NewDelhi : प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने गुरुवार दोपहर दो बजे एंटी सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 (पेपर लीक बिल) राज्यसभा में पेश किया. सभापति ने इस पर सात घंटे चर्चा तय की है.
कहा कि जरूरत पडने पर समय बढ़ाया जा सकता है. राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने चर्चा की शुरुआत करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर तंज कसा.
उन्होंने पेपर चुराने वाले बचते रहे... शायरी के साथ चर्चा की शुरुआत की. मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सदन में जो बिल चर्चा के लिए आया है, उसमें सिर्फ आंकड़े बदले हैं. ज़्यादा जुर्माना, कड़ी सजा, स्पेशल टास्क फोर्स, इससे कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला है. सवाल यह है कि परीक्षा व्यवस्था को कैसे मजबूत बनाया जाये, ताकि पेपर लीक ना हो.
खड़गे ने कहा कि आज सरकार जो काम कर रही है, उसके बारे में हमने 2024 में ही सुझाव दिये थे, लेकिन उस समय सरकार ने हमारी बात नहीं मानी. तब लोकसभा चुनाव सामने थे, सरकार को राजनीति करनी थी, जबकि राहुल गांधी भारत जोड़ो न्याय यात्रा' में पेपर लीक को लेकर सवाल खड़े कर रहे थे. तब सरकार इतनी जल्दबाजी में यह कानून लायी थी. दो साल के भीतर ही उसमें संशोधन करना पड़ रहा है.
खड़गे ने कहा कि हजारों छात्रों ने संसद की ओर शांतिपूर्ण मार्च किया. वे संवाद चाह रहे थे. लेकिन उनको मिली लाठियां. आंसू गैस, पैलेट गन, रेलवे स्टेशन बंद, इंटरनेट बंद. इससे छात्र बिदक गये.. आप शांति से उनको संभाल नहीं सके.जंतर मंतर आंदोलन में 100 से अधिक छात्र घायल हुए, कई छात्र गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं. कई बच्चों को शरीर पर, आंख में पैलेट गन के छर्रे लगे हैं.कइयों के हाथ-पैर टूट गये. ये सब देखकर हमें तो शर्म आती है, लेकिन सरकार को शर्म आयी या नहीं, हमें मालूम नहीं.
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, गांव और शहरों से आये छात्रों को पैलेट गन से मारा गया. इसके जिम्मेदार गृह मंत्री अमित शाह हैं, कहा कि अमित शाह बंद कमरे में बैठकर ये बातें सुन रहे होंगे, लेकिन वो बहुत दिनों तक बंद कमरे में छिप नहीं सकते. जनता उन्हें बाहर खींचकर लायेगी. इस पर ट्रेजरी बेंच के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया. नेता सदन जेपी नड्डा ने खड़गे की स्पीच में असंसदीय शब्द के इस्तेमाल का दावा करते हुए चेयरमैन से इसे एक्सपंज करने की मांग की
एक बात और कि राज्यसभा में बिल पर चर्चा की शुरुआत से पूर्व कांग्रेस के चीफ व्हिप जयराम रमेश ने मांग की कि नेता सदन और नेता प्रतिपक्ष के पद संवैधानिक होते हैं, उन्हें बोलने के लिए स्पेशल टाइम दिया जाना चाहिए. आग्रह किया कि विपक्ष के नेता को स्पेशल टाइम दिया जाये उसे कांग्रेस के कोटे में न गिना जाये. किरेन रिजिजू ने जवाब दिया कि नेता सदन और नेता प्रतिपक्ष जब पार्टी की ओर से बात रखते हैं, तब वह समय पार्टी के कोटे में काउंट होता है. बाकी जो प्रिविलेज हैं, उन्हें मिलते हैं.

