04 जुलाई2026, भोपाल: बारिश में शकरकंद की फसल नहीं होगी खराब, किसानों को सिखाई जा रही वैज्ञानिक रोपण तकनीक - मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में उद्यानिकी फसलों का रकबा लगातार बढ़ रहा है।
टमाटर, शिमला मिर्च, प्याज, लहसुन और कद्दू के साथ अब किसान शकरकंद की खेती की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं। वर्तमान में जिले में करीब 360 हेक्टेयर क्षेत्र में शकरकंद की खेती की जा रही है। बेहतर उत्पादन और फसल सुरक्षा के लिए कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को वैज्ञानिक खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण दे रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. पुनीत कुमार ने बताया कि पिछले वर्षों में अधिक बारिश के कारण शकरकंद की फसल में कंद सड़न और फफूंदजनित रोगों की समस्या देखी गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए इस खरीफ सीजन में किसानों को ऐसी वैज्ञानिक रोपण पद्धतियां सिखाई जा रही हैं, जिनसे जलभराव की स्थिति में भी फसल सुरक्षित रह सके।
केंद्र के उद्यानिकी वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत कुमार गुप्ता किसानों के बीच पहुंचकर समूह प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके साथ ही किसानों के खेतों पर आधुनिक रोपण तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया जा रहा है, ताकि किसान इन विधियों को आसानी से अपनाकर बेहतर उत्पादन ले सकें।
हाल ही में कोलारस विकासखंड के किलावनी और चंदौरिया गांवों में प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां किसानों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई।
इस अभियान में उद्यानिकी विभाग और सृजन संस्था भी सहयोग कर रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र का उद्देश्य किसानों तक वैज्ञानिक खेती की तकनीक पहुंचाना, प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार खेती को सुरक्षित बनाना और उद्यानिकी फसलों के उत्पादन व गुणवत्ता में सुधार करना है।

