़ रुपए हो गया, जो वित्त वर्ष 2026 में 5.3 फीसदी की गिरावट के बाद रिकवरी थी.

मई के आखिर में बैंकों का क्रेडिट कार्ड बकाया सालाना आधार पर 1.3 फीसदी बढ़कर 2.95 लाख करोड़ रुपए हो गया, हालांकि यह मार्च के मुकाबले लगभग उतना ही रहा. जून का डेटा अभी आना बाकी है. सेंट्रल बैंक ने मंगलवार को कहा कि मई के आखिर में वित्त वर्ष 2027 में हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों समेत ऊपरी और मिडटियर NBFCs के कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन सालाना आधार पर 42 फीसदी बढ़कर 68,814 करोड़ रुपए हो गए. यह डाटा एनबीएफसी सेक्टर के 87 फीसदी हिस्से को कवर करता है.

कड़े किए नियम

इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेल चेन विजय सेल्स के डायरेक्टर नीलेश गुप्ता ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि इस साल एवरेज फाइनेंसिंग का समय लगभग तीन महीने बढ़ गया है. हालांकि कंज्यूमर फाइनेंस अब छोटे शहरों तक फैल गया है, लेकिन एक बड़ी चुनौती यह है कि कुछ कंज्यूमर्स को मंजूरी नहीं मिल पा रही है क्योंकि NBFCs ने अपने लोन देने के नियम कड़े कर दिए हैं. यह ट्रेंड लेंडर्स में भी दिखा. भारत की सबसे बड़ी NBFC, बजाज फाइनेंस ने जून तिमाही में 16.4 मिलियन लोन बांटे, जो त्योहारों वाली दिसंबर तिमाही के 13.9 मिलियन से ज़्यादा थे. नए लोन की संख्या सालाना आधार पर 22 फीसदी बढ़ी. इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि NBFCs का छोटे शहरों में विस्तार कंज्यूमर फाइनेंसिंग में भी तेजी ला रहा है, जो पहले बैंकों का दबदबा वाला सेक्टर था.

प्रेशर में स्मार्टफोन मार्केट

स्मार्टफोन मार्केट रिसर्चर 'काउंटरपॉइंट रिसर्च' के अनुसार, जून तिमाही में स्मार्टफोन की कुल बिक्री में लगभग 11 फीसदी की गिरावट के बावजूद, फाइनेंसिंग के जरिए हुई बिक्री का हिस्सा 35 फीसदी से बढ़कर 40 फीसदी हो गया. काउंटरपॉइंट रिसर्च के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक ने रिपोर्ट में कहा कि स्मार्टफोन मार्केट प्रेशर में है और इसके और बढ़ने की उम्मीद है, ऐसे में फाइनेंसिंग खरीदारी का मुख्य जरिया बनकर उभर रही है. अब फाइनेंसिंग के जरिए बिकने वाले लगभग 67 फीसदी स्मार्टफोन NBFCs के जरिए फाइनेंस किए जाते हैं.

क्रेडिट से पेमेंट करने का चलन बढ़ा

ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन कैलाश लखयानी ने कहा कि जनरल ट्रेड में फाइनेंसिंग बढ़ी है. जून तिमाही में इसमें सालदरसाल 2023 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिसकी वजह कैश के बजाय क्रेडिट से पेमेंट करने का चलन है. इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड्स ने मंथली किस्तों को किफायती बनाए रखने के लिए फाइनेंसिंग की अवधि बढ़ा दी है. स्मार्टफोन फाइनेंसिंग की अवधि 12 महीने से बढ़ाकर 15 महीने कर दी गई है, जबकि टीवी, लैपटॉप, AC और रेफ्रिजरेटर के लिए फाइनेंसिंग की अवधि 18 महीने से बढ़ाकर 24 महीने कर दी गई है.

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