स्मार्ट मीटर के मुद्दे को ज़मीनी स्तर से समझने के लिए खबर लहरिया ने अलग-अलग राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ में ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। इस दौरान लोगों से सीधे बात की गई जिससे कई अहम बातें और समस्याएं सामने निकलकर आईं।

स्मार्ट मीटर के मुद्दे को ज़मीनी स्तर से समझने के लिए खबर लहरिया ने अलग-अलग राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ में ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। इस दौरान लोगों से सीधे बात की गई जिससे कई अहम बातें और समस्याएं सामने निकलकर आईं।
छत्तीसगढ़ में अब एक बड़ा सवाल उठ रहा है। लोगों का कहना है कि जब राज्य में अपना पानी है अपना कोयला है और उसी जमीन से ये संसाधन निकलते हैं तो फिर यहां के लोगों के लिए बिजली इतनी महंगी क्यों है? यही कोयला जब दूसरे राज्यों, जैसे राजस्थान, भेजा जाता है और वहां बिजली महंगी होती है तो बात समझ में भी आती है लेकिन जहां से ये संसाधन निकल रहे हैं वहीं के लोगों को ही ज्यादा कीमत क्यों चुकानी पड़ रही है? यही बात अब लोगों के गुस्से और विरोध की बड़ी वजह बनती जा रही है।
सवाल है -
कुल मिलाकर स्मार्ट मीटर को बेहतर और पारदर्शी बिजली व्यवस्था के नाम पर लाया गया था लेकिन ज़मीन पर इसकी तस्वीर कुछ और ही दिख रही है। अलग-अलग राज्यों से सामने आई रिपोर्टिंग में साफ दिखता है कि बड़ी संख्या में लोग इससे परेशान हैं। कहीं बिल अचानक बढ़ रहा है कहीं बिना समझ के रिचार्ज खत्म हो रहा है तो कहीं लोग डर-डर कर बिजली इस्तेमाल कर रहे हैं।
अब सवाल यही खड़ा होता है कि क्या स्मार्ट मीटर सच में लोगों के लिए सुविधा लेकर आया है या फिर एक नई परेशानी बन गया है? जब लोग पहले से ही गैस की किल्लत, कमाई की दिक्कत और महंगाई से जूझ रहे हैं तब बढ़ते बिजली बिल उनकी मुश्किल और बढ़ा रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि इतनी गर्मी में भी अगर लोग कूलर या पंखा चलाने से डरें यह सोचकर कि बिल ज्यादा आ जाएगा तो फिर इस व्यवस्था को सुविधाजनक कैसे कहा जा सकता है? क्या तकनीक लोगों की जिंदगी आसान बना रही है या उन्हें और मुश्किल में डाल रही है यह सवाल अब सरकार और सिस्टम दोनों के सामने खड़ा है।