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Prayagraj Ground Report: महिलाएं, बुजुर्ग बच्चे सभी जा रहे खुले में शौचालय, गांव में 80 फीसदी परिवारों के पास शौचालय नहीं

Prayagraj Ground Report: महिलाएं, बुजुर्ग बच्चे सभी जा रहे खुले में शौचालय, गांव में 80 फीसदी परिवारों के पास शौचालय नहीं

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दीवारों पर बनी हर घर शौचालय वाला लाइन तो देखा या सुना ही होगा। उसके बाद भी लोग खुले में शौच के लिए जाते हुए दिख ही जाते हैं। चाहे वो महिला ही क्यों न हो। सीमा की शादी को पचास साल से ज़्यादा हो गया है।

आधा जीवन मानों निकल गया है। पर उनके घर में आज तक कोई शौचालय नहीं बना है। कई वर्ष बीत चुके हैं और सीमा अभी भी शौचालय के लिए बाहर खुले में ही जाती हैं।

रिपोर्ट - सुनीता, लेखन - रचना

खुले में शौचालय जाती महिलाएं (फोटो साभार: सुनीता)

महिलाओं के बाहर शौचालय जाने के लिए फ़िल्म जरुर बन गई लेकिन शौचालय नहीं बनी।

प्रयागराज के जसरा ब्लॉक के सेहुड़ा गांव में गंभीरपुर मजरे में स्वच्छता व्यवस्था की ज़मीनी हक़ीकत सरकारी दावों से कुछ अलग ही नजर आ रही है। खबर लहरिया के रिपोर्टिंग दौरान गांव में कई परिवारों की शिकायत है कि उन्हें अब तक किसी भी तरह की शौचालय सुविधा नहीं मिली है। अब इसके कारण बच्चे, बूढ़े, महिलाएं सब लोग बाहर ही शौच के लिए जाते हैं।

सेहुड़ा गांव की रहने वाली रानी बताते हुए कहती हैं कि 'इस समय खेतों में धान की फसल लगी है और चारों तरफ पानी भरा हुआ है ऐसे में महिलाओं और बुजुर्गों के लिए शौच के लिए साफ और सूखी जगह तलाशना मुश्किल हो गया है। खेतों में जाने पर फिसलने का डर होता है। कीड़े-मकोड़ों और बिच्छू जैसे जहरीले जीवों के काटने का खतरा भी होता है।'

गांव वालों का दावा है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। एक महिला शौच लिए बाहर गई थी उसी समय खेत में जहरीले सांप ने उन्हें काट लिया। अस्पताल में दवा करवाया गया तो उनकी जान तो बच गई पर डर अभी भी बना है। बताते हैं इस तरह की घटना गांव में कई बार हो चुकी हैं।

खेतों में पानी और फसल फिर भी शौचालय के लिए खेतों में ही जा रहे शौच करने (फोटो साभार: सुनीता)

'यदि कभी पेट खराब हो जाए तो सबसे बड़ी मुसीबत आन पड़ती है। महिलाओं या किसी बुजुर्ग का अचानक पेट खराब हो जाए, रात में शौच की जरूरत पड़े तो स्थिति बेहद कठिन हो जाती है। घर के आसपास शौचालय नहीं होने के कारण खेतों की ओर ही जाना पड़ता है। बारिश के दिनों में खेतों में धान की फसल और पानी के कारण शौच की जगह तक नहीं मिलती। महिलाओं के लिए यह सम्मान से जुड़ा बात आ जाता है।'

सीमा बात करते हुए सवाल करती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ आखिर कितने जरूरतमंद परिवारों तक ये सुविधा पहुंच पाई है?

80 फीसदी परिवारों के पास शौचालय नहीं

सरकार की स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) योजना के तहत वो परिवार जिनके घरों में शौचालय नहीं है उन परिवारों को व्यक्तिगत घरेलू शौचालय बनाने के लिए 12 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। योजना के दायरे में बीपीएल परिवारों के अलावा अनुसूचित जाति-जनजाति के छोटे परिवार, छोटे और सीमांत किसान, भूमिहीन मज़दूर, दिव्यांग सदस्य वाले और महिला मुखिया वाले परिवार भी शामिल है। इसके बावजूद सेहुड़ा गांव के गंभीरपुर मजरे में कई परिवारों को अब तक शौचालय की सुविधा नहीं मिल सकी है।

खुले में शौच जाने की सबसे बड़ी परेशानी महिलाओं को (फोटो साभार: सुनीता)

गांव वालों के मुताबिक मजरे में करीब 80 फ़ीसदी परिवारों के पास शौचालय नहीं है।

जनगणना-2011 में भी ग्रामीण और शहरी परिवारों के घरों में शौचालय की उपलब्धता और खुले में शौच की स्थिति से जुड़े आंकड़े दर्ज किए गए थे। इसमें यह जानकारी जुटाई गई थी कि कितने परिवारों के घर में शौचालय है और कितने परिवार इस सुविधा से वंचित हैं। इसके बाद स्वच्छता को लेकर कई सरकारी योजनाएं और अभियान चलाए गए।

लेकिन 2026 में भी ये बस आँकड़ा ही बन कर रह गया है।

गांव वालों ने की प्रशासन से मांग

गांव वाले चाहते हैं कि जसरा ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर तत्काल सर्वे कराया जाए। उस सर्वे में ये पता लगाया जाए कि किन जरूरतमंद परिवारों के घर अब तक शौचालय नहीं बन पाया है उनकी सूची तैयार की जानी चाहिए। वे ये भी चाहते हैं कि सरकारी रिकॉर्ड में जिन परिवारों को शौचालय निर्माण का लाभार्थी बताया गया है उनकी भी ज़मीन की जांच हो। ये देखा जाए कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज शौचालय सच में संबंधित परिवार के घर में बना है या नहीं। अगर बन भी गया है तो वो शौचालय इस्तेमाल की स्थिति में है या नहीं ये भी देखा जाए।

इससे योजना के लाभ और सरकारी दावों के बीच की सच्चाई और दावा सामने आ सकेगी।

खेतों में फसल सड़क की स्थिति भी खराब (फोटो साभार: सुनीता)

उसी गांव के निवासी राजकिशोर के मुताबिक गांव में सामुदायिक शौचालय की व्यवस्था भी नही है। स्वच्छ भारत मिशन के व्यक्तिगत घरेलू शौचालय के लिए पर्याप्त जगह और संसाधन उपलब्ध नहीं हैं ऐसे में वहां सामुदायिक शौचालय की व्यवस्था भी की जा सकती है।

प्रधान ने कहा हमारे कार्यकाल में कम आए हैं शौचालय

ग्राम प्रधान रज्जन द्वारा खबर लहरिया को बताया गया कि ग्राम पंचायत की आबादी करीब तीन हजार है। उनके कार्यकाल में शौचालय की संख्या कम आई है। इस दौरान करीब 55 शौचालय स्वीकृत हुए हैं जिनका लाभ पंचायत मने मौजूद जरूरतमंद परिवारों को दिया गया है। इनमें आदिवासी और मुस्लिम समुदाय के परिवार शामिल हैं। जिन परिवारों को अब तक शौचालय का लाभ नहीं मिल पाया है उनमें धोबी और कुशवाहा समुदाय के लोग शामिल हैं।

प्रधान ने आगे बताया कि दोबारा शौचालय के लिए आवेदन किया जा रहा है। जिन परिवारों को सुविधा नहीं मिली है वो अभी आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर भी सर्वे कराया जाएगा, ताकि यह पता चल सके कि कितने परिवार शौचालय की सुविधा से वंचित हैं और पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाया जा सके।

एडीओ पंचायत ने कहा आवेदन करने पर लाभ मिलेगा

एडीओ पंचायत विनोद कुमार के मुताबिक उनके ब्लॉक में कुल 63 ग्राम पंचायत हैं और सभी गांव में शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए योजना के तहत काम किया गया है। सेहुड़ा गांव में भी शौचालय बनवाए गए थे। उनके मुताबिक कुछ लोगों ने शौचालय बनाने से मना कर दिया। अब आवेदन किए जा रहे हैं जिनको जरुरत हैं वो आवेदन कर सकते हैं।

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Khabar Lahariya