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बिहार में कृषि यंत्रीकरण को नई रफ्तार: 236.58 करोड़ की योजना से किसानों तक पहुंचेंगे आधुनिक यंत्र

बिहार में कृषि यंत्रीकरण को नई रफ्तार: 236.58 करोड़ की योजना से किसानों तक पहुंचेंगे आधुनिक यंत्र

01 अगस्त 2026, पटना: बिहार में कृषि यंत्रीकरण को नई रफ्तार: 236.58 करोड़ की योजना से किसानों तक पहुंचेंगे आधुनिक यंत्र - चौथे कृषि रोड मैप के अंतर्गत बिहार सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 में कृषि यंत्रीकरण को व्यापक स्तर पर विस्तार देने जा रही है।

केंद्र प्रायोजित सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन (एसएमएएम) योजना के माध्यम से किसानों को अनुदानित दर पर आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही राज्य में कस्टम हायरिंग सेंटर, कृषि यंत्र बैंक, फसल अवशेष प्रबंधन के लिए विशेष कस्टम हायरिंग सेंटर तथा किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे।

योजना के क्रियान्वयन और प्रशासनिक व्यय सहित कुल 236.58 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। सरकार का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक तथा महंगे कृषि यंत्रों की पहुंच आसान बनाना है।

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि प्रत्येक किसान के लिए आधुनिक और महंगे कृषि यंत्र खरीदना संभव नहीं होता। ऐसे में कस्टम हायरिंग सेंटरों के माध्यम से किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार आधुनिक कृषि मशीनें किराए पर ले सकेंगे। इससे खेती की लागत कम होने, समय की बचत होने तथा कृषि उत्पादकता और किसानों की आय में वृद्धि की संभावना है।

योजना के तहत राज्य में 267 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक केंद्र के लिए परियोजना लागत अधिकतम 10 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इस पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम 4 लाख रुपये तक दिया जाएगा।

इन केंद्रों के माध्यम से किसान जरूरत के अनुसार ट्रैक्टर, कृषि उपकरण और अन्य आधुनिक मशीनें किराए पर प्राप्त कर सकेंगे। इससे छोटे किसानों को भी कम लागत पर आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करने का अवसर मिलेगा।

राज्य में 38 कृषि यंत्र बैंक स्थापित किए जाएंगे। इनकी परियोजना लागत अधिकतम 10 लाख रुपये रखी गई है। पात्र समूहों को परियोजना लागत का 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। अधिकतम सहायता राशि 8 लाख रुपये निर्धारित की गई है।

कृषि यंत्र बैंक के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सामूहिक रूप से कृषि मशीनों की उपलब्धता बढ़ेगी और किसानों को आवश्यक उपकरण आसानी से मिल सकेंगे।

फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन और पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से राज्य में 200 स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक केंद्र की परियोजना लागत अधिकतम 20 लाख रुपये होगी।

इन केंद्रों के लिए पात्र आवेदकों को 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। अधिकतम अनुदान राशि 12 लाख रुपये निर्धारित की गई है। केंद्रों पर 55 हॉर्स पावर या उससे अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर तथा फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आवश्यक आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे।

आधुनिक और तकनीक आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 480 किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को ड्रोन आधारित छिड़काव और अन्य आधुनिक कृषि सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

योजना के तहत कृषि स्नातकों को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम 5 लाख रुपये तक दिया जाएगा। वहीं अन्य पात्र आवेदकों को 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम 4 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

योजना के अंतर्गत किसानों को 86 प्रकार के कृषि यंत्रों की खरीद पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। इससे आधुनिक मशीनों का उपयोग बढ़ने और खेती को अधिक सुविधाजनक, समयबद्ध तथा लाभकारी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि योजनाओं की जानकारी किसानों तक पहुंचाने और उनका व्यापक प्रचार-प्रसार करने के लिए राज्य के प्रत्येक जिले में वर्ष में दो बार दो-दिवसीय कृषि यंत्रीकरण मेले आयोजित किए जाएंगे। इन मेलों में किसान आधुनिक कृषि उपकरणों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया से भी अवगत होंगे।

बिहार सरकार की यह पहल छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कृषि यंत्रों पर अनुदान, मशीनों की किराए पर उपलब्धता, ड्रोन सेवाओं और फसल अवशेष प्रबंधन केंद्रों के विस्तार से खेती की लागत घटाने, समय बचाने और उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।



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