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ट्यूबवेल के पानी की जांच कराएं किसान, बेहतर फसल उत्पादन और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखें

ट्यूबवेल के पानी की जांच कराएं किसान, बेहतर फसल उत्पादन और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखें

01 अगस्त 2026, भोपाल: ट्यूबवेल के पानी की जांच कराएं किसान, बेहतर फसल उत्पादन और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखें - हरियाणा सरकार ने किसानों को बेहतर फसल उत्पादन और खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण सलाह जारी की है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने प्रदेश के किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों में सिंचाई के लिए उपयोग किए जा रहे ट्यूबवेल के पानी की नियमित जांच अवश्य कराएं। उन्होंने कहा कि सिंचाई के पानी की गुणवत्ता का सीधा प्रभाव फसल उत्पादन और भूमि की उर्वरता पर पड़ता है।

कृषि मंत्री ने किसानों को संदेश देते हुए कहा, "करवाओगे पानी की जांच, नहीं आएगी फसल उत्पादन पर आंच।" उन्होंने बताया कि पानी की समय-समय पर जांच कराने से किसान अपने खेत की आवश्यकता के अनुसार फसल का चयन कर सकते हैं। साथ ही सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक एवं प्रभावी बनाया जा सकता है।

कृषि मंत्री ने बताया कि ट्यूबवेल के पानी में लवणता यानी नमक की मात्रा अधिक होने अथवा क्षारीयता बढ़ने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक ऐसे पानी से सिंचाई करने पर भूमि की उर्वरता कम होने की आशंका रहती है। इसका असर फसल की वृद्धि और उत्पादन पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि खराब गुणवत्ता वाले पानी के कारण खेत में डाले जाने वाले खाद और उर्वरकों का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ने से फसल की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। ऐसे क्षेत्रों में फसल चयन भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसलिए पानी की जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित फसल का चयन और आवश्यक सुधारात्मक उपाय अपनाना उपयोगी हो सकता है।

कृषि विभाग ने किसानों को पानी का नमूना लेने की वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी है। इसके लिए सबसे पहले ट्यूबवेल को कम से कम 30 मिनट तक लगातार चलाना चाहिए। इसके बाद लगभग 500 मिलीलीटर से एक लीटर पानी को साफ प्लास्टिक की बोतल में भरना चाहिए।

पानी के नमूने वाली बोतल पर किसान को अपना नाम, 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' (एमएफबी) आईडी, गांव का नाम, किला या खसरा नंबर, मोबाइल नंबर तथा बोरवेल की गहराई फीट में स्पष्ट रूप से अंकित करनी चाहिए। इससे नमूने की पहचान और जांच रिपोर्ट तैयार करने में सुविधा होगी।

इसके बाद किसान पानी के नमूने को अपने नजदीकी मृदा स्वास्थ्य जांच प्रयोगशाला में जमा करवा सकते हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर कृषि विशेषज्ञ किसानों को पानी की गुणवत्ता के अनुरूप फसल चयन, सिंचाई प्रबंधन तथा उर्वरकों के उचित उपयोग के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन दे सकेंगे।

सरकार का मानना है कि मिट्टी के साथ सिंचाई के पानी की नियमित जांच भी कृषि प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समय पर जांच और वैज्ञानिक सलाह अपनाकर किसान मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के साथ फसल उत्पादन को बेहतर बना सकते हैं।



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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Krishak Jagat