Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
टाटा ग्रुप में बड़ा ट्विस्ट! नोएल टाटा ने उठाए सवाल; टाटा संस के चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति पर लगी रोक

टाटा ग्रुप में बड़ा ट्विस्ट! नोएल टाटा ने उठाए सवाल; टाटा संस के चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति पर लगी रोक

Khabar Monkey 3 days ago

बीते कुछ समय से टाटा ग्रुप में कई तरह की हलचल देखने को मिल रही हैं. साथ ही ऐसी आवाजें सुनने को मिल रही हैं, जो इससे पहले कभी नहीं सुनी गई थी. वास्तव में इस मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने पिछले हफ्ते हुई मीटिंग के बाद टाटा संस के बोर्ड को बताया कि कई अहम मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं, जिसकी वजह से होल्डिंग कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर कोई भी औपचारिक चर्चा करना अभी जल्दबाजी होगी.

टाटा ग्रुप में बड़ा ट्विस्ट! नोएल टाटा ने उठाए सवाल; टाटा संस के चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति पर लगी रोक

उन्होंने कहा कि इससे चंद्रशेखरन और टाटा के बीच गतिरोध पैदा हो सकता है. टाटा ने चंद्रशेखरन से ग्रुप के पांच साल के रणनीतिक रोडमैप, शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप को बाहर निकलने का विकल्प देने के लिए एक ऐसे फ्रेमवर्क के बारे में ज्यादा क्लैरिटी मांगी, जिसमें टाटा संस को पब्लिक न करना पड़े, और साथ ही लिस्टिंग के लंबे समय से चल रहे विवादित मुद्दे पर उनकी औपचारिक स्थिति भी जाननी चाही.

ट्रस्ट्स और ग्रुप की होल्डिंग कंपनी में गवर्नेंस और दूसरे मामलों को लेकर चल रही उथल-पुथल और एयर इंडिया और बिगबास्केट जैसी यूनिट्स के प्रदर्शन पर उठ रहे सवालों के बीच, इन मुद्दों ने भी जोर पकड़ा है. 26 मई को हुई बोर्ड मीटिंग के आखिर में, कुछ डायरेक्टर्स ने अनौपचारिक तौर पर पूछा कि क्या चंद्रशेखरन की तीसरी बार नियुक्ति पर अगली बार विचार किया जा सकता है.

Khabar Monkey

आम सहमति जरूरी

जानकार लोगों के अनुसार चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर दिए जवाब में नोएल टाटा ने कहा कि अभी भी बहुत जल्दबाजी होगी, और उन्होंने उन अनसुलझे मुद्दों और अनुत्तरित सवालों की ओर इशारा किया, जिन पर अभी और चर्चा की जरूरत है. एयर इंडिया, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और टाटा डिजिटल के चीफ एग्ज़ीक्यूटिव्स ने मीटिंग में बोर्ड के सामने अपने-अपने बिज़नेस के बारे में प्रेजेंटेशन दीं. इस मामले से जुड़े एग्जीक्यूटिव्स ने बताया कि नोएल टाटा ने बिगबास्केट और एयर इंडिया पर काफी डिटेल में फीडबैक दिया.

चंद्रशेखरन ने 26 मई को एक स्पेशल बोर्ड मीटिंग बुलाई थी, ताकि नोएल टाटा द्वारा होल्डिंग कंपनी की पिछली बोर्ड मीटिंग (24 फ़रवरी को हुई) में उठाए गए मुद्दों का विस्तार से जवाब दिया जा सके. उस पिछली मीटिंग में उनकी तीसरी बार नियुक्ति पर विचार करने का फैसला टाल दिया गया था. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की 66 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसके ज़रिए वह कंपनी को कंट्रोल करता है. SP ग्रुप के पास 18 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसे वह अपना कर्ज चुकाने के लिए बेचना चाहता है.

नोएल टाटा ने एयर इंडिया और बिगबास्केट में हो रहे घाटे पर चिंता जताई थी और सुधार के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही थी. टाटा संस की अगली बोर्ड मीटिंग 12 जून को होनी है, जिसमें सालाना अकाउंट्स पर चर्चा की जाएगी. इस बातचीत से परिचित लोगों ने बताया कि नोएल टाटा ने यह भी संकेत दिया कि दोबारा नियुक्ति पर विचार करने के लिए कोई भी समय-सीमा या तारीख आपसी चर्चा और आम सहमति से ही तय की जाएगी.

SP ग्रुप वाला मामला

टाटा संस और नोएल टाटा ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की. टाटा संस के करीबी अधिकारियों के अनुसार, SP ग्रुप के साथ बाहर निकलने की योजना पर चर्चा तब तक ज्यादा मायने नहीं रखती, जब तक कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से लिस्टिंग के मामले पर कोई स्पष्टता नहीं आ जाती. उनमें से एक ने कहा कि टाटा ग्रुप की वैल्यू इतनी ज्यादा है कि SP ग्रुप से हिस्सेदारी वापस खरीदने के लिए बिना लिस्टिंग वाले विकल्प पर आसानी से विचार नहीं किया जा सकता.

जब तक इस मामले पर RBI की ओर से कोई स्पष्टता नहीं आ जाती, तब तक कोई भी आगे नहीं बढ़ सकता. एक 'अपर-लेयर' नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी के तौर पर, टाटा संस को एक इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लाना जरूरी है, जिससे संभवतः मालिकाना हक कम हो सकता है. उसने RBI से इस मामले में छूट मांगी है.

दोबारा नियुक्ति पर कोई जल्दबाजी नहीं

ऐसा भी समझा जाता है कि चंद्रशेखरन इस चरण में कोई औपचारिक 5-वर्षीय विकास योजना पेश करने के इच्छुक नहीं हैं. मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इसी तरह, उन्हें दोबारा नियुक्ति के मामले को उठाने की भी कोई जल्दी नहीं है. अधिकारियों ने बताया कि रतन टाटा के कार्यकाल के दौरान, दोबारा नियुक्ति का मुद्दा आमतौर पर कार्यकाल समाप्त होने से एक महीने पहले उठाया जाता था.

यह टाटा ट्रस्ट्स ही था जिसने 2025 में एक प्रस्ताव पारित किया था कि नेतृत्व में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए, चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का मुद्दा उनके कार्यकाल समाप्त होने से एक साल पहले ही उठा लिया जाए. चर्चाओं से परिचित लोगों ने बताया कि 26 मई की बैठक में चंद्रशेखरन ने मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से बोर्ड और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के सामने विस्तृत प्रेजेंटेशन पेश करवाए. पिछली बोर्ड बैठक के विपरीत, जिसमें कड़ी छानबीन और अनसुलझे सवालों का बोलबाला था, इस सत्र में मुख्य रूप से चल रहे व्यवसायों पर ही जोर दिया गया.

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Khabar Monkey