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डोनाल्ड ट्रंप का गाजा प्लान, विवाद सुलझाने की जगह इजरायल को उलझा क्यों रहा है?

डोनाल्ड ट्रंप का गाजा प्लान, विवाद सुलझाने की जगह इजरायल को उलझा क्यों रहा है?

मेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक एलान, इजरायल के लिए मुसीबत बनता नजर आ रहा है। उन्होंने कुछ दिनों पहले दावा किया था कि हमास और गाजा के सभी सशस्त्र समूह पूरी तरह से हथियार छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं।

उन्होंने दावा किया कि हथियार छोड़ने के साथ ही इजरायली सेना गाजा से पीछे हटेगी और एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल नई फिलिस्तीनी पुलिस के साथ गाजा की सुरक्षा संभालेगा।

डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ऐतिहासिक समझौता बताया है लेकिन हमास ने साफ कहा है कि यह समझौता एक पैकेज है। हमास के वरिष्ठ नेता गाजी हमाद ने कई बार दोहराया है कि उनका संगठन, तब तक हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं है, जब इजरायल 'येलो लाइन' से पीछे नहीं हटता है।

येलो लाइन, गाजा पट्टी में इजरायली सेना (IDF) की ओर से बनाई गई एक नई सुरक्षा सीमा है। यह इजरायल के कब्जे वाले इलाकों को बाकी गाजा से अलग करती है। अभी यह एक बफर जोन के तौर पर काम कर रही है, जिसे लेकर हमास ऐतराज जता रहा है।

गाजी हमाद, सीनियर हमास नेता:-
हम हथियार तब तक नहीं छोड़ेंगे, जब तक इजरायल युद्ध रोक नहीं देता, अपने सैनिकों को 'येलो लाइन' तक पीछे नहीं खींच लेता, हत्याएं बंद नहीं करता और भरपूर मानवीय मदद नहीं आने देता।

क्यों ट्रंप का प्लान इजरायल को फंसा देगा?

हमास ने अमेरिका को साफ कह दिया है कि कोई भी भारी हथियार नष्ट नहीं होंगे, बल्कि उन्हें नेशनल कमेटी के अधीन रखा जाएगा। एक बार यह शर्त भी मान लिया जाए लेकिन हमास जोर दे रहा है कि एक आजाद फिलिस्तीनी राज्य भी बनना चाहिए। इजरायल को यह मंजूर नहीं है। इजरायल, हमास के साथ कोई भी समझौता नहीं चाहता है।

इजरायल को फंसा रहे हैं ट्रप?

इजरायल की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू चुप हैं। लेकिन इजरायल के दक्षिणपंथी मंत्री इस समझौते का विरोध कर रहे हैं। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि पहले हमास को पूरी तरह हथियार खत्म करने होंगे, उसके बाद ही कोई वापसी हो सकती है।

इजरायल क्या अमेरिकी शर्त मानेगा?

इजरायल ने रफाह में मोरक्को और युगांडा के 200 सैनिकों वाले एक पायलट अंतरराष्ट्रीय बल को भेजने की मंजूरी दी है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि यह शर्तों पर आधारित समझौता है। एक चरण पूरा होगा, तभी अगले चरण पर बात होगी। विस्तृत योजना दो हफ्ते में जारी हो सकती है। गाजा के लोग उम्मीद और डर दोनों महसूस कर रहे हैं। बीते साल अक्टूबर में हुए सीजफायर के बाद भी हिंसा जारी रही और गाजा में स्थिति बेहद खराब है।

अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई वाले समझौते भरोसे के काबिल कम होते हैं। ईरान के साथ उन्होंने संघर्ष विराम समझौता किया था, जिसे वह कब का तोड़ चुके हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज आज भी टकराव का केंद्र बना हुआ है। हर दिन किसी न किसी जहाज पर हमला हो रहा है। अब देखना होगा कि बार-बार अपने किए वादों से पलटने वाले डोनाल्ड ट्रंप, इस समझौते को लेकर कितने गंभीर हैं, यह नया समझौता कितना टिकता है। अगर इजरायल, अमेरिका की बात मानकर पीछे हटता गया तो एक बार फिर अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में ही इजरायली डिफेंस फोर्स घिर सकती है।

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