28 मई2026, नई दिल्ली: खरीफ 2026 की रणनीति तय करने दिल्ली में आज राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन, राज्यों के साथ बनेगा साझा रोडमैप - खरीफ 2026 की तैयारियों को मजबूती देने, कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसान-केंद्रित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राजधानी दिल्ली में दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
28 और 29 मई को भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम ऑडिटोरियम, NASC कॉम्प्लेक्स, पूसा में होने वाला यह सम्मेलन केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने तथा एक साझा राष्ट्रीय कृषि रोडमैप तैयार करने पर केंद्रित रहेगा।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) की अध्यक्षता में हो रहे इस सम्मेलन में बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, गुजरात, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के कृषि मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं। उद्देश्य राज्यों के अनुभव, क्षेत्रीय चुनौतियों और प्राथमिकताओं को एकीकृत कर खरीफ 2026 के लिए एक समन्वित रणनीति तैयार करना है।
पहले दिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन विषयगत समूहों में विभाजित कर समानांतर चर्चा कराई जाएगी।
पहले समूह में आत्मनिर्भरता, फसल विविधीकरण और उत्पादन वृद्धि पर चर्चा होगी, जिसमें दलहन मिशन, तिलहन एवं ऑयल पाम, बागवानी, कपास मिशन और बीज व्यवस्था जैसे विषय शामिल रहेंगे।
दूसरे समूह में जलवायु-सहिष्णु कृषि, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग, कृषि यंत्रीकरण और "पर ड्रॉप मोर क्रॉप" जैसे विषयों पर मंथन होगा। तीसरे समूह में कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड सैचुरेशन, PM-AASHA, कृषि अवसंरचना फंड, फसल बीमा योजना और एफपीओ विकास जैसे वित्तीय एवं जोखिम प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।
सम्मेलन में डिजिटल एग्रीकल्चर को भी बड़ा फोकस दिया गया है। इसमें किसान रजिस्ट्री, डिजिटल क्रॉप सर्वे और एग्रीस्टैक के जरिए कृषि सेवाओं को अधिक पारदर्शी और डेटा-आधारित बनाने की रूपरेखा पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य किसानों को योजनाओं का सीधा लाभ और समय पर सेवाएं उपलब्ध कराना है।
दूसरे दिन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) और कृषि विशेषज्ञ फसल स्थिति, बीज उपलब्धता, उन्नत किस्मों, मौसम पूर्वानुमान और उत्पादन रणनीति पर प्रस्तुति देंगे। इसके साथ ही संतुलित उर्वरक उपयोग और जिला स्तर पर अभियान की रूपरेखा पर भी चर्चा होगी।
दलहन मिशन डिवीजन राज्यवार उत्पादन लक्ष्य, बीज उपलब्धता, क्लस्टर आधारित रणनीति और खरीद व्यवस्था पर प्रस्तुति देगा। वहीं तिलहन एवं ऑयल पाम डिवीजन बीज, मिनीकिट, उत्पादकता सुधार और प्रसंस्करण श्रृंखला पर फोकस करेगा। बागवानी आयुक्त द्वारा MIDH सहित बागवानी विस्तार, संरक्षित खेती और मूल्य श्रृंखला विकास पर प्रस्तुति दी जाएगी।
सम्मेलन में जोनल बैठकों से मिले निष्कर्षों, राज्यों के सुझावों और केंद्र की नीतिगत प्राथमिकताओं को मिलाकर खरीफ 2026 के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। कृषि मंत्रालय के अनुसार यह सम्मेलन केवल चर्चा का मंच नहीं बल्कि उत्पादन वृद्धि, जलवायु अनुकूल खेती, संसाधन संरक्षण और किसान समृद्धि के लिए ठोस नीति दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच है।
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