Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
2478 लापता, 586 मौतें, 320 भारतीय भी संपर्क से बाहर, अब नेपाल का हाल क्या है?

2478 लापता, 586 मौतें, 320 भारतीय भी संपर्क से बाहर, अब नेपाल का हाल क्या है?

नेपाल और तिब्बत की सीमा पर बुधवार को आई भीषण बाढ़ की कई तस्वीरें सामने आ रहीं हैं। अब तक कम से कम 586 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 2,478 लोग लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में 579 मौतें दर्ज की गई हैं, जबकि चीन के तिब्बत इलाके में 7 लोगों की मौत और सैकड़ों लोग लापता बताए गए हैं।

बचाव कार्य अभी भी जारी है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार नेपाल में 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। तिब्बत में फंसे करीब 400 भारतीयों का पता चल गया है और वे सुरक्षित हैं। इनमें से 153 भारतीय तिब्बत से नेपाल पहुंच चुके हैं और 21 लोग शुक्रवार को दिल्ली भी आ गए। महाराष्ट्र के 404 पर्यटक सुरक्षित बताए गए हैं, हालांकि 60 अभी भी लापता हैं।

नेपाल ने भारत और चीन से मांगी मदद

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि बचाव के लिए 15,000 से ज्यादा कर्मी तैनात किए गए हैं। उन्होंने विदेशी सर्च टीमों की जरूरत से इनकार किया, लेकिन तकनीकी मदद मांगी है। काठमांडू ने भारत और चीन से बेली ब्रिज और स्पेशल टीमों की सहायता मांगी है, जिससे टूटे पुल और सड़कें जल्दी बहाल हो सकें।

भारत ने अब तक क्या मदद की है?

भारत 3 सैन्य विमानों से 57.5 टन राहत सामग्री भेज चुका है। डॉक्टरों की टीम और NDRF भी भेजी गई है। त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना से 300 से ज्यादा लोगों को हेलीकॉप्टर से निकाला गया। 8 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। बाढ़ की वजह ग्लेशियर और चट्टान का ढहना बताया जा रहा है, जिससे 5.2 तीव्रता का भूकंप भी देखा गया है।

 नुवाकोट, नेपाल। PHoto

नेपाल पर फिर मंडरा रहा बड़ा खतरा

पानी, बर्फ, पत्थर और कीचड़ की दीवार बस्तियों, सड़कों और पुलों को बहा ले गई। रसवागढ़ी के पास मलबे से नदी रुकने के कारण एक बड़ी झील बन गई है। चीन के अनुसार इसमें करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका है और आगे और बढ़ सकता है, जिससे नई बाढ़ का खतरा है।

ईशा फउंडेशन के 77 लोग लापता

ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। ईशा फाउंडेशन के नेतृत्व में गए 77 सदस्यीय समूह से संपर्क नहीं हो पाया है। यह संगठन सदगुरु के नाम से मशहूर जग्गी वासुदेव ने स्थापित किया है। समूह कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी कर नेपाल लौट रहा था और जियारोंग के इमिग्रेशन कार्यालय पर था जब बाढ़ आई। दल में 19 देशों के नागरिक शामिल थे।

नेपाल में जारी है रेस्क्यू अभियान

नेपाल की वित्त मंत्री स्वर्णिमा वाग्ले ने कहा कि सड़क, पुल और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण में अरबों डॉलर लग सकते हैं। खोज-बचाव और राहत का काम लगातार चल रहा है। भारत नेपाल की हर संभव मदद कर रहा है। स्थानीय लोग भी बड़े जटिल बचाव अभियानों को अंजाम दे रहे हैं।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: khabaraganv