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महिला डॉक्टर को पार्षद ने मारा थप्पड़, स्टाफ से मारपीट, कितना बड़ा अपराध है यह?

महिला डॉक्टर को पार्षद ने मारा थप्पड़, स्टाफ से मारपीट, कितना बड़ा अपराध है यह?

हाराष्ट्र के डोंबिवली में कल्याण डोंबिवली नगर निगम (KDMC) अस्पताल में शिवसेना के एक पार्षद ने एक महिला डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों पर हमला किया है। जैसे ही यह खबर फैली राज्य के सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों ने हड़ताल का एलान कर दिया।

कई जगहों पर डॉक्टर अब काम पर नहीं जा रहे हैं। हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

शिवसेना के पार्षद की पहचान रमेश म्हात्रे के तौर पर हुई है। उसने स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले की वजह NICU में बेड की कमी बताई है। एक गर्भवती महिला के परिवार को डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल में NICU बेड भरे हुए हैं, इसलिए जरूरत पड़ने पर बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ सकता है। यह बात, उसे नागवार गुजरी।

पार्षद रमेश म्हात्रे ने किया क्या था?

पार्षद रमेश म्हात्रे अपने समर्थकों के साथ अस्पताल पहुंचा और उसके समर्थक तीन मिनट से ज्यादा वक्त तक डॉक्टरों और स्टाफ को पीटते रहे। महिला डॉक्टर मदद मांगने के लिए अपना मोबाइल निकाल रही थी, लेकिन हमलावरों ने उसे छीनने की कोशिश की। डॉक्टर डेस्क के पीछे छिपने की कोशिश करने लगीं तो वहां भी उन्हें मार दिया।

अब क्या चाहते हैं डॉक्टर?

अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारी हड़ताल पर हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्यकर्मियों पर हो रहे हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। KDMC कमिश्नर ने बताया कि पार्षद रमेश म्हात्रे के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने कहा कि डॉक्टरों पर हमले अब आम हो गए हैं। यह सिर्फ एक डॉक्टर पर नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य व्यवस्था पर हमला है।

हड़ताल का असर क्या है?

हड़ताल के कारण सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं बंद हैं, जबकि इमरजेंसी सेवाएं जारी हैं। इससे मरीजों को काफी परेशानी हो रही है।

क्या डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी हड़ताल पर जा सकते हैं?

संवैधानिक मामलों की विशेषज्ञ अधिवक्ता स्निग्धा त्रिपाठी बताती हैं, 'भारत में हड़ताल, मौलिक अधिकारों नहीं हैं। सु्प्रीम कोर्ट और अलग-अलग राज्यों के हाई कोर्ट भी कह चुके हैं कि हड़ताल बहुत नैतिक नहीं हैं। नेशनल मेडिकल कमीशन की आचार संहिता भी कहती है कि डॉक्टरों से अपेक्षा की जाती है कि वे आपातकालीन सेवाएं कभी बंद न करें।'

एडवोकेट स्निग्धा ने कहा, 'पूरी तरह हड़ताल करके इमरजेंसी, ICU, या OT सेवाएं रोकना अनैतिक माना जाता है। कई राज्यो में 'इसेंशियल सर्विस मेंटिनेंस एक्ट' (ESMA) NEIT लागू है। ऐसे हड़तालों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है, हड़ताल करने वालों पर गाज गिर सकती है।'

क्या इन डॉक्टरों पर भी गाज गिरेगी?

एडवोकेट स्निग्धा त्रिपाठी ने कहा, 'डॉक्टर वैकल्पिक सेवाएं बंद करते हैं, इमरजेंसी नहीं। रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन समय-समय पर वेतन, सुरक्षा, या कार्य-परिस्थितियों को लेकर हड़ताल करते रहे हैं। कोलकाता के RG कर रेप केस के दौरान भी डॉक्टर हड़ताल पर गए थे।

डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला कितना बड़ा अपराध है?

एडवोकेट स्निग्धा त्रिपाठी, दिल्ली हाई कोर्ट:-
भारतीय न्याय संहिता के तहत ऑन-ड्यूटी सरकारी डॉक्टरों पर हमले को 'लोक सेवक के काम में बाधा डालने और चोट पहुंचाने' के तौर पर देखा जाता है। धारा 121 गंभीर चोट पहुंचाने से जुटी है, धारा 221 सरकारी काम में बाधा डालने से जुड़ी है। अपराध की प्रकृति पर निर्भर करती है।

एडवोकेट स्निग्धा त्रिपाठी ने कहा, 'डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर ड्यूटी के दौरान हमला भारत में एक गंभीर अपराध है। राज्यों के अलग-अलग कानून तो हैं लेकिन केंद्रीय स्तर पर अभी कोई एक समान कानून नहीं है।'

एडवोकेट स्निग्धा ने कहा, ' देश के करीब 20 से अधिक राज्यों ने अपने स्तर पर विशेष कानून बनाए हैं, जिनमें स्वास्थ्य कर्मियों पर हिंसा करने पर 3 से 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का अलग से प्रावधान है।'

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