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Jharkhand : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के फैसले, रिम्स-2 व बोकारो खनन पर सख्त निर्देश

Jharkhand : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के फैसले, रिम्स-2 व बोकारो खनन पर सख्त निर्देश

Lagatar 3 months ago

Ranchi : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने आज आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोग की सुनवाई से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि आयोग ने गढ़वा, पलामू, रांची, बोकारो, जामताड़ा और हजारीबाग से जुड़े करीब 15 मामलों की सुनवाई की, जिनमें जनजातीय भूमि, वन अधिकार और भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों पर अहम निर्देश जारी किए गए.

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डॉ. आशा लकड़ा ने बताया कि रांची में प्रस्तावित रिम्स-2 के लिए अधिग्रहित लगभग 222 एकड़ भूमि के मामले में आयोग ने राज्य सरकार, जिला प्रशासन और राजस्व विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. उन्होंने कहा कि जब तक मामला आयोग के समक्ष लंबित है और सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा दिए जाते, तब तक निर्माण कार्य पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया है.

उन्होंने कहा कि आयोग ने सुझाव दिया है कि आदिवासियों की उपजाऊ भूमि पर अस्पताल बनाने के बजाय सिमडेगा, गुमला, चैनपुर और पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य संस्थान विकसित किए जाएं, जहां चिकित्सा सुविधाओं की कमी है.

डॉ. लकड़ा ने बताया कि बोकारो के बैतकारो क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और खनन के मामले में आयोग ने ग्रामसभा की वैधता की दोबारा जांच कराने का निर्देश दिया है. जांच पूरी होने तक क्षेत्र में किसी भी प्रकार के खनन कार्य पर रोक लगाने के आदेश दिए गए हैं. साथ ही, कटे हुए पेड़ों के स्थान पर स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं.

उन्होंने बताया कि हरातू पंचायत की मुखिया नूतन पाहन की जमीन के मामले में आयोग के हस्तक्षेप के बाद 13 जुलाई 2026 को उन्हें जमीन का कब्जा वापस दिलाया जाएगा. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आदिवासियों की बकास्त भुईंहरी और मुंडारी भूमि की अवैध रजिस्ट्री में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि आयोग जल्द ही रिम्स और आईआईएम रांची का दौरा कर वहां की मूलभूत सुविधाओं और व्यवस्थाओं की समीक्षा करेगा. इसके आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग जनजातीय समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और आवश्यकता पड़ने पर मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर भी स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है.

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