Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
देश में 45 बिजली प्लांट रेड जोन में, 25 फीसदी से भी कम हुआ कोयला स्टॉक

देश में 45 बिजली प्लांट रेड जोन में, 25 फीसदी से भी कम हुआ कोयला स्टॉक

देश के बिजली घरों में एक बार फिर कोयला संकट गहराता नजर आ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, 25 अगस्त तक देश के 45 बिजली प्लांट ऐसी स्थिति में पहुंच चुके हैं जहां उनके पास जरूरत के हिसाब से कोयले का भंडार 25 फीसदी से भी कम बचा है।

यह संख्या बीते एक महीने में तेजी से बढ़ी है, जुलाई के अंत तक सिर्फ 31 प्लांट इस रेड जोन में थे यानी अगस्त के दौरान अकेले 14 और प्लांट संकट के दायरे में आ गए।

मौजूदा हालात को देखते हुए बिजली मंत्रालय ने कुछ प्लांटों से कहा है कि वे अपनी तय मरम्मत का काम फिलहाल रोक दें, ताकि जब तक कोयले की सप्लाई ठीक नहीं होती, तब तक बिजली बनना बंद न हो। अभी जो हालात हैं, उनसे यह नहीं लगता कि पूरे देश में बिजली का बड़ा संकट आने वाला है। क्योंकि इसे संभाला जा सकता है। बशर्ते अगले कुछ हफ्तों में बारिश और कोयले की सप्लाई सामान्य हो जाए।

आंकड़े क्या बता रहे हैं?

25 अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 45 बिजली प्लांट रेड जोन में पहुंच चुके हैं, जुलाई के अंत तक यह संख्या केवल 31 थी। इनमें से 40 प्लांट ऐसे हैं, जो घरेलू कोयले से चलते हैं। सभी प्लांटों को मिलाकर कुल कोयला भंडार अभी 3.095 करोड़ टन बचा है, जो करीब 10 दिन तक चल सकता है। जुलाई में यही भंडार 12 दिन तक चलता था। अगस्त के दौरान स्टॉक में जुलाई के मुकाबले 19 फीसदी की गिरावट आई है।

क्या हैं इसके पीछे की वजह?

पहली वजह: इस संकट के पीछे दो वजहें एक साथ काम कर रही हैं। पहली कोयला खनन पर असर। दरअसल, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में, जहां देश का ज्यादातर कोयला निकलता है भारी बारिश के कारण वहां खनन नहीं हो पाया। इससे कोयला समय पर प्लांटों तक नहीं पहुंचा।

इसी वजह से अगस्त में कोयले का स्टॉक जुलाई के मुकाबले 19 फीसदी तक गिर गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब बचा हुआ कोयला सिर्फ 10 दिन चलेगा, जबकि जुलाई में यह 12 दिन तक चलता था। ऊपर से मालगाड़ियां भी जरूरत से आधी ही मिल रही हैं, जिससे दिक्कत और बढ़ गई है।

दूसरी वजह: बिजली की बढ़ी हुई मांग इसके पीछे की दूसरी वजह है। आमतौर पर बारिश के दिनों में गर्मी कम होती है तो बिजली की खपत भी घट जाती है लेकिन इस बार अल नीनो के असर से अन्य राज्यों में बारिश ठीक से नहीं हुई। देश में अब तक सामान्य से करीब 12 फीसदी कम बारिश हुई है।

इस वजह से गर्मी बनी रही और लोग एसी-कूलर ज्यादा चलाते रहे, जिससे बिजली की मांग ऊंची बनी रही। हाल यह है कि देश की सबसे बड़ी बिजली कंपनी NTPC के एक अधिकारी के मुताबिक, कुछ प्लांट में पांच से छह रेक (कोयले की ट्रेन) की जरूरत है, लेकिन हमें उसकी आधी संख्या ही मिल रही है। दूसरी तरफ मांग भी लगातार बढ़ी हुई है।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: khabaraganv