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कभी बर्तन धोने वाली कलिता माझी भी बंगाल सरकार में बनीं मंत्री, BJP ने दिया मौका

कभी बर्तन धोने वाली कलिता माझी भी बंगाल सरकार में बनीं मंत्री, BJP ने दिया मौका

श्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी सरकार में एक जून को 35 विधायकों को मंत्रीपद की शपथ दिलाई गई। शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में विधायक जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, स्वपन दासगुप्ता, डॉ शरदवत मुखर्जी, डॉ कल्याण चक्रवर्ती, अजॉय पोद्दार दीपक बर्मन, अर्जुन सिंह, शंकर घोष, गौरी शंकर घोष, तापस रॉय और मनोज कुमार ओरांव ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली।

इसके अलावा जोएल मुर्मू, हरे कृष्ण बेरा, आनंदमय बर्मन, अशोक डिंडा, नदियार चंद बाउरी, विशाल लामा, कलिता माझी, शांतनु प्रमाणिक जैसे विधायकों को राज्य मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इन मंत्रियों में एक खास नाम भी है, जिसे बंगाल में कोई नहीं जानता था। वह नाम लोगों के घरों में बर्तन धोने वाली कलिता माझी हैं।

टीएमसी को 12,535 वोटों से हराया

शुभेंदु सरकार में कलिता माझी को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है। माझी ने बीजेपी के टिकट पर ऑसग्राम विधानसभा सीट से जीत हासिल करके इतिहास रचा है। 37 साल की कलिता ने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार श्यामा प्रसन्ना लोहार को 12,535 वोटों से हराया है।

कौन हैं कलिता माझी?

कलिता माझी लोगों के घरों में घरेलू सहायिका के तौर पर काम करती थीं। वह दूसरों के घरों में जाकर बर्तन धोती थीं और घरेलू काम करती थीं। यह वही कलिता माझी हैं, जो कभी घरेलू नौकरानी के तौर पर काम करके 4,000 रुपये महीने कमाती थीं। कलिता माझी का सफर पक्के इरादे और राजनीतिक तरक्की की एक शानदार कहानी बयां कर रही है।

दरअसल, कलिता नौकरानी का काम करके, इसी पैसे से अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं। जानकार हैरानी होगी कि बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान भी कलिता माझी ने काम से कोई छुट्टी नहीं ली, जबकि इन कामों के जरिए वो हर महीने 2500 रुपये कमाती थीं। इस तरह बर्तन धोने का काम करते हुए भी कलिता माझी विधायक बन गईं और अब वह बंगाल की मंत्री बन गई हैं।

बीजेपी ने लगातार दो बार दिया मौका

हालांकि, कलिता मांझी बीजेपी की पुरानी कार्यकर्ता हैं। वह बीजेपी में सक्रिय रही हैं। उनकी सक्रियता को देखते हुए बीजेपी ने इससे पहले 2021 में भी विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार बनाया था। उस समय कलिता माझी लगभग 12,000 वोटों के अंतर से हार गई थीं। फिर भी वह 88,577 वोट हासिल करने में कामयाब रही थीं। इसी वजह से बीजेपी ने उन्हें दूसरा मौका दिया और वो इस बार जीतकर विधानसभा पहुंच गईं।

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