07 जुलाई2026, नई दिल्ली: किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! होर्मुज पार कर भारत की ओर बढ़े यूरिया-डीएपी से लदे 15 जहाज - खरीफ सीजन के बीच किसानों के लिए राहत की खबर है। भारत के लिए यूरिया, डीएपी और कच्चा माल लेकर आने वाले कुल 15 जहाज सुरक्षित रूप से हॉर्मूज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं।
इन जहाजों के भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने के बाद देश में उर्वरकों के भंडार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, जिससे किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई और उर्वरकों की कीमतों में भी तेजी आई, लेकिन भारत सरकार ने समय रहते वैकल्पिक स्रोतों से आयात की व्यवस्था की। उन्होंने कहा कि उर्वरक विभाग राज्य सरकारों के साथ लगातार समन्वय कर रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार की उथल-पुथल का असर किसानों पर न पड़े और किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में किफायती दरों पर खाद उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि सरकार ने वैश्विक संकट के बावजूद किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया में हालिया तनाव के कारण हॉर्मूज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात प्रभावित हुआ था। इसके बावजूद समयबद्ध रणनीति, लगातार निगरानी और प्रभावी समन्वय के जरिए उर्वरकों की आपूर्ति बाधित नहीं होने दी गई। इस पूरी प्रक्रिया में विदेशों में स्थित 28 भारतीय मिशनों ने संभावित उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं से संपर्क स्थापित कर उर्वरक विभाग की मदद की, जिससे कई देशों से समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकी।
भारत पहुंच रहे 15 जहाजों में 8 जहाजों से 3.32 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) यूरिया, 4 जहाजों से 2.57 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 3 जहाजों से 1.11 लाख मीट्रिक टन सल्फर आ रहा है। इसके अलावा भारत के लिए 5 अन्य जहाज भी निर्धारित हैं। इनमें एक जहाज में 0.25 लाख मीट्रिक टन अमोनिया और एक अन्य जहाज में 0.45 लाख मीट्रिक टन यूरिया लदा हुआ है। वहीं दो अन्य जहाजों में यूरिया और एक जहाज में सल्फर की लोडिंग की जा रही है। इनके भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जल्द भारत पहुंचने की संभावना है।
यूरिया की आपूर्ति के लिए ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड सहित कई देशों से व्यवस्था की गई है। वहीं डीएपी और एनपीके उर्वरकों की आपूर्ति रेड सी समुद्री मार्ग के जरिए रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब से सुनिश्चित की गई है। सरकार के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में विदेशों में स्थित 28 भारतीय मिशनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सरकार ने बताया कि कुछ समय पहले उर्वरक संयंत्रों के लिए प्राकृतिक गैस की उपलब्धता घटकर लगभग 65 प्रतिशत रह गई थी, लेकिन अब इसे फिर से 100 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके बाद देश के सभी यूरिया संयंत्र पूरी क्षमता से संचालित हो रहे हैं, जिससे घरेलू उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में 67.86 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 71.55 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हुआ। अप्रैल में 20.98 लाख मीट्रिक टन, मई में 25.19 लाख मीट्रिक टन और जून में 25.37 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन दर्ज किया गया, जो हर महीने तय लक्ष्य से अधिक रहा।
डीएपी उत्पादन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। पहली तिमाही में 8.61 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 9.84 लाख मीट्रिक टन डीएपी का उत्पादन हुआ। इसी अवधि में एनपीके उर्वरकों का उत्पादन 20.77 लाख मीट्रिक टन और एसएसपी का उत्पादन 13.50 लाख मीट्रिक टन रहा।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने पूरे वर्ष के लिए 383.9 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की आवश्यकता का अनुमान लगाया है। इसके मुकाबले अब तक 197.56 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की व्यवस्था की जा चुकी है, जो कुल वार्षिक आवश्यकता का 51 प्रतिशत से अधिक है।
2 जुलाई 2026 तक देश में 163.35 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का उपलब्ध भंडार है। इसमें 69.08 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 16.64 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 8.90 लाख मीट्रिक टन एमओपी, 45.64 लाख मीट्रिक टन एनपीके और 23.09 लाख मीट्रिक टन एसएसपी शामिल है।

