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कॉमनवेल्थ गेम्स: डेकाथलॉन में मेडल जीतने वाले तेजस्विन शंकर की कहानी क्या है?

कॉमनवेल्थ गेम्स: डेकाथलॉन में मेडल जीतने वाले तेजस्विन शंकर की कहानी क्या है?

भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के नाम एक और पदक दर्ज कराया। ग्लासगो में आयोजित प्रतियोगिता के डेकाथलॉन स्पर्धा में तेजस्विन ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया।

उनकी इस उपलब्धि पर खेल प्रेमियों और देशभर से उन्हें बधाइयां मिल रही हैं।

डेकाथलॉन एथलेटिक्स की सबसे चुनौतीपूर्ण स्पर्धाओं में से एक मानी जाती है, जिसमें खिलाड़ियों को 10 अलग-अलग इवेंट्स में अपना दमखम दिखाना होता है। तेजस्विन शंकर ने पूरे मुकाबले में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और कुल अंकों के आधार पर तीसरा स्थान हासिल कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

चार दिन पहले स्टेडियम में बैठकर रो रहे थे

भारतीय एथलीट तेजस्विन शंकर चार दिन पहले स्टेडियम के एक कोने में घुटनों के बल बैठे अपने आंसुओं को रोकने की कोशिश कर रहे थे। ऊंची कूद स्पर्धा में पहले ही प्रयास के बाद घुटने की पुरानी चोट फिर उभर आई थी। ऐसा लग रहा था कि राष्ट्रमंडल खेलों में उनका अभियान शुरू होने से पहले ही किसी बुरे सपने में बदल गया। लेकिन शुक्रवार शाम उसी स्टेडियम में उनके गले में डेकाथलन का ब्रॉन्ज मेडल चमक रहा था। कुछ ही दिनों में निराशा से अविश्वास और फिर ऐतिहासिक सफलता तक का यह सफर उनके चेहरे की मुस्कान में साफ झलक रहा था।

जीत खास क्यों?

तेजस्विन ऊंची कूद में भी पदक जीतने के इरादे से ग्लास्गो पहुंचे थे। चार वर्ष पहले उन्होंने इसी स्पर्धा में भारत के लिए पहला राष्ट्रमंडल पदक जीतकर इतिहास रचा था। इस बार पहले ही प्रयास के बाद पुरानी घुटने की चोट उभर आई और उन्हें प्रतियोगिता से हटना पड़ा। उस समय उनकी आंखों से निकले आंसू दर्द से ज्यादा हार मान लेने की भावना के थे। उन्होंने कहा मैं अगर उस समय अकेला होता तो शायद सब कुछ छोड़ देता। साथ ही उन्होंने कहा जब मैं वहां रो रहा था तब मुझे लग रहा था कि एक साल बर्बाद हो गया है।

कैसे तेजस्विन ने खुद को किया मोटिवेट?

बर्मिंघम 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में ऊंची कूद का ब्रॉन्ज मेडल पदक जीतने वाले तेजस्विन ने इस बार बिल्कुल अलग स्पर्धा डेकाथलॉन में पदक हासिल किया। उन्होंने कहा यही इसे और भी खास बनाता है। उन्होंने कहा, 'पिछली बार ऊंची कूद में ब्रॉन्ज जीता था अब डेकाथलॉन में मिला है। मुझे नहीं पता कि ऐसा करने वाले कितने खिलाड़ी होंगे।' जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने ऊंची कूद के साथ डेकाथलॉन में भी हिस्सा लेने का फैसला क्यों किया तो उन्होंने मुसकुराते हुए कहा, 'ये दिल मांगे मोर मुझे और करना है। ऊंची कूद अच्छी है लेकिन अगर आप ज्यादा कर सकते हैं तो क्यों नहीं? मेरा मानना है कि जब खुद को आगे बढ़ा सकते हैं, तो रुकना क्यों?'

हारी हुई बाजी जीत कैसे ली?

इस ऐतिहासिक उपलब्धि से पहले एक ऐसा पल भी आया था। जिसने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया था। ऊंची कूद से बाहर होने के बाद जब तेजस्विन निराशा में डूबे थे तब लंबी कूद के स्टार खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर उनके पास पहुंचे। गंभीर चोटों से जूझकर वापसी कर चुके श्रीशंकर अच्छी तरह समझते थे कि उनका साथी किस मानसिक स्थिति से गुजर रहा है। तेजस्विन ने कहा ऊंची कूद के बाद जब मैं पूरी तरह टूट चुका था तब मेरे पास आने वाले एकमात्र व्यक्ति श्रीशंकर थे।

उन्होंने कहा, 'उस समय अगर मैं किसी की सलाह सुनने वाला था तो वह सिर्फ वही थे। उन्हें भी यही चोट लगी थी बल्कि मुझसे कहीं ज्यादा गंभीर। आज वह लगभग नए पैर के सहारे फिर से छलांग लगा रहे हैं।'

श्रीशंकर ने उन्हें दो दिनों तक चलने वाली कठिन डेकाथलॉन प्रतियोगिता के बारे में सोचने के बजाय सिर्फ एक-एक स्पर्धा पर ध्यान देने की सलाह दी। तेजस्विन ने बताया, 'उन्होंने मुझसे कहा एक बार में सिर्फ एक स्पर्धा पर ध्यान दो। पहले 100 मीटर के लिए मैदान में उतरो वार्म-अप करो। अगर शरीर ठीक न लगे तो वहीं रुक जाना। तेजस्विन ने कहा मेरी इस सफलता के पीछे श्रीशंकर सबसे बड़े कारणों में से एक हैं। उनकी बातें लगातार मेरे मन में गूंजती रहीं।'

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