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राजस्थान: खरीफ सीजन से पहले श्रीगंगानगर में उर्वरक आपूर्ति की समीक्षा, कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

राजस्थान: खरीफ सीजन से पहले श्रीगंगानगर में उर्वरक आपूर्ति की समीक्षा, कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

28 मई2026, जयपुर: राजस्थान: खरीफ सीजन से पहले श्रीगंगानगर में उर्वरक आपूर्ति की समीक्षा, कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश - खरीफ सीजन को देखते हुए श्रीगंगानगर जिले में उर्वरकों की उपलब्धता, भंडारण और वितरण व्यवस्था को लेकर बुधवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक की अध्यक्षता जिला कलेक्टर डॉ. अमित यादव ने की। बैठक में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने, स्टॉक प्रबंधन और कालाबाजारी पर रोक को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में जिले में उर्वरकों की मौजूदा उपलब्धता, मांग का आकलन, वितरण व्यवस्था और स्टॉक स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि खरीफ सीजन को देखते हुए उर्वरकों की आपूर्ति और वितरण पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जा रही है।

जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर जमाखोरी, कालाबाजारी या ओवररेटिंग की शिकायत मिलने पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि उर्वरकों की अवैध निकासी रोकने के लिए चेक पोस्ट के माध्यम से निगरानी और कृषि एवं पुलिस विभाग की संयुक्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

डॉ. अमित यादव ने उर्वरक विक्रेताओं की नियमित जांच करने, गुणवत्ता संबंधी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करने और अवैध भंडारण पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने उर्वरक वितरण व्यवस्था की निगरानी के लिए कंट्रोल रूम स्थापित करने पर भी जोर दिया।

बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि राज्य स्तर से तय मात्रा के अनुसार कंपनियों द्वारा समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और पोस मशीन के माध्यम से ही बिक्री की जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

अधिकारियों के अनुसार जिले में वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 1 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 45 हजार मीट्रिक टन डीएपी, 65 हजार मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट और 8 हजार मीट्रिक टन एनपीके की आवश्यकता आंकी गई है।

इसके साथ ही पिछले वर्षों में जिले का औसत बुवाई क्षेत्रफल लगभग 5.96 लाख हेक्टेयर रहा है, जबकि वर्तमान वर्ष में अब तक 1.29 लाख हेक्टेयर बुवाई दर्ज की गई है।

बैठक में उर्वरक वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए आईएफएमएस और एग्री-स्टैक पोर्टल के इंटीग्रेशन की जानकारी भी दी गई। कृषि अनुसंधान अधिकारी श्रीगंगानगर ने बताया कि राजस्थान में पायलट प्रोजेक्ट के तहत श्रीगंगानगर और नागौर जिलों में यह प्रणाली लागू की जा रही है, जिसमें किसान फसलवार उर्वरक की मांग ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।

बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर (सतर्कता) Reena, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक Deepak Sharma, कृषि एवं सहकारिता विभाग के अधिकारी, उर्वरक निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधि और विक्रेता मौजूद रहे।

बैठक के अंत में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और उर्वरक आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार सख्त निगरानी रखी जाएगी।

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