Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
अमरोहा में 100 करोड़ का जमीन घोटाला? जंगली संपत्ति का पट्टा हो गया

अमरोहा में 100 करोड़ का जमीन घोटाला? जंगली संपत्ति का पट्टा हो गया

त्तर प्रदेश में सरकारी जमीनों के पट्टा घोटालों पर शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। संभल में सरकारी भूमि के फर्जी पट्टों के मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद अब कई दूसरे मामले सामने आ रहे हैं।

संभल के तत्कालीन एसडीएम समेत कई राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के जेल जाने के बाद अब अमरोहा जिले की धनौरा तहसील में भी बड़ा मामला सामने आया है। अभयारण्य क्षेत्र के लिए आरक्षित करीब 4900 बीघा सरकारी जमीन पर करीब 800 पट्टे जारी किए जाने का खुलासा होने से राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है।

शुरुआती आंकलन में इस जमीन की कीमत करीब 100 करोड़ रुपये बताई जा रही है। शासन स्तर पर पूरे मामले की निगरानी की जा रही है और जांच में कई वर्तमान और तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल हो रही है। संभल में हुई सख्त कार्रवाई के बाद अब अमरोहा में भी दोषियों पर बड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

संभल के बाद अब अमरोहा पर प्रशासन की नजर

संभल में सरकारी जमीनों के फर्जी पट्टों के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की थी। मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था और जांच के दौरान तत्कालीन एसडीएम सहित कई राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उस कार्रवाई को प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों और फर्जी पट्टों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना गया था। अब अमरोहा में सामने आए मामले ने एक बार फिर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अभयारण्य की आरक्षित जमीन पर बांट दिए गए 800 पट्टे

अमरोहा धनौरा तहसील में सेंचुरी क्षेत्र के लिए आरक्षित लगभग 4900 बीघा सरकारी जमीन पर वर्षों के दौरान करीब 800 पट्टे जारी किए गए। आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर सरकारी भूमि का आवंटन किया गया। यह भी सामने आया है कि कई पट्टे ऐसे क्षेत्रों में दिए गए जो वन, चरागाह, झील, तालाब और खादर की श्रेणी में आते हैं।

जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला नया नहीं है। बताया जा रहा है कि वर्ष 1991 के आसपास से अलग-अलग समय पर अलग-अलग लोगों के नाम पट्टे जारी किए जाते रहे। बाद में कई पट्टाधारकों ने स्थायी अधिकार के लिए आवेदन भी किए, जिसके बाद अभिलेखों की जांच में कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं।

17 पट्टे पहले ही निरस्त, बाकी मामलों की जांच जारी

प्रारंभिक जांच के बाद विभिन्न क्षेत्रों के 17 पट्टे निरस्त किए जा चुके हैं, जबकि अन्य मामलों की सुनवाई राजस्व और चकबंदी न्यायालयों में चल रही है। प्रशासन पूरे रिकॉर्ड की दोबारा जांच कर रहा है।

एसडीएम बोले- नियम विरुद्ध मिले तो सभी पट्टे होंगे निरस्त

धनौरा के एसडीएम शैलेश कुमार दुबे के अनुसार जिन पट्टों के नियमों के विरुद्ध जारी होने की जानकारी मिली है, उनकी जांच कराई जा रही है। अगर जांच में अनियमितता साबित होती है तो ऐसे सभी पट्टे निरस्त किए जाएंगे और संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

कई गांव जांच के दायरे में

राजाबनदल्लीपुर, गुलालपुर, रसूलपुर, गंगावली, आजमपुर, शेरपुर, मुकर्रमपुर, देवीपुरा, शाहजहांपुर, दारानगर, जैथल और घेरकुंडा समेत कई गांवों की सरकारी जमीनों से जुड़े पट्टे जांच के दायरे में हैं।

संभल जैसा एक्शन होगा?

राजस्व विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि जांच में सरकारी भूमि के नियम विरुद्ध आवंटन, अभिलेखों में हेराफेरी और अधिकारियों की मिलीभगत के साक्ष्य मिलते हैं तो अमरोहा में भी संभल की तर्ज पर एफआईआर, गिरफ्तारी और विभागीय कार्रवाई हो सकती है। यही कारण है कि इस मामले ने राजस्व विभाग में हलचल बढ़ा दी है और कई अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आ गई है।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: khabaraganv