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ऐक्टिंग सीखने नहीं जाना होगा दिल्ली, बिहार में ही खुलेगा NSD का नया कैंपस

ऐक्टिंग सीखने नहीं जाना होगा दिल्ली, बिहार में ही खुलेगा NSD का नया कैंपस

बिहार के युवा कलाकारों के लिए बड़ी खुशखबरी है। अब अभिनय कौशल का प्रशिक्षण लेने के लिए उन्हें दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा। प्रदेश में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) का नया कैंपस खुलेगा।

केंद्र सरकार ने बिहार में एनएसडी कैंपस की स्थापना को हरी झंडी दे दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार जताया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, 'यह निर्णय बिहार की समृद्ध नाट्य एवं प्रदर्शन कला परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और नई संभावनाएं देगा। बिहार सरकार एनएसडी कैंपस के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराएगी और भवन निर्माण की स्वीकृत लागत का 50 प्रतिशत राज्यांश वहन करेगी। राज्य सरकार संस्थान की जल्द स्थापना के लिए हरसंभव प्रशासनिक सहयोग भी देगी।'

मुख्यमंत्री के अनुरोध पर मिली मंजूरी

मुख्यमंत्री के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने बिहार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी ) के नए कैंपस की स्थापना को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री ने कहा, 'बिहार सरकार ने नाट्य कला को बढ़ावा देने और इसे बचाए रखने के लिए बिहार संगीत नाट्य अकादमी बनाई है। एनएसडी का कैंपस खुलने से राज्य के इस काम को और मजबूती मिलेगी।'

बिहार सरकार की योजना है कि एनएसडी कैंपस को विश्वस्तरीय बनाया जाए। इसमें ऑडिटोरियम, स्टूडियो थियेटर, लाइब्रेरी, रिहर्सल हॉल और हॉस्टल जैसी सभी आधुनिक सुविधाएं होंगी। राज्यांश के रूप में करीब 100 करोड़ रुपये तक बिहार सरकार खर्च कर सकती है।

भिखारी ठाकुर की धरती को मिलेगा मंच

मुख्यमंत्री ने कहा, 'बिहार की सांस्कृतिक विरासत बेहद समृद्ध रही है। यह कालिदास, रामवृक्ष बेनीपुरी और भिखारी ठाकुर जैसी महान विभूतियों की भूमि है। राज्य की लोक नाट्य एवं प्रदर्शन कलाओं की अपनी विशिष्ट और गौरवशाली परंपरा रही है। बिहार में बिदेसिया, लौंडा नाच, जट-जटिन, सामा-चकेवा और डोमकच जैसी लोक नाट्य परंपराएं रही हैं।'

भिखारी ठाकुर को भोजपुरी का शेक्सपियर कहा जाता है लेकिन इन परंपराओं को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए संस्थागत स्तर पर ज्यादा प्रयास नहीं हुए। एनएसडी कैंपस खुलने से बिहार की लोक नाट्य परंपराओं और आधुनिक रंगमंच के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, 'बिहार में एनएसडी कैंपस की स्थापना से राज्य के युवा कलाकारों को पेशेवर नाट्य प्रशिक्षण, स्टेजक्राफ्ट, प्रदर्शन कला और उन्नत शोध के लिए बेहतर संस्थागत अवसर मिलेंगे। प्रतिभाशाली कलाकारों को प्रशिक्षण के लिए राज्य से बाहर जाने की जरूरत कम होगी। बिहार के गांव-गांव में प्रतिभा है लेकिन मंच नहीं मिलता। एनएसडी कैंपस उस प्रतिभा को तराशने का काम करेगा।'

बिहार बनेगा रंगमंच का हब

एनएसडी देश का प्रमुख नाट्य संस्थान है। दिल्ली में इसका मुख्य कैंपस है। इसके अलावा बेंगलुरु, वाराणसी, सिक्किम और अगरतला में भी इसके केंद्र हैं। अब बिहार इसका छठा कैंपस होगा। एनएसडी से निकले कलाकारों ने बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक नाम कमाया है। नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी, पंकज त्रिपाठी, मनोज बाजपेयी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे दिग्गज एनएसडी से ही निकले हैं। इनमें कई बिहार से हैं। मनोज बाजपेयी और पंकज त्रिपाठी दोनों बिहार के हैं।

एनएसडी कैंपस खुलने से बिहार के युवाओं को अभिनय, निर्देशन, पटकथा लेखन, लाइटिंग, साउंड, सेट डिजाइन और कॉस्ट्यूम जैसे प्रोफेशनल कोर्स करने का मौका मिलेगा। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। थिएटर के साथ-साथ फिल्म और ओटीटी में भी युवाओं को मौका मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, 'बिहार में एनएसडी कैंपस की स्थापना केवल एक संस्थान की स्थापना नहीं बल्कि राज्य की सांस्कृतिक विरासत, युवा प्रतिभाओं और आधुनिक रंगमंच के भविष्य में निवेश है।' उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयास से यह संस्थान बिहार को राष्ट्रीय रंगमंच के मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करेगा।

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