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जमीर को जगाइए किशोर भैया. भानु प्रताप का वित्त मंत्री पर तीखा हमला

जमीर को जगाइए किशोर भैया. भानु प्रताप का वित्त मंत्री पर तीखा हमला

Lagatar 2 weeks ago

Ranchi: झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा सरकारी सुरक्षा वापस करने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में जोरों पर है. इसके अलावा हाल में कैबिनेट बैठकों में वित्त विभाग से जुड़ी योजनाओं को लेकर सामने आए मतभेदों की चर्चा भी होने लगी है.

इसी राजनीतिक सरगर्मी के बीच भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री भानु प्रताप शाही ने वित्त मंत्री पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है.

उन्होंने वित्त मंत्री के नाम एक खुला पत्र लिखते हुए कहा कि जनता के सवालों पर संघर्ष करने के बजाय वे अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा के मुद्दे को लेकर सरकार से टकराव का संदेश दे रहे हैं.

अपने पत्र में भानु प्रताप शाही ने लिखा कि जिस राज्य में कानून-व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हों, वहां वित्त मंत्री का सुरक्षा लौटाकर अकेले मॉर्निंग या इवनिंग वॉक करना जनता की समस्याओं का समाधान नहीं है.

उन्होंने कहा कि राधाकृष्ण किशोर 46 वर्षों के राजनीतिक अनुभव वाले वरिष्ठ नेता हैं और उनसे अपेक्षा थी कि वे जनता से जुड़े बड़े मुद्दों पर सरकार के खिलाफ मुखर रुख अपनाते.

भाजपा नेता ने पलामू की राजनीतिक विरासत का उल्लेख करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी और दिवंगत नेता चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने जनहित और राजनीतिक सिद्धांतों के लिए सत्ता से टकराने में कभी संकोच नहीं किया. इसके विपरीत, राधाकृष्ण किशोर ने भोजपुरी-मगही भाषा के मुद्दे सहित क्षेत्रीय अस्मिता से जुड़े सवालों पर चुप्पी साधे रखी.

भानु प्रताप शाही ने पत्र में सवाल उठाया कि पलामू की जनता को उम्मीद थी कि क्षेत्र की अस्मिता और भाषा के मुद्दे पर वित्त मंत्री ऐतिहासिक कदम उठाएंगे, लेकिन वे मौन रहे. उन्होंने कहा कि आज जनता के अधिकारों पर संघर्ष करने के बजाय वित्त मंत्री अपनी सुरक्षा जैसे व्यक्तिगत विषय को लेकर सरकार से लड़ते दिखाई दे रहे हैं.

आपके नाम में तो साक्षात 'राधा और कृष्ण' दोनों समाहित हैं. लेकिन विडंबना देखिए, पलामू के ये 'कृष्ण' आज जनता के खिलाफ हो रहे अन्याय के विरुद्ध सुदर्शन चक्र उठाने के बजाय, अपने व्यक्तिगत स्वार्थ और वीआईपी सुरक्षा जैसे मामूली सवाल पर सरकार से लड़ रहे हैं! आखिर ऐसा क्यों, भैया?

आप तो हमेशा से अपने कड़े तेवरों और प्रखर राजनीति के लिए जाने जाते थे. पर आज ऐसा क्या हो गया कि सत्ता का मोह, सरकारी सुविधाएं और व्यक्तिगत स्वार्थ इतने ऊपर हो गए कि जनता के असल मुद्दों पर आपकी जुबान सिल गई है? पलामू की जनता ने आपको इस रूप में कभी नहीं देखा था.

किशोर भैया, आत्ममंथन कीजिए. पलामू की तासीर समझौतावादी नहीं, संघर्षवादी रही है. सोचिए, क्योंकि अभी भी वक्त है!

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Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: Lagatar