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मौत के कितने दिनों बाद तक शव को गलने से बचा सकते हैं? 4 महीने बाद खामेनेई के अंतिम संस्कार से उठा सवाल​

मौत के कितने दिनों बाद तक शव को गलने से बचा सकते हैं? 4 महीने बाद खामेनेई के अंतिम संस्कार से उठा सवाल​

Just Abhi News 1 week ago

रान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार 4 से 9 जुलाई तक चलेगा. उनका पार्थिव शरीर तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है. इसके बाद मशहद में इमाम रजा के मकबरे के पास दफन किया जाएगा.

दावा किया गया कि 28 फरवरी को तेहरान में हुए हवाई हमलों में उनकी मौत हुई थी. अब 4 महीने के बाद उन्हें दफन करने की तैयारी है. अब सवाल उठता है कि इंसान का शव कितने दिनों तक गलने से बचाया जा सकता है?

इंसान की डेडबॉडी को सड़ने या गलने से बचाने के लिए अलगअलग तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है. तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि शव को कितने दिनों तक सुरक्षित रखना है. उसके हिसाब से ही तरीका अपनाया जाता है. इंसान का शरीर खराब की प्रक्रिया मौत के कुछ ही घंटों में शुरू हो जाती है. मौत के 2 घंटे बाद शरीर अकड़ने लगता है. 24 घंटे के अंदर बैक्टीरिया शरीर को अंदर से डैमेज करना शुरू कर देते हैं. यही असली खराबी की शुरुआत मानी जाती है. इसलिए तुरंत ही शव को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है.

वर्ल्ड जर्नल ऑफ फॉर्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट कहती है, डेडबॉडी को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में शरीर को खराब होने की प्रॉसेस को बहुत हद तक धीमा कर दिया जाता है. इसके लिए कितने तरीके अपनाए जाते हैं, आइए समझ लेते हैं.

सबसे कॉमन तरीके

भारत में क्या तरीका अपनाते हैं, पहले इसे समझ लेते हैं. आमतौर पर बिना किसी बड़ी तैयारी के डेडबॉडी को 6 से 10 घंटे तक घर पर ही सुरक्षित रखा जा सकता है. अगर गर्मी ज्यादा है तो यह अवधि 4 से 6 घंटे हो जाती है. वहीं सर्दियों में 12 से 15 घंटे तक सामान्य स्थिति में शव को सड़ने से रोका जा सकता है.

ग्लेशियर या बर्फीले पहाड़ों में रह जाए तो दशकों नहीं सैकड़ों सालों तक सुरक्षत रह सकता है.

शव को सुरक्षित रखने के लिएअगर बर्फ का इस्तेमाल किया जाता है तो शव को 2 दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है. यह तरीका बहुत असरदार नहीं माना जाता क्योंकि धीरेधीरे ही सही बैक्टीरिया के पनपने का खतरा बढ़ जाता है. इसके उलट अगर शरीर प्राकृतिक तौर पर ठंडे इलाके जैसे ग्लेशियर या बर्फीले पहाड़ों में रह जाए तो दशकों नहीं सैकड़ों सालों तक सुरक्षित रह सकता है.

इसका एक उदाहरण है. हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे में 1968 में लापता हुआ भारतीय वायुसेना के जवान 56 साल बाद बर्फ में मिला था. यह उदाहरण बताता है कि शरीर की कोशिशकाएं कैसे बर्फ में लम्बे समय तक जमकर सुरक्षित रहती हैं.

#WATCH | Tehran, Iran: Visuals from the funeral ceremony of Iran's late Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei, who was killed on February 28 during Israeli and US airstrikes on Iran

pic.twitter.com/QWmZtyRAUB

- ANI

कैसे डेडबॉडी लम्बे समय तक सुरक्षित रखते हैं?

डेडबॉडी लम्बे समय तक सुरक्षित रखने के लिए तीन तरीके आमतौर पर अपनाए जाते हैं. पहला है, कोल्ड स्टोरेज में रखना. दूसरा है, एम्बामिंग और तीसरा है क्रायोप्रिजर्वेशन.

1 कोल्ड स्टोरेज: कम समय के लिए सुरक्षित

अगर बहुत कम समय के लिए शव को सुरक्षित रखना है तो उसके लिए कोल्ड स्टोरेज का इस्तेमाल किया जाता है ताकि अंतिम संस्कार तक उसे सड़ने से बचा सकें. आमतौर पर शवों को मॉर्च्युरी में 2°C से 4°C के तापमान पर रखा जाता है. घर पर अंतिम दर्शन या शव को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए, आइस पैक या खास पॉलीमर शीट का इस्तेमाल करके शव को 4 दिनों तक सही तापमान पर रखा जा सकता है.

2 एम्बामिंग: कई महीनों तक सुरक्षित रख सकते हैं

इस प्रक्रिया में सर्जरी के जरिए शरीर से खून निकाला जाता है और उसकी जगह केमिकल सॉल्यूशन भरा जाता है . ज्यादातर मामलों में फॉर्मेल्डिहाइडबेस्ड लिक्विड भरे जाते हैं. ऐसा टिशूज को कीटाणुमुक्त करने और अंतिम संस्कार या शव के अंतिम दर्शन के लिए शरीर को कुछ समय तक सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है.

यह स्किन में मौजूद प्रोटीन को तोड़ता है, जिससे बैक्टीरिया को शरीर में पनपने के लिए जरूरी पोषण नहीं मिल पाता. साथ ही मौजूद डिसइंफेक्टेंट बैक्टीरिया को खत्म कर देते हैं. सही तरीके से की गई एम्बामिंग शव को कई हफ्तों तक बिना सड़े सुरक्षित रख सकती है, और मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई के लिए मिलने वाले देहदान किए गए शवों को इसी तकनीक से महीनों तक इस्तेमाल लायक बनाए रखा जाता है. एम्बामिंग की प्रक्रिया में 2 से 4 घंटे लगते हैं.

सामान्य एम्बामिंग के जरिए शव 26 सप्ताह तक अच्छी स्थिति में रह सकता है. ठंडा और सूखे वातावरण में डेडबॉडी 2 से 6 महीने तक सुरक्षित रखी जा सकती है. अगर एम्बामिंग के बाद शव को कोल्ड स्टोरेज में रखा जाए संरक्षण की अवधि और बढ़ सकती है.

3 क्रायोप्रिजर्वेशन: दशकों तक सुरक्षित रहती है

इस प्रक्रिया में पूरे शरीर या अंगों को बहुत कम तापमान 130°C से नीचे रखा जाता है. सुरक्षित रखने के लिए लिक्विड नाइट्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है ताकि बैक्टीरिया के पनपने की आशंका पूरी तरह खत्म हो जाए. दावा किया जाता है कि इसके जरिए शव को दशकों तक सुरक्षित रखा जाता है. अगर तापमान और रखरखाव का पालन सख्ती से हो तो शव अनिश्चितकाल तक संरक्षित रखा जा सकता है.

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