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उधर ट्रंप ने कहा सीजफायर खत्म, इधर बाजार का निकला दम, मिनटों में डूबे 9 लाख करोड़​

उधर ट्रंप ने कहा सीजफायर खत्म, इधर बाजार का निकला दम, मिनटों में डूबे 9 लाख करोड़​

Just Abhi News 1 week ago

मेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ सीजफायर खत्म होने के बयान के बाद भारतीस शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली. जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा देखने को मिला और जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण निवेशकों का भरोसा कम हुआ.

इसी कारण से सेंसेक्स में 1700 से ज्यादा अंकों की गिरावट देखने को मिली. इस गिरावट की वजह से शेयर बाजार निवेशकों के करीब 9 लाख करोड़ रुपए डूब गए. कारोबार के दूसरे हिस्से में बिकवाली और तेज़ हो गई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने का अंतरिम समझौता "खत्म" हो गया है. इससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की चिंता पैदा हो गई.

दोपहर 2 बजे के आसपास सेंसेक्स 1,700 अंक गिरकर 76,472.78 पर आ गया, जबकि निफ्टी50 में 438 अंकों की गिरावट देखने को मिली और 24,000 के लेवल से नीचे आ गई. बाजार में आई इस गिरावट से निवेशकों की लगभग 9 लाख करोड़ रुपए रुपए की संपत्ति कम हो गई, जिससे BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन 471 लाख करोड़ रुपए पर आ गया.

सेंसेक्स की सभी कंपनियों के शेयरों में गिरावट रही. हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंटरग्लोब एविएशन, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और भारती एयरटेल के शेयरों में 24% की गिरावट के साथ सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ. दलाल स्ट्रीट पर भारी बिकवाली के बीच, बाजार में उतारचढ़ाव को मापने वाला इंडिया VIX 26% बढ़कर 14.67 पर पहुंच गया. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 2% तक की गिरावट आई. सभी सेक्टरल इंडेक्स में भारी गिरावट रही, जिसमें निफ्टी बैंक इंडेक्स, निफ्टी FMCG इंडेक्स और निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में 2% से ज़्यादा की गिरावट दर्ज की गई. बाजार का कुल रुख काफी नकारात्मक रहा. NSE पर 2,525 शेयरों में गिरावट आई, जबकि केवल 694 शेयरों में बढ़त हुई और 86 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ.

इन वजहों से आई शेयर बाजार में गिरावट

1. ईरान के साथ सीजफायर खत्म

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुआ समझौता "खत्म हो गया है" और उन्होंने ईरानी नेताओं को "बीमार मानसिकता वाले लोग" बताया. यह बयान खाड़ी क्षेत्र में हमलों के नए दौर के बाद आया. दोनों देशों के बीच एक फिर से टेंशन बढ़ गई है. एक दिन पहले खबर आई थी कि ईरान ने कुछ शिपमेंट्स को अपना निशाना बनाया है. उसके बाद बुधवार को अमेरिका ने भी ईरान पर बमबारी शुरू कर दी और ईरानी कच्चे तेल की बिक्री पर प्रतिबंध फिर से लागू कर दिए. तनाव बढ़ने से मिडिल ईस्ट में स्थिरता और वैश्विक तेल आपूर्ति में नई रुकावटों की आशंका फिर से पैदा हो गई है.

CENTCOM ने X पर एक पोस्ट में कहा कि​ US सेंट्रल कमांड की सेनाओं ने ईरान के खिलाफ कई जोरदार हमले शुरू कर दिए हैं. यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में निर्दोष नागरिकों वाले कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने और उन पर हमला करने की भारी कीमत वसूलने के लिए की गई है. US सेंट्रल कमांड के अनुसार, ये हमले होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तीन कमर्शियल जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हमलों के जवाब में किए गए थे.

2. तेल की कीमतें बढ़ीं

बुधवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स लगभग 5 फीसदी बढ़कर 78.09 डॉलर प्रति बैरल हो गए, जबकि WTI क्रूड फ्यूचर्स लगभग 74 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए. वास्तव में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि ईरान के साथ सीजफायर "खत्म" हो गया है. इससे होर्मुज स्ट्रेट जो तेल की शिपिंग के लिए एक अहम ग्लोबल रूट है के जरिए सप्लाई में रुकावट की आशंका बढ़ गई.

3. ग्लोबल बाजार से कमजोर संकेत

जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने के बीच ग्लोबल बाजारों में हुई ज़बरदस्त बिकवाली का असर दलाल स्ट्रीट पर भी दिखा. ट्रंप के बयानों के बाद यूरोप के बाज़ार गिर गए. UK का FTSE 100, फ्रांस का CAC 40 और जर्मनी का DAX 2% तक गिर गए. एशिया में, जापान का निक्केई 1.5 फीसदी गिरा, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी 6 फीसदी तक लुढ़क गया क्योंकि चिप सेक्टर में बिकवाली तेज़ हो गई. इस बीच, रात भर वॉल स्ट्रीट में आई ज़बरदस्त गिरावट के बाद, डाऊ जोन्स फ्यूचर्स में लगभग 1 फीसदी की गिरावट देखी गई, जिससे संकेत मिला कि दिन में अमेरिकी बाज़ारों की शुरुआत फिर से कमजोर हो सकती है.

4. बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी हुई, जिससे इक्विटी पर दबाव बढ़ गया. बेंचमार्क 10साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.565% हो गई, जबकि 30साल के बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 5.068% हो गई. पॉलिसी के हिसाब से बदलने वाली दोसाल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.197% हो गई.
आमतौर पर, बॉन्ड यील्ड बढ़ने से इक्विटी के मुकाबले फिक्स्डइनकम एसेट्स ज़्यादा आकर्षक हो जाते हैं, जिससे निवेशक स्टॉक जैसे ज़्यादा जोखिम वाले एसेट्स से हटकर दूसरी तरफ़ रुख करने लगते हैं.

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