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पासपोर्ट गुम होने के बाद दुबई में फंसा गिरिडीह का मजदूर, परिजनों ने सरकार से लगाई मदद की गुहार

पासपोर्ट गुम होने के बाद दुबई में फंसा गिरिडीह का मजदूर, परिजनों ने सरकार से लगाई मदद की गुहार

Lagatar 3 months ago

Giridih : रोजगार की तलाश में विदेश गए झारखंड के एक और प्रवासी मजदूर के संकट में फंसने का मामला सामने आया है. गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड के तिरला गांव निवासी लालचंद महतो दुबई में गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं.

पासपोर्ट गुम होने के बाद वे कानूनी और प्रशासनिक दिक्कतों में फंस गए हैं और कंपनी ने उन्हें काम से भी हटा दिया है. अब वे स्वदेश लौटना चाहते हैं, लेकिन जरूरी दस्तावेजों और सरकारी सहायता के अभाव में उनकी वापसी संभव नहीं हो पा रही है.

लालचंद महतो की पत्नी ने सरकार से पति की सुरक्षित वतन वापसी की गुहार लगाई है. उन्होंने बताया कि उनके पति दुबई में बढ़ई (कारपेंटर) का काम करते थे. पासपोर्ट खो जाने के बाद उनकी नौकरी चली गई और अब उनके सामने रोजमर्रा के खर्च का भी संकट खड़ा हो गया है. उन्होंने कहा कि परिवार पहले से आर्थिक तंगी से गुजर रहा है. उनके ससुर दशरथ महतो वर्ष 2013 से मुंबई से लापता हैं, जिससे परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह उन पर आ गई है.

प्रवासी श्रमिकों के मुद्दों पर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने केंद्र और झारखंड सरकार से लालचंद महतो की सुरक्षित स्वदेश वापसी के लिए तत्काल पहल करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि विदेशों में झारखंड के मजदूरों के फंसने और मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद पलायन का सिलसिला नहीं थम रहा है.

विदेश में फंसे मजदूर का परिवार

उन्होंने बताया कि वर्तमान में गिरिडीह जिले के द्वारका महतो और बोकारो जिले के सत्येंद्र महतो के शव अब भी सऊदी अरब में हैं. वहीं, बगोदर के महेंद्र महतो सऊदी अरब में फंसे हुए हैं और डुमरी के हुलास महतो दुबई की जेल में बंद हैं. ऐसे मामलों में परिजनों को लंबे समय तक इंतजार और कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है.

सिकंदर अली ने कहा कि सरकार को विदेशों में फंसे प्रवासी श्रमिकों की शीघ्र सहायता के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने के साथ-साथ राज्य में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि मजदूरों का मजबूरी में पलायन कम हो सके.

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