Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
शिवराज सिंह चौहान ने लॉन्च किया 'प्रगति' मिशन, 20 हजार युवा बनेंगे कृषि-उद्यमी; 20 लाख किसानों को मिलेगा लाभ

शिवराज सिंह चौहान ने लॉन्च किया 'प्रगति' मिशन, 20 हजार युवा बनेंगे कृषि-उद्यमी; 20 लाख किसानों को मिलेगा लाभ

08 जुलाई2026, नई दिल्ली: शिवराज सिंह चौहान ने लॉन्च किया 'प्रगति' मिशन, 20 हजार युवा बनेंगे कृषि-उद्यमी; 20 लाख किसानों को मिलेगा लाभ - केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को 'प्रगति' (PRAGATI) नामक राष्ट्रीय पहल का शुभारंभ किया।

इस पहल का उद्देश्य देशभर में 20,000 ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी के रूप में तैयार करना और उनके माध्यम से 20 लाख छोटे एवं सीमांत किसानों की आय, उत्पादकता और आजीविका में सुधार लाना है। सरकार का मानना है कि यह पहल कृषि में तकनीक, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब कृषि और गांव समृद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती की लागत कम कर किसानों की आय बढ़ाना, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना और कृषि को अधिक लाभकारी बनाना है। उन्होंने कहा कि छोटे जोत वाले किसानों के लिए पारंपरिक खेती के साथ वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।

'प्रगति' पहल को पहले चरण में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड सहित प्रमुख कृषि राज्यों में लागू किया जाएगा। इसके तहत प्रशिक्षित कृषि-उद्यमी गांव स्तर पर किसानों को आधुनिक खेती की सलाह, मिट्टी परीक्षण, कृषि मशीनों की सेवाएं, वित्तीय संस्थानों से जोड़ने, बाजार तक पहुंच और आय बढ़ाने के वैकल्पिक अवसर उपलब्ध कराएंगे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केवल पारंपरिक खेती से किसानों की आय में अपेक्षित वृद्धि संभव नहीं है। इसके लिए बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को खेती के साथ जोड़ना होगा। उन्होंने ड्रोन, डिजिटल सलाह, वैज्ञानिक खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों को भविष्य की कृषि का आधार बताया।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस पहल में महिला सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। बड़ी संख्या में 'कृषि सखी' और महिला कृषि-उद्यमियों को इससे जोड़ा जाएगा। उनका कहना था कि एक प्रशिक्षित कृषि-उद्यमी पूरे गांव में बदलाव का माध्यम बन सकता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

'प्रगति' को भारत में निजी क्षेत्र के सहयोग से शुरू किए गए सबसे बड़े कृषि-उद्यमिता कार्यक्रमों में से एक माना जा रहा है। इस बहु-साझेदार पहल में पेप्सिको फाउंडेशन, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया फाउंडेशन (SBIF), गेट्स फाउंडेशन, IDH, हीफर इंटरनेशनल, एनवायरनमेंटल डिफेंस फंड (EDF), ग्लोबल एग्री एंटरप्रेन्योरशिप अकादमी, SAFIA, एग्री एंटरप्रेन्योर ग्रोथ फाउंडेशन (AEGF) और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRIF) सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं शामिल हैं। ये संस्थाएं प्रशिक्षण, वित्तीय एवं डिजिटल समावेशन, तकनीकी सहायता, बाजार संपर्क और पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में सहयोग करेंगी।

यह कार्यक्रम एग्री-एंटरप्रेन्योर ग्रोथ फाउंडेशन (AEGF) की पूर्व कृषि-उद्यमिता पहलों के अनुभवों पर आधारित है। वर्तमान में मौजूद 26,000 से अधिक कृषि-उद्यमियों के नेटवर्क का विस्तार करते हुए इसमें 20,000 नए कृषि-उद्यमी तैयार किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य इस पहल के माध्यम से 20 लाख से अधिक लघु एवं सीमांत किसानों तक पहुंचना है।

पहल के तहत कम से कम 20 प्रतिशत किसानों को पुनर्योजी (रेजेनेरेटिव) कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही किसानों की आय में न्यूनतम 30 प्रतिशत वृद्धि तथा धान, मक्का और आलू जैसी प्रमुख फसलों की उत्पादकता में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा वित्तीय साक्षरता बढ़ाने और किसानों को औपचारिक बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था अधिक मजबूत, समावेशी और जलवायु के प्रति लचीली बन सके।



Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Krishak Jagat