Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
भंडारण संकट से जूझ रहा पंजाब, गोदाम फुल, नई धान फसल की खरीद पर खतरा

भंडारण संकट से जूझ रहा पंजाब, गोदाम फुल, नई धान फसल की खरीद पर खतरा

Kisan India 1 week ago

Punjab News: पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार एक बड़ी अनाज भंडारण समस्या का सामना कर रही है. राज्य के गोदाम पहले से ही पिछले तीन खरीद सीजन के करीब 180 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) चावल से भरे हुए हैं.

वहीं, 60 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले कवर एंड प्लिंथ (CAP) भंडारण केंद्रों में भी जगह नहीं बची है. स्थिति यह है कि राज्य में नए अनाज को रखने के लिए पर्याप्त भंडारण स्थान नहीं बचा है. इससे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग आगामी धान खरीद सीजन को लेकर चिंतित है, क्योंकि अक्टूबर-नवंबर में नई धान की फसल मंडियों में आने लगेगी.

भंडारण की कमी का असर पिछले साल खरीदे गए धान की मिलिंग पर भी पड़ रहा है. अभी भी करीब 45 लाख मीट्रिक टन धान चावल मिलों में मिलिंग का इंतजार कर रहा है. आमतौर पर मिलिंग के बाद सारा चावल मार्च के अंत तक सरकार को सौंप दिया जाता है, लेकिन इस बार प्रक्रिया धीमी चल रही है. इसके अलावा, चावल मिलों और अनाज मंडियों की लगभग 30 लाख मीट्रिक टन की भंडारण क्षमता भी पूरी तरह भर चुकी है. ऐसे में नई फसल की खरीद, मिलिंग और भंडारण को लेकर राज्य सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.

पुराना चावल जल्द नहीं उठाया गया

पंजाब सरकार को चिंता है कि अगर चावल मिलों में रखा पुराना चावल जल्द नहीं उठाया गया, तो मिल मालिक आगामी धान खरीद सीजन में हिस्सा लेने से इनकार कर सकते हैं. पिछले साल भी ऐसी स्थिति देखने को मिली थी. इस समस्या को देखते हुए पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय से राज्य से दूसरे राज्यों में भेजे जाने वाले खाद्यान्न की मासिक ढुलाई बढ़ाने की मांग की है. सरकार का कहना है कि जिन राज्यों में अनाज भेजा जाता है, वहां अभी भी भंडारण की पर्याप्त जगह उपलब्ध है.

10 लाख मीट्रिक टन गेहूं की ढुलाई

फिलहाल पंजाब से हर महीने करीब 6 से 6.5 लाख मीट्रिक टन चावल और 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं दूसरे राज्यों में भेजा जाता है. राज्य सरकार चाहती है कि जुलाई से अक्टूबर तक हर महीने 10 लाख मीट्रिक टन चावल और 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं की ढुलाई की जाए. इससे करीब 80 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त भंडारण स्थान खाली हो सकता है. एक अधिकारी ने कहा कि यदि पूरे साल यही रफ्तार बनी रही तो भंडारण संकट काफी हद तक कम हो सकता है. हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस मांग पर कोई जवाब नहीं मिला है.

दूसरे राज्यों में अनाज की ढुलाई धीमी रही

पंजाब में खाद्यान्न भंडारण संकट लगातार गहराता जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों से पंजाब से दूसरे राज्यों में अनाज की ढुलाई धीमी रही है और इस साल स्थिति और खराब हो गई है. हालात ऐसे हैं कि मौजूदा समय में मिलों में तैयार हो रहे चावल या आने वाली धान की फसल को रखने के लिए एक भी सरकारी गोदाम खाली नहीं है. पंजाब राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत भूषण बंसल ने कहा कि सरकार ने धान की मिलिंग की समयसीमा 30 जून तक बढ़ा दी थी, लेकिन अभी भी करीब 45 लाख मीट्रिक टन धान की मिलिंग बाकी है. इससे लगभग 30 लाख मीट्रिक टन चावल तैयार होगा, जिसे सरकारी गोदामों में रखना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि भंडारण के लिए जगह नहीं होने के कारण सरकार चावल का उठान नहीं कर पा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया और धीमी हो रही है.

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Kisan India