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इस मशीन से करें आलू की बुवाई, मिनटों में लग जाएगी 1 एकड़ फसल.. आधा बच जाएगा पैसा

इस मशीन से करें आलू की बुवाई, मिनटों में लग जाएगी 1 एकड़ फसल.. आधा बच जाएगा पैसा

Kisan India 7 months ago

Potato Farming: पारंपरिक तरह से खेतों में मजदूर लगाकर आलू की बुवाई करने वाले किसानों के लिए एक अच्छी खबर है. बाजार में एक ऐसी आधुनिक मशीन है जो कि घंटों का काम मिनटों में कर किसान के समय और लागत दोनों को बचाती है.

हम बात कर रहे हैं कि पोटैटो प्लांटर मशीन (Potato Planter Machine) की, जो किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. बता दें कि, जहां पहले 1 एकड़ खेत में आलू की बुवाई के लिए 4 से 5 मजदूर लगते थे और कई घंटे लगते थे, वहीं इस मशीन के इस्तेमाल से किसान आलू की बुवाई महज 20 से 30 मिनट में कर सकते हैं.

पोटैटो प्लांटर मशीन की खासियत

पोटैटो प्लांटर मशीन का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये 1 एकड़ खेत में आलू की बुवाई केवल 20 से 30 मिनट में कर देती है. इस कारण से किसानों को मजदूरों पर खर्च नहीं करना पड़ता है,जिससे समय और खेती में आने वाली लागत 50 फीसदी तक कम हो जाती है. साथ ही इस मशीम की मदद से आलू के बीज एक समान गहराई और दूरी पर लगते हैं. किसानों को इस मशीन से एक सहूलियत ये भी मिलती है कि बीजों की बुवाई के साथ-साथ ये मशीन खेत में खाद और मिट्टी डालने का काम भी करती है.

कैसे काम करती है मशीन

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पोटैटो प्लांटर मशीन ट्रैक्टर की मदद से चलने वाली मशीन है. इस मशीन में आलू के बीजों का टैंक रहता है और नीचे से एक-एक आलू तय दूरी पर मिट्टी में गिरता जाता है. इस मशीन की मदद से किसान मिट्टी को खाद भी दे सकते हैं , इसलिए किसानों को अलग के खाद डालने की जरूरत नहीम होती है. इस कारण से पौधे समान रूप से बढ़ते हैं और पैदावार भी अच्छे देते हैं.

बुवाई की लागत और मशीन की कीमत

आमतैर पर हाथ से आलू की फसल की बुवाई के लिए 6 हजार से 8 हजार रुपये प्रति एकड़ की लागत आती है. वहीं. पोटैटो प्लांटर मशीन से बुवाई करने में 2500 से 3 हजार रुपये प्रति एकड़ की लागत आती है. बात करें पोटैटो प्लांटर मशीन की कीमत की तो बाजार में अ लग-अलग कंपनियां इस मशीन को बेच रही हैं. इस मशीन की कीमत 45 हजार से 1.5 लाख के बीच हो सकती है.

किसानों को कैसे होगा फायदा

आलू की बुवाई करने के लिए पोटैटो प्लांटर मशीन के इ्स्तेमाल से किसानों को समय की बचत होने के साथ ही 50 फीसदी तर लागत भी कम होगी. बीजों के एक समान बुवाई होने के कारण पैदावार भी उन्नत क्वालिटी की और रोग मुक्त होती है. कुल मिलाकर ये कहना गलत नहीं होगा कि आलू किसानों को कम मेहनत में ज्यादा उत्पादन मिल रहा है.

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