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किसानों के लिए जरूरी खबर! अधिक बारिश में लेही पद्धति से करें धान की बुवाई, कृषि विभाग की सलाह

किसानों के लिए जरूरी खबर! अधिक बारिश में लेही पद्धति से करें धान की बुवाई, कृषि विभाग की सलाह

07 जुलाई2026, रायपुर: किसानों के लिए जरूरी खबर! अधिक बारिश में लेही पद्धति से करें धान की बुवाई, कृषि विभाग की सलाह - छत्तीसगढ़ में मानसून की देरी के बाद अब कई इलाकों में लगातार बारिश हो रही है।

इसे देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए खरीफ फसलों, खासकर धान की खेती को लेकर एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने सलाह दी है कि जिन क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है या खेतों में अधिक पानी भर गया है, वहां किसान लेही पद्धति से धान की बुवाई करें। इससे मौजूदा मौसम में खेती करना आसान होगा।

कृषि विभाग के अनुसार, इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण बस्तर क्षेत्र में मानसून करीब 10 दिन की देरी से पहुंचा। जून में सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, लेकिन 1 से 6 जुलाई के बीच छत्तीसगढ़ के मैदानी क्षेत्रों और बस्तर में अच्छी वर्षा हुई है। मौसम विभाग के अनुसार 8 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक बारिश की संभावना है। ऐसे में खेतों में पर्याप्त नमी और पानी उपलब्ध होने पर किसान धान की रोपाई या बुवाई शुरू कर सकते हैं।

कृषि विभाग ने बताया कि जिन खेतों में लगातार पानी भरा हुआ है और बारिश रुक नहीं रही है, वहां लेही पद्धति से धान की बुवाई करना उपयुक्त रहेगा। इसके लिए पहले खेत की अच्छी तरह मचाई करें। इसके बाद 8 से 10 घंटे पानी में भिगोकर 24 से 30 घंटे तक अंकुरित किए गए धान के बीजों की ड्रम सीडर या छिटकवा विधि से बुवाई करें। इस पद्धति के लिए 120 से 130 दिन में पकने वाली मध्यम अवधि की किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है।

विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि धान की सीधी बुवाई करने वाले किसान 15 जुलाई तक बुवाई का काम पूरा कर लें। वहीं रोपा और बियासी पद्धति से खेती करने वाले किसान 30 जुलाई तक रोपाई कर लें। यदि किसी कारणवश देरी होती है तो हरेली तिहार (12 अगस्त) तक भी बुवाई और रोपाई करने पर उत्पादन में अधिक नुकसान की संभावना नहीं है।

मानसून में देरी को देखते हुए किसानों को शीघ्र और मध्यम अवधि में पकने वाली धान की किस्में अपनाने की सलाह दी गई है। इनमें इंद्रावती, बस्तर धान-1, छत्तीसगढ़ बारानी धान, इंदिरा एरोबिक धान, एमटीयू-1010, एमटीयू-1153, एमटीयू-1156, एमटीयू-1001, विक्रम टीसीआर, छत्तीसगढ़ धान-1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान और महामाया प्रमुख हैं।

कृषि विभाग ने बुवाई से पहले बीजों को कार्बेन्डाजिम या अन्य अनुशंसित कवकनाशी से उपचारित करने की सलाह दी है। इसके साथ ही एजोस्पाइरिलम, पीएसबी और केएसबी जैसे जैव उर्वरकों के उपयोग की भी सिफारिश की गई है।

विभाग ने बताया कि धान की सीधी बुवाई में खरपतवार बड़ी समस्या होती है। यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन में 50 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इसलिए फसल बोने के 40 दिन तक खेत को खरपतवार मुक्त रखना जरूरी है। इसके लिए हाथ से निंदाई, पैडी वीडर या अनुशंसित खरपतवारनाशकों का उपयोग किया जा सकता है।

कृषि विभाग के अनुसार, किसानों को उर्वरकों की कमी नहीं होगी। प्राथमिक सहकारी समितियों में यूरिया, डीएपी, एनपीके, सिंगल सुपर फॉस्फेट और पोटाश का पर्याप्त भंडारण किया गया है। किसानों को जरूरत के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

विभाग ने किसानों से अपील की है कि मौसम और खेत की स्थिति को देखते हुए ही बुवाई और रोपाई करें। किसी भी तकनीकी समस्या या सलाह के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि अनुसंधान केंद्र या कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।



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