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Vrat Ke Niyam : व्रत का पुण्य फल चाहिए तो व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम

Vrat Ke Niyam : व्रत का पुण्य फल चाहिए तो व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम

Vrat Ke Niyam : भारतीय संस्कृति में व्रत केवल भोजन त्यागने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्मा को परमात्मा के समीप ले जाने की एक पावन प्रक्रिया है। अक्सर हम पूरी श्रद्धा के साथ व्रत तो रख लेते हैं, लेकिन पंचांग और शास्त्रों में बताए गए सूक्ष्म नियमों से अपरिचित रह जाते हैं।

बिना सही विधि और संयम के किया गया व्रत केवल एक शारीरिक तप बनकर रह जाता है और उसका आध्यात्मिक पुण्य फल हमें प्राप्त नहीं हो पाता। अक्सर भक्तों के मन में यह सवाल रहता है कि व्रत के दौरान किन गलतियों से बचना चाहिए। क्या सिर्फ नमक छोड़ देना ही पर्याप्त है या इसके पीछे मानसिक शुद्धि के भी कुछ गहरे नियम हैं। यदि आप भी अपने अगले व्रत को पूरी विधि-विधान से सफल बनाना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं किन नियमों का पालन करना जरूरी है।

संकल्प की शक्ति किसी भी व्रत की शुरुआत 'संकल्प' से होती है। सुबह स्नान के बाद हाथ में जल लेकर ईष्ट देव के सामने अपने व्रत का उद्देश्य बोलें और उसे पूरा करने की शक्ति मांगें। बिना संकल्प के किया गया व्रत केवल एक 'डाइट' बनकर रह जाता है।

ब्रह्मचर्य और सात्विकता व्रत के दौरान शारीरिक और मानसिक पवित्रता सबसे जरूरी है। इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें और मन में किसी के प्रति द्वेष, क्रोध या ईर्ष्या न लाएं। वाणी पर संयम रखें और झूठ बोलने से बचें।

आहार के नियम तामसिक भोजन का त्याग: व्रत के दिन प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का सेवन पूरी तरह वर्जित है।

फलाहार: यदि आप फलाहारी व्रत रख रहे हैं, तो केवल फल, दूध, दही और सूखे मेवे ही ग्रहण करें।

नमक का प्रयोग: यदि नमक लेना आवश्यक हो, तो केवल सेंधा नमक का ही उपयोग करें। साधारण समुद्री नमक वर्जित माना जाता है।

ब्रह्म मुहूर्त का महत्व व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठना अत्यंत शुभ होता है। देर तक सोने से शरीर में आलस आता है और सात्विक ऊर्जा कम हो जाती है। सुबह और शाम की आरती या ध्यान में जरूर शामिल हों।

परोपकार और दान शास्त्रों के अनुसार, व्रत तब तक पूर्ण नहीं माना जाता जब तक आप अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद की मदद न करें। व्रत के दिन अन्न, वस्त्र या धन का दान करना पुण्य फल को कई गुना बढ़ा देता है।

इन चीजों से रहें दूर व्रत में बार-बार पानी पीना या बार-बार फलाहार करना भी वर्जित है। इसे 'अति-भोजन' की श्रेणी में रखा जाता है।

घर में क्लेश न करें और न ही किसी की चुगली करें।

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