हरियाणा में रबी सीजन की फसलों की सरकारी खरीद के लिए राज्य सरकार ने नियम सख्त कर दिए हैं. इससे किसानों को परेशानी हो रही है. पूर्व सीएम भूपिंदर हुड्डा ने कहा कि ट्रैक्टर पर बड़ी नंबर प्लेट, बायोमेट्रिक, गेट पास, 3 गारंटर जैसी शर्तें लगाई जा रही है कि किसान परेशान होकर मंडी के बाहर ही फसल बेचकर चला जाए.
उन्होंने आरोप लगाया कि यह शर्तें गेहूं घोटाला करने के लिए लगाई जा रही हैं. विपक्ष के आरोपों का सीएम नायब सैनी ने जवाब देते हुए कहा कि अनाज खरीद को लेकर किसानों को विपक्ष गुमराह कर रहा है. उन्होंने कहा कि किसानों को दाना दाना राज्य सरकार समर्थन मूल्य पर खरीदेगी.
पूर्व सीएम ने कहा – एक और घोटाला होने जा रहा है
हरियाणा में गेहूं खरीद को लेकर घमासान मचा हुआ है. किसान एक ओर बेमौसम बारिश से अपनी फसल बचाने के लिए परेशान हैं तो वहीं मंडियों में नए सख्त नियमों ने उनकी पीड़ा को और बढ़ा दिया है. हरियाणा में विपक्ष के नेता और पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा कि मंडियों में खरीद शुरू तो हुई है लेकिन, किसान को परेशानी के सिवा कुछ नहीं मिल रहा. ट्रैक्टर पर बड़ी नंबर प्लेट, बायोमेट्रिक, गेट पास, 3 गारंटर जैसी ऐसी-ऐसी शर्तें लगाई जा रही हैं कि किसान परेशान होकर मंडी के बाहर ही फसल बेचकर चला जाए. ये एक और घोटाला होने जा रहा है. उन्होंने कहा कि हर आदमी के पास टैक्टर तो है नहीं. सरकार की ओर से ऐसी शर्तें लगायी जा रही हैं कि किसान औने-पौने भाव में फसल बेचने को मजबूर हो रहा है. हरियाणा सरकार किसान को कैदी बनाने की तैयारी कर रही है. हम किसान के साथ खड़े हैं और डटकर सरकार का विरोध करेंगे.
सांसद बोलीं- आढ़तियों और किसानों को परेशान किया जा रहा
कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने कहा कि गेहूं खरीद को लेकर सरकार की मनमानी से किसानों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि नरवाना मंडी का बंदहोना भाजपा सरकार की मनमानी और तानाशाही नीतियों का स्पष्ट परिणाम है. फसल बिक्री की नई शर्तों ने आढ़तियों को मजबूर कर दिया कि वे मंडी बंद करने जैसा कठोर निर्णय लें. भाजपा सरकार की अव्यवस्थित नीतियों का खामियाजा अब सीधे किसानों, व्यापारियों और मंडी से जुड़े मेहनतकश पल्लेदारों को भुगतना पड़ रहा है. सरकार को तत्काल अपनी इन नीतियों में संशोधन कर व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत करना चाहिए, ताकि किसान, व्यापारी और पल्लेदार सभी की समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित हो सके.
गेहूं खरीद नियमों में सख्ती से किसानों को मुश्किलों के आरोपों पर आया सीएम सैनी का बयान
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उनके पास कोई असली मुद्दा नहीं है और वे फसल खरीद को लेकर किसानों को गुमराह कर रहे हैं. सीएम ने ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी उपज का एक-एक दाना खरीदा जाएगा, और कहा कि विपक्ष गेट पास के बारे में गलत जानकारी फैला रहा है. सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था की है कि अनाज मंडियों में किसी भी किसान को कोई कठिनाई न हो. उन्होंने कहा कि फसल खरीद के लिए जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से सौंपी गई हैं.
सैनी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पिछले 10 साल सिर्फ वोट बटोरने के लिए झूठ बोलने में बिताए. उन्होंने कहा कि किसानों के हित हमारी नीतियों के केंद्र में हैं.
उन्होंने विपक्ष पर और निशाना साधते हुए उन पर सस्ते राजनीतिक फायदे के लिए वैश्विक संकटों का फायदा उठाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “वे झूठे बयानों के जरिए भ्रम पैदा कर रहे हैं. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ‘राष्ट्र प्रथम’ (Nation First) का दृष्टिकोण अपनाती है और हर संकट के दौरान भारतीयों के साथ खड़ी रहती है.

खरीद शर्तों पर सीएम से मिले किसान नेता गुणी प्रकाश (ऊपर). मंडी में गेहूं खरीद देखने पहुंचे किसान नेता लखविंदर सिंह औलख (नीचे).
किसान नेता बोले- सरकार शर्तें लगाकर किसानों को परेशान कर रही
भारतीय किसान यूनियन (मान) के हरियाणा प्रदेशाध्यक्ष ठाकुर गुणीप्रकाश ने किसान इंडिया को बताया कि वह अपने संगठन के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्य मंत्री नायब सिंह सैनी से किसानों की समस्याओं को लेकर मुलाकात की है. दो घंटे तक सीएम के साथ चली बैठक में मंडी में गेहूं खरीद को लेकर लगाई गई शर्तों पर नाराजगी जताई है और किसानों को परेशान नहीं करने की अपील की. इस पर मुख्य मंत्री ने कहा उच्च अधिकारियों और कृषि मंत्री से बैठक करके वह हल निकालेंगे और किसानों को खरीद में परेशान नहीं होने देंगे.
भारतीय किसान एकता के हरियाणा प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने किसान इंडिया को बताया कि हरियाणा सरकार गेहूं खरीद पर लगाई गई ट्रैक्टर की फोटो और बायोमेट्रिक सहित सभी शर्तें वापस ले. उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार की ओर से गेहूं खरीद के लिए जारी बायोमेट्रिक वाला फरमान धरातल पर फेल है. वेबसाइट बंद होने की वजह से किसानों का अंगूठा नहीं लग पा रहा है. वहीं, सरकार ने 1 अप्रैल से गेहूं खरीद का ऐलान किया था, लेकिन अभी तक खरीद के कोई प्रबंध नहीं करने पर सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई.

