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DPS द्वारका फीस विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने स्कूल को लगाई फटकार, 25 छात्रों को राहत बरकरार

DPS द्वारका फीस विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने स्कूल को लगाई फटकार, 25 छात्रों को राहत बरकरार

फीस बढ़ोतरी को लेकर चल रहे विवाद के बीच दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने Delhi Public School Dwarka के 25 छात्रों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने फीस न जमा करने पर स्कूल से निकाले गए इन छात्रों को मंगलवार से दोबारा कक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दे दी है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी भी स्थिति में छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए छात्रों को तत्काल प्रभाव से स्कूल आने की इजाजत दी। हालांकि, अदालत ने इस राहत के साथ एक शर्त भी रखी है। कोर्ट के अनुसार, यदि अभिभावक 17 अप्रैल तक बकाया फीस का 50 प्रतिशत भुगतान कर देते हैं, तो स्कूल द्वारा छात्रों को निकाले जाने का फैसला लागू नहीं होगा।

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छात्रों ने लगाई थी मदद की गुहार

मामला तब और गंभीर हो गया जब कई छात्रों की ओर से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई। याचिका में आरोप लगाया गया कि स्कूल प्रबंधन ने कोर्ट के 16 मई 2025 के आदेश का उल्लंघन किया है। उस आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि बढ़ी हुई फीस न देने पर छात्रों के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा छात्रों को किसी तरह के उत्पीड़न या दबाव का सामना नहीं करना पड़ेगा इसके बावजूद आरोप है कि स्कूल ने फीस न जमा करने पर छात्रों को कक्षाओं से बाहर कर दिया।

माता-पिता को जमा करनी होगी 50 फीसदी फीस

न्यायमूर्ति Jasmeet Singh की पीठ ने स्पष्ट किया कि छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। अदालत ने कहा कि माता-पिता 16 मई 2025 के आदेश के अनुसार बकाया फीस का 50% हिस्सा 17 अप्रैल तक जमा करें इस भुगतान के बाद छात्रों की बहाली (reinstatement) का आदेश तुरंत प्रभाव से लागू किया जाएगा स्कूल को निर्देश दिया गया है कि सभी 25 छात्रों को मंगलवार से कक्षा में बैठने दिया जाए यह आदेश छात्रों द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्कूल ने पहले दिए गए कोर्ट आदेश का उल्लंघन करते हुए फीस न देने पर छात्रों को कक्षाओं से बाहर कर दिया।

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स्कूल के व्यवहार पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान स्कूल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि प्रबंधन ने 2025-26 सत्र की बकाया फीस न देने वाले छात्रों को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया था। छात्रों के जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद ही कार्रवाई की गई। हालांकि, कोर्ट इस दलील से संतुष्ट नहीं दिखा और कहा कि यह कदम पहले दिए गए आदेशों की भावना के अनुरूप नहीं है।

सरकार से भी पूछे सवाल

पीठ ने सरकारी वकील से सवाल करते हुए कहा कि स्कूल किस आधार पर 2015-16 की तरह काम कर रहा है, जबकि इसके लिए कोई मंजूरी नहीं दी गई है। अदालत ने यह भी कहा कि नियामक व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों की पढ़ाई का स्तर बना रहे। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि आज के समय में हर छात्र बेहतर शिक्षा और नवीनतम तकनीकी सुविधाओं की अपेक्षा करता है।

सरकार ही सारे विवाद की जड़

अदालत ने कहा कि अच्छी शिक्षा के लिए अच्छे शिक्षक जरूरी हैं, इसलिए स्कूलों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार शिक्षकों का वेतन सुनिश्चित करना चाहिए। पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि आठवां वेतन आयोग आने वाला है, ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वित्तीय संतुलन जरूरी है।

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हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार पर भी टिप्पणी करते हुए कहा जब सरकार फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं देती, तो स्कूलों का संचालन कैसे होगा? अदालत ने स्पष्ट कहा कि सरकार की नीतियां ही इस विवाद की जड़ हैं. पीठ ने इस मामले में स्कूल के प्रधानाचार्य, प्रबंधन समिति के अध्यक्ष Directorate of Education Delhi के निदेशक को अवमानना नोटिस जारी किया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तारीख तय की है।

बच्चों के लिए मांगी थी सुरक्षा

न्यायमूर्ति Jasmeet Singh की पीठ ने कहा कि अवमानना मामले में केवल उन्हीं छात्रों को याचिकाकर्ता माना जाएगा, जिन्हें स्कूल से निकाला गया था। यह आदेश 102 अभिभावकों द्वारा दायर याचिका पर आया, जिसमें फीस बढ़ोतरी के बीच अपने बच्चों के लिए सुरक्षा की मांग की गई थी। अभिभावकों ने आरोप लगाया था कि स्कूल प्रबंधन के कदमों से छात्रों के हित प्रभावित हो रहे हैं। याचिका में अभिभावकों ने दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल से स्कूल को अपने नियंत्रण में लेने की मांग की फीस विवाद को लेकर सख्त हस्तक्षेप की अपील की ।

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