Gold-Silver Rate Today: 28 अप्रैल को सोने-चांदी के बाजार में एक बार फिर हलचल देखने को मिली, जिसने निवेशकों को सतर्क कर दिया है. घरेलू वायदा बाजार (MCX) में आज सोना और चांदी दोनों की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई. वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेत, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने मिलकर कीमती धातुओं पर दबाव बना दिया है, जिससे बाजार का मूड थोड़ा अस्थिर नजर आ रहा है.
MCX पर सोना-चांदी का ताजा भाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सुबह 9:20 बजे के आसपास सोने और चांदी के रेट इस प्रकार रहे:
- जून डिलीवरी वाला सोना: 1,51,603 रुपये प्रति 10 ग्राम (0.08 फीसदी की गिरावट)
- मई डिलीवरी वाली चांदी: 2,40,728 रुपये प्रति किलोग्राम (0.45 फीसदी की गिरावट)
हालांकि गिरावट मामूली रही, लेकिन लगातार बदलते ग्लोबल संकेतों ने बाजार में अस्थिरता बनाए रखी है.
IBJA के अनुसार सोने-चांदी का भाव
IBJA के अनुसार 28 अप्रैल 2026 (सुबह) को सोने-चांदी की रिटेल कीमतों में बदलाव देखा गया है. 999 शुद्ध सोने की कीमत 14956 रुपये प्रति ग्राम रही, जबकि 22 कैरेट सोना 14597 रुपये, 20 कैरेट 13311 रुपये, 18 कैरेट 12114 रुपये और 14 कैरेट 9646 रुपये प्रति ग्राम दर्ज किया गया. वहीं चांदी (999) की कीमत 238339 रुपये प्रति किलोग्राम रही. (ये सभी दरें 3 फीसदी GST और मेकिंग चार्ज के बिना हैं.)
क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के दाम?
सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं:
- डॉलर की मजबूती: डॉलर मजबूत होने से सोने की मांग घटती है
- तेल की कीमतों में उछाल: मिडिल ईस्ट तनाव के कारण कच्चे तेल के दाम बढ़े
- महंगाई का डर: तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका
- जियोपॉलिटिकल तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से बाजार में अस्थिरता
- इन सभी वजहों से निवेशक सतर्क हो गए हैं और सोने-चांदी में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है.
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में सोना और चांदी में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. वैश्विक तनाव, तेल की कीमतें और डॉलर की चाल आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा तय करेंगे. निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की चाल पर नजर रखते हुए ही कोई बड़ा फैसला लें.
कुल मिलाकर, सोना-चांदी के दामों में आई यह हल्की गिरावट वैश्विक अनिश्चितताओं का परिणाम है. अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की तेजी और डॉलर की मजबूती ने मिलकर कमोडिटी बाजार को प्रभावित किया है.

