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BJP में बगावत! नई पार्टी बना सकते हैं अन्नामलाई; यहां तक क्यों आई बात?

BJP में बगावत! नई पार्टी बना सकते हैं अन्नामलाई; यहां तक क्यों आई बात?

मिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी की विस्तारवादी रणनीति को बहुत बड़ा झटका लग सकता है। जिस बीजेपी में साल 2014 के बाद कोई भी बगावत नहीं हुई अब उसी अजेय पार्टी में बगावत हो सकती है। दरअसल, तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई पार्टी से अलग होकर जल्द ही अपनी नई पार्टी बना सकते हैं।

अगर ऐसा होता है तो यह बीजेपी के लिए किसी सदमे से कम नहीं होगा क्योंकि पिछले 12 सालों में अभी तक सिर्फ विपक्षी पार्टियों के नेता ही टूटकर नई पार्टी बनाए हैं।

के अन्नामलाई तमिलनाडु से आने वाले प्रमुख नेताओं में से एक हैं। अन्नामलाई ने पार्टी से नाराजगी और नया राजनीतिक संगठन बनाने की संभावनाओं को लेकर लगाई जा रही अटकलों के बीच सोमवार को कहा कि आगामी दो दिन में वह अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। अन्नामलाई ने दिल्ली रवाना होने से पहले चेन्नई हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत के दौरान नई राजनीतिक पार्टी बनाने की अटकलों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि वह दो दिनों में जवाब देंगे और अपना रुख स्पष्ट करेंगे।

'हम दो दिन में बैठकर बात करेंगे'

बीजेपी नेता से जब मीडिया ने पूछा कि अटकले हैं कि वह पार्टी छोड़ने की योजना बना रहे हैं और इसी सिलसिले में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात करने जा रहे हैं तो उन्होंने कहा, 'कृपया इंतजार करें। हम दो दिन में बैठकर बात करेंगे।' अन्नामलाई के ताजा बयानों से अंदाजा लगाया जाने लगा है कि तमिलनाडु में बीजेपी का भविष्य संकट में पड़ सकता है।

अन्नामलाई तमिलनाडु में वह नेता हैं, जिन्होंने तमिलनाडु में बीजेपी का चेहरा रहते हुए पार्टी को काफी विस्तार दिया। साथ ही वह राज्य में संगठन को लगातार मजबूती देते रहे। मगर, विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने उन्हें अध्यक्ष पद से हटा दिया। उनकी जगह नैनार नागेंद्रन के पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। इसके बाद से ही अन्नामलाई लाइमलाइट से दूर हैं।

किन बातों से नाराज हैं अन्नामलाई?

माना जाता है कि विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व ने उनके सुझावों को नहीं माना था, इसको लेकर अन्नालमाई नाराज हुए। इसके अलावा उन्होंने विधानसभा चुनाव में पार्टी को सुझाव दिया था कि दो साल पहले ही उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जाए, ताकि बीजेपी उम्मीदवार अपने क्षेत्रों में जनता के बीच जाकर पहले से ही तैयारी कर सकें। सबसे बड़ी बात की बीजेपी ने उन्हें विधानसभा का टिकट ही नहीं दिया। तमिलनाडु बीजेपी नेताओं से भी उनका कुछ मुद्दों पर विवाद माना जाता है।

अन्नामलाई केंद्र सरकार का विरोध किया

के अन्नामलाई ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा मौजूदा शैक्षणिक वर्ष से नवीं कक्षा के छात्रों के लिए तीन-भाषा नीति लागू करने की हालिया घोषणा का विरोध किया है और अधिसूचना को वापस लेने की मांग कर दी है। यह कदम साफ तौर पर बीजेपी से उनके बगावती सुर को दर्शाते हैं। उनके इस रुख से उन अटकलों ने जोर पकड़ा कि अन्नामलाई केंद्र सरकार का विरोध कर रहे हैं क्योंकि वह अपनी खुद की पार्टी जमीन पर उतारने की तैयारी कर रहे हैं।

निभा चुके हैं कई बड़ी जिम्मेदारियां

अन्नामलाई भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी रह चुके हैं। उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान टीटीवी दिनाकरन और पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम को बीजेपी गठबंधन में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि, पार्टी आला कमान द्वारा अन्नामलाई के स्थान पर नैनार नागेंद्रन को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करने और 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMKके साथ चुनावी समझौता करने के बाद से वह चर्चाओं से दूर हैं।

कोयंबटूर क्षेत्र के बीजेपी सदस्यों ने हालांकि अन्नामलाई से 2026 के विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरने की उम्मीद जताई थी, लेकिन बाद में स्पष्ट किया कि उन्होंने चुनावी मैदान से दूर रहने का फैसला किया है। बीजेपी के एक सूत्र ने कहा कि अन्नामलाई के पार्टी छोड़ने की संभावना नहीं है क्योंकि उन्हें पार्टी में और बड़ी भूमिका दी जा सकती है। लेकिन कोयंबटूर में अन्नामलाई के कुछ समर्थकों ने उनके द्वारा नई पार्टी बनाने का समर्थन किया है ताकि वह मौजूदा सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के विकल्प के रूप में स्वयं को पेश कर

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