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मंदिर में परिक्रमा का सही नियम क्या है ? जानिए किस देवता की कितनी परिक्रमा करना होता है शुभ

मंदिर में परिक्रमा का सही नियम क्या है ? जानिए किस देवता की कितनी परिक्रमा करना होता है शुभ

Temple Parikrama Rules : हिंदू धर्म में मंदिर के दर्शन तब तक अधूरे माने जाते हैं, जब तक कि आराध्य की परिक्रमा न की जाए। परिक्रमा का अर्थ है अपने इष्ट को केंद्र में रखकर उनके चारों ओर घूमना, जो यह दर्शाता है कि हमारा जीवन ईश्वर के इर्द-गिर्द ही केंद्रित है।

अक्सर हम मंदिर जाते हैं और श्रद्धा भाव से भगवान की परिक्रमा करते हैं। शास्त्रों में हर देवी-देवता के लिए परिक्रमा की संख्या अलग-अलग निर्धारित की गई है। गलत तरीके या गलत संख्या में की गई परिक्रमा का वह आध्यात्मिक लाभ नहीं मिल पाता, जिसकी हम कामना करते हैं। तो आइए जानते हैं परिक्रमा से जुड़े महत्वपूर्ण नियम और सही संख्या।

परिक्रमा हमेशा दाहिनी ओर से ही क्यों ? प्रदक्षिणा शब्द में 'प्र' का अर्थ है आगे बढ़ना और दक्षिणा का अर्थ है दक्षिण दिशा। शास्त्रों के अनुसार, परिक्रमा हमेशा दाएं हाथ की ओर से शुरू करनी चाहिए। इसका कारण यह है कि हमारे हृदय में ईश्वर का वास होता है और दाईं ओर से घूमने पर भगवान हमेशा हमारे हृदय के करीब रहते हैं।

किस देवता की कितनी परिक्रमा करें ? भगवान गणेश और हनुमान जी: प्रथम पूज्य गणेश जी और संकटमोचन हनुमान जी की 3 परिक्रमा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

भगवान विष्णु और उनके अवतार: श्री हरि विष्णु, भगवान राम और श्री कृष्ण की हमेशा 3 या 4 परिक्रमा करनी चाहिए।

माता दुर्गा और अन्य देवियां: मां लक्ष्मी, दुर्गा या सरस्वती सहित सभी देवी स्वरूपों की 1 परिक्रमा करने का विधान है।

सूर्य देव: साक्षात देव सूर्य नारायण की 7 परिक्रमा करनी चाहिए। इससे आरोग्य और तेज की प्राप्ति होती है।

भगवान शिव : महादेव की परिक्रमा के नियम सबसे अलग हैं। शिवजी की आधी की जाती है। ध्यान रखें कि जहां से जल निकलता है, उसे लांघना नहीं चाहिए। वहीं से वापस लौट जाना चाहिए।

परिक्रमा करते समय ध्यान रखने योग्य 5 मुख्य बातेंशांति और मौन: परिक्रमा करते समय बातचीत न करें। अपने ईष्ट के मंत्रों का मन ही मन जाप करें या उनका ध्यान करें।

हाथ की मुद्रा: परिक्रमा के दौरान हाथ जुड़े होने चाहिए। इधर-उधर हाथ हिलाना या किसी को छूना वर्जित है।

गति: परिक्रमा बहुत तेज भागते हुए या बहुत धीरे नहीं करनी चाहिए। आपकी गति सहज और लयबद्ध होनी चाहिए।

गीले कपड़े: यदि संभव हो, तो स्नान के बाद गीले कपड़ों में परिक्रमा करना सबसे अधिक प्रभावशाली माना जाता है।

उल्टा न घूमें: कभी भी परिक्रमा उल्टी दिशा से शुरू न करें, इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है।

परिक्रमा का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक लाभ मंदिर का गर्भगृह वह स्थान है जहां सर्वाधिक सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होता है। जब हम उस केंद्र के चारों ओर घूमते हैं, तो वह ऊर्जा हमारे शरीर के भीतर प्रवेश करती है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है।

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