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Melody: मेलोडी खाओ खुद जान जाओ, किसने लिखी ये लाइन? PM मोदी ने मेलोनी को दी टॉफी तो चर्चा में आई

Melody: मेलोडी खाओ खुद जान जाओ, किसने लिखी ये लाइन? PM मोदी ने मेलोनी को दी टॉफी तो चर्चा में आई

Khabar Monkey 5 days ago

मेलोडी खाओ खुद जान जाओ… मेलोडी टॉफी के लिए यह लाइन यूं ही नहीं लिखी गई, इसके पीछे कई चुनौतियां थी जिन्हें ध्यान में रखते हुए 90 के दशक में इसका विज्ञापन तैयार हुआ था. पीएम मोदी के इटली के दौरे यह टॉफी चर्चा में आ गई है.

इटली पहुंचने पर पीएम मोदी ने बुधवार को वहां की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी का पैकेट तोहफे में दिया. इसका वीडियो खुद मेलोनी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है.

Melody: मेलोडी खाओ खुद जान जाओ, किसने लिखी ये लाइन? PM मोदी ने मेलोनी को दी टॉफी तो चर्चा में आई

इसके साथ ही वो लाइन भी वायरल हो रही है जिसे मेलोडी के विज्ञापन की ब्रांडिंग में इस्तेमाल किया गया था.वो लाइन है मेलोडी खाओ खुन जान जाओ. यह लाइन 90 के दशक में लिखी गई थी. अब सवाल है कि यह लाइन किसने लिखी जो सोशल मीडिया पर एक बार फिर पॉपुलर हो रही है.

मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ, किसने लिखी?

पीएम मोदी ने मेलोनी को मेलोडी का जो पैकेट गिफ्ट किया है उस पर पार्ले लिखा है. पार्ले प्रोडक्ट्स ही वो कंपनी जो यह टॉफी बनाती है. तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पार्ले नाम वाले शेयरों में भी 5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. मार्केट में मेलोडी की एंट्री 90 के दशक में हुई. उस दौर में मार्केट में बच्चों के लिए खासतौर पर फ्रूट फ्लेवर वाली कैंडियों का दबदबा था. इस दबदबे को तोड़ने के लिए मेलोडी को चॉकलेट टॉफी के तौर पर इसे पेश किया गया.

मेलोडी को जब बनाया गया तो इसका टेस्ट और इसकी ब्रांडिंग इसकी पहचान बनी. डबल लेयर में इसका डिजाइन था. बाहर से कैरमल और अंदर से चॉकलेट का फ्लेवर बच्चों और बड़ों दोनों को पसंद आया और इसकी ब्रांडिंग के लिए तैयार किया गया जिंगल भी.

इसकी ब्रांडिंग की पूरी जिम्मेदारी मार्केटिंग एजेंसी एवरेस्ट को सौंपी गई. चुनौती थी कि इसे चॉकलेट प्रोडक्ट के रूप में कैसे पेश किया जाए जो बच्चों को पसंद आए. कैम्पेन की क्रिएटिव टीम का नेतृत्व हरेश मूरजानी कर रहे थे और उन्हें एक शानदार विचार आया. वो विचार यह था कि बच्चों के चहेते या उनके जैसा बनने की इच्छा रखने वाले लोगों को दिखाया जाए, जो मेलोडी के बारे में एक प्रश्न पूछें और बच्चा उसका उत्तर दे.इसी को ध्यान में रखते हुए कॉपीराइटर सुलेखा बाजपेयी ने इसकी पंक्तियां लिखीं. यह कंपनी को काफी पसंद आईं.

कॉपीराइटर सुलेखा बाजपेयी ने इसके जिंगल की पंक्तियां लिखीं.

चुनाैतियों पर कैसे खरी उतरी लाइन?

मेलोडी के लिए जिंगल तो बन गया था लेकिन सवाल था कि इसके विज्ञापन का फिल्मांकन कैसे हो जो बच्चों के बीच पॉपुलर हो जाए. यह सबसे बड़ी चुनौती थी. मेलोडी को एक चॉकलेट प्रोडक्ट के तौर पर पेश करना था इसलिए जितने भी विज्ञापन बनाए गए उसकी ब्रांडिंग इसी लाइन से शुरू की गई ताकि बच्चों के जेहन में यह साधारण टॉफी की तरह नहीं, चॉकलेट टॉफी के रूप में तस्वीर बनाए.

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विज्ञापन की शुरुआत यहीं से होती है कि मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है? विज्ञापनों में अलग-अलग लोकेशनों में यह सवाल पूछा जाता है तो हर बार एक बच्चा जवाब देता है कि मेलोडी खाओ खुद जान जाओ. और अंत में लाइन आती है मेलाेडी है चॉकलेटी, मेलोडी है चॉकलेटी.

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