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बारिश से गेहूं की फसल को नुकसान, मंडियों में रखी हजारों टन उपज भीग गई.. आढ़ती परेशान

बारिश से गेहूं की फसल को नुकसान, मंडियों में रखी हजारों टन उपज भीग गई.. आढ़ती परेशान

Kisan India 1 month ago

Punjab Wheat Farmers: पंजाब में रविवार को हुई बारिश से मंडियों में रखी गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है. खासकर फाजिल्का जिले में लाखों बोरी गेहूं भीग गईं और कई बोरे पानी में डूब गए. दरअसल, गेहूं की उठान समय पर नहीं हो पाई, जिससे जगह की कमी हो गई. इसी वजह से अनाज को सड़कों और निचले इलाकों में रखना पड़ा, जहां बारिश ने नुकसान बढ़ा दिया.

आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव गोल्डी सचदेवा ने ‘द ट्रिब्यून’ से कहा कि इस देरी का सबसे ज्यादा नुकसान आढ़तियों को उठाना पड़ रहा है. वे खराब हुए गेहूं को बचाने के लिए उसे अलग करके दोबारा भरने का काम कर रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बारिश में भीगे गेहूं को समय पर अलग करके नए बोरों में नहीं भरा गया, तो उसकी गुणवत्ता खराब हो सकती है.

46 फीसदी गेहूं अभी तक उठाया नहीं जा सका है

जानकारी के मुताबिक, ठेकेदार समय पर पर्याप्त ट्रक उपलब्ध नहीं करा पाया, जिससे गेहूं की उठान में देरी हुई और किसानों व आढ़तियों दोनों को नुकसान उठाना पड़ा. मार्केट कमेटी के अनुसार, फाजिल्का की मुख्य अनाज मंडी में करीब 7.84 लाख गेहूं के बोरे (प्रत्येक 50 किलो) अब भी उठान का इंतजार कर रहे हैं, जिनमें से अधिकांश खुले में रखे हुए हैं. कुल 7,34,838 मीट्रिक टन खरीदे गए गेहूं में से लगभग 3,37,529 मीट्रिक टन यानी करीब 46 फीसदी अभी तक उठाया नहीं जा सका है.

मंडी में किसानों को हो रही परेशानी

मार्केट कमेटी के सचिव मंदीप कामरा ने उठान में देरी की बात स्वीकार की, लेकिन कहा कि रात में ही मोटरों की मदद से पानी निकाल दिया गया था. उनके अनुसार, कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, हालांकि निचले इलाकों में रखे कुछ बोरों को हल्का नुकसान हो सकता है. वहीं, बारिश ने लुधियाना के गिल रोड स्थित अनाज मंडी की कमजोर व्यवस्थाओं को उजागर कर दिया. अचानक बारिश के कारण किसान अपने कटे हुए गेहूं को बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए. मंडी में शेड की कमी होने से किसानों के पास तिरपाल ही एकमात्र सहारा रह गया. ढंडरा गांव के किसान दीदार सिंह ने कहा कि बारिश अचानक आई और उन्होंने जल्दबाजी में फसल को ढकने की कोशिश की, लेकिन तिरपाल पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. वहीं, प्रीतम सिंह ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि वे सालों से बेहतर शेड की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब भी पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं. उन्होंने कहा कि जब तक उठान नहीं होती, तब तक खुले में रखे अनाज को नुकसान का खतरा बना रहता है, जो बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है.

मंडी के मजदूरों ने भी अपनी परेशानी जताई

मंडी के मजदूरों ने भी अपनी परेशानी जताई. उनका कहना है कि जब अचानक बारिश होती है, तो वे जल्दबाजी में अनाज को ढकने की कोशिश करते हैं, लेकिन सब कुछ बचा पाना संभव नहीं होता. पानी जमा होने से फसल खराब होने लगती है और सड़ने के संकेत भी दिखने लगे हैं. समराला के पास के एक गांव के किसान ने बताया कि मंडी में बेहतर सुविधाओं की मांग कई सालों से लंबित है. उन्होंने कहा कि सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन अनाज मंडी में सही इंफ्रास्ट्रक्चर की उनकी मांग अब तक पूरी नहीं हुई है.

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