30 जुलाई2026, रायपुर: मजदूरी छोड़ अपनाया बकरी पालन, सरकारी योजना से बीजापुर की महिलाओं ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी - छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में महिलाओं ने बकरी पालन को आजीविका का मजबूत माध्यम बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।
उसूर विकासखंड के ग्राम चिन्नाकोडपाल की महिलाओं ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (वाटरशेड विकास कार्यक्रम) के तहत मिली आर्थिक सहायता का सदुपयोग करते हुए न केवल अपनी आय बढ़ाई, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत की है। आज ये महिलाएं बकरी पालन और सब्जी उत्पादन के जरिए नियमित आमदनी अर्जित कर रही हैं।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (वाटरशेड विकास कार्यक्रम) के अंतर्गत देविका स्व-सहायता समूह को 50 हजार रुपये की चक्रीय निधि प्रदान की गई। इस राशि से समूह की महिलाओं ने बकरी पालन और सब्जी उत्पादन का कार्य शुरू किया। सरकारी सहायता ने महिलाओं को स्वरोजगार की दिशा में पहला कदम बढ़ाने का अवसर दिया, जिसे उन्होंने मेहनत और सामूहिक प्रयास से सफल बनाया।
देविका स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष सरिता तेलम और सचिव लक्ष्मी तेलम के नेतृत्व में 10 सदस्यीय समूह नियमित रूप से आजीविका गतिविधियों का संचालन कर रहा है। समूह की महिलाओं ने आपसी सहयोग से बकरी पालन को आय का प्रमुख स्रोत बनाया, जबकि सब्जी उत्पादन से अतिरिक्त कमाई भी सुनिश्चित की। इससे समूह की आर्थिक गतिविधियां लगातार मजबूत होती गईं।
समूह से जुड़ने से पहले अधिकांश महिलाएं मजदूरी पर निर्भर थीं। सीमित रोजगार के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल होता था और कई बार जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज लेना पड़ता था। लेकिन बकरी पालन और सब्जी उत्पादन शुरू करने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया। अब महिलाएं नियमित बचत कर रही हैं और जरूरत पड़ने पर समूह से ही कम ब्याज पर ऋण लेकर अपनी आवश्यकताएं पूरी कर लेती हैं।
बकरी पालन और सब्जी उत्पादन से होने वाली अतिरिक्त आय ने महिलाओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूती दी है। इसके साथ ही उनमें बचत की आदत, वित्तीय अनुशासन और सामूहिक निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित हुई है। अब वे सिर्फ आय अर्जित ही नहीं कर रहीं, बल्कि परिवार के आर्थिक फैसलों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और समाज में उनकी पहचान भी मजबूत हुई है।
देविका स्व-सहायता समूह की सफलता यह दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, सामूहिक प्रयास और मेहनत मिलकर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। आज समूह की महिलाएं आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं और आसपास के गांवों की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं। यह पहल साबित करती है कि स्वरोजगार आधारित गतिविधियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बन सकती हैं।

