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सोयाबीन की फसल पर मंडरा रहा तना मक्खी, सफेद मक्खी और इल्ली का खतरा, बचाव के लिए अपनाएं ये असरदार उपाय

सोयाबीन की फसल पर मंडरा रहा तना मक्खी, सफेद मक्खी और इल्ली का खतरा, बचाव के लिए अपनाएं ये असरदार उपाय

30 जुलाई2026, भोपाल: सोयाबीन की फसल पर मंडरा रहा तना मक्खी, सफेद मक्खी और इल्ली का खतरा, बचाव के लिए अपनाएं ये असरदार उपाय - खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन की फसल में तना मक्खी, सफेद मक्खी और सेमीलूपर इल्ली का प्रकोप बढ़ने लगा है।

इसे देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), हरदा के वरिष्ठ तकनीकी पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. मुकेश कुमार बंकोलिया ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने किसानों को समय पर कीट एवं रोगों की पहचान कर अनुशंसित दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी है, ताकि फसल को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।

डॉ. बंकोलिया ने बताया कि यदि सोयाबीन की फसल में तना मक्खी या सफेद मक्खी के लक्षण दिखाई दें तो किसान तुरंत अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करें। इसके लिए थायमेथोक्साम 12.60% + लैम्ब्डा-सायहेलोथ्रिन 9.5% ZC की 50 मिली प्रति एकड़ या बीटा सायफ्लूथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड की 140 मिली प्रति एकड़ अथवा आइसोसाइक्लोसरम 9.2% DC की 240 मिली प्रति एकड़ मात्रा का उपयोग किया जा सकता है।

यदि फसल में सेमीलूपर इल्ली का प्रकोप दिखाई दे तो किसान क्लोरएंट्रानिलीप्रोल 18.5% SC की 60 मिली प्रति एकड़, इमामेक्टिन बेंजोएट 1.9% EC की 170 मिली प्रति एकड़ या फ्लूबेंडियामाइड 20 WG की 100 ग्राम प्रति एकड़ मात्रा का छिड़काव करें। समय पर नियंत्रण से फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।

कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को सलाह दी है कि यदि फसल में पीला मोजेक रोग के लक्षण दिखाई दें तो शुरुआती अवस्था में ही संक्रमित पौधों को उखाड़कर खेत से बाहर कर दें। इसके अलावा सफेद मक्खी और एफिड जैसे वाहक कीटों की रोकथाम के लिए खेत में अलग-अलग स्थानों पर पीले स्टिकी ट्रैप लगाना भी प्रभावी उपाय है।

यदि सोयाबीन में कॉलर रॉट या राइजोक्टोनिया जड़ सड़न रोग के लक्षण दिखाई दें तो टेबुकोनाजोल + सल्फर 400 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।

डॉ. बंकोलिया ने कहा कि पौध संरक्षण रसायनों का छिड़काव करते समय पर्याप्त पानी का उपयोग करना जरूरी है। पावर स्प्रेयर से प्रति एकड़ 100 से 120 लीटर पानी का प्रयोग करें, ताकि दवा का प्रभाव बेहतर रहे। उन्होंने किसानों को यह भी सलाह दी कि किसी भी कीटनाशक, खरपतवारनाशक या फफूंदनाशक को खरीदते समय हमेशा अधिकृत विक्रेता से पक्का बिल लें और यह सुनिश्चित करें कि बिल पर बैच नंबर तथा एक्सपायरी तिथि स्पष्ट रूप से दर्ज हो।

कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को चेतावनी दी है कि जिन रसायनों के मिश्रित उपयोग की वैज्ञानिक अनुशंसा उपलब्ध नहीं है या जिनका पूर्व अनुभव नहीं है, उनका मिश्रण बनाकर छिड़काव नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से फसल को नुकसान पहुंच सकता है और उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।



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