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G-20 समिट की टूटी सालों पुरानी परंपरा, अमेरिका के विरोध और बहिष्कार के बावजूद प्रस्ताव पास; दक्षिण अफ्रीका से ट्रंप को कड़ा संदेश

G-20 समिट की टूटी सालों पुरानी परंपरा, अमेरिका के विरोध और बहिष्कार के बावजूद प्रस्ताव पास; दक्षिण अफ्रीका से ट्रंप को कड़ा संदेश

क्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में 21 से 23 नवंबर तक आयोजित हो रहे जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल देशों ने जलवायु परिवर्तन पर एक ऐतिहासिक घोषणापत्र पारित किया है. शिखर सम्मेलन में शामिल देशों के समूह की ओर से पेश घोषणापत्र को अमेरिका के विरोध और बहिष्कार के बाद बावजूद सर्वसम्मति से पास किया गया है.

जी20 समूह की ओर से उठाए गए इस कदम को परंपरा के हटकर बताया जा रहा है, क्योंकि जी20 में शामिल दुनिया भर के नेताओं ने जलवायु परिवर्तन को लेकर अमेरिका की अनुपस्थिति में एक संयुक्त घोषणापत्र पारित किया.

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क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन का अमेरिका ने बहिष्कार किया है. इसके पीछे मेजबान दक्षिण अफ्रीका के साथ अमेरिका के राजनयिक मतभेद को कारण बताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने कहा कि अमेरिका ने संयुक्त घोषणापत्र के शब्दों पर आपत्ति जताई है. हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन को लेकर पारित घोषणापत्र पर फिर से बातचीत नहीं की जा सकती है. राष्ट्रपति रामफोसा के दिए इस बयान से वॉशिंगटन और प्रिटोरिया के बीच जारी तनाव को उजागर किया है.

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शिखर सम्मेलन की शुरुआत में पारित कराया गया घोषणापत्र

शिखर सम्मेलन में अपना संबोधन देते हुए दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने संयुक्त घोषणापत्र के लिए व्यापक सहमति को स्वीकार किया और कहा, 'हमें इस शिखर सम्मेलन की शुरुआत में ही घोषणापत्र को स्वीकार करना चाहिए.' रामफोसा के प्रवक्ता विंसेंट मैग्वेन्या ने कहा कि घोषणापत्र को शिखर सम्मेलन की कार्यवाही की शुरुआती दौर में असामान्य रूप से स्वीकार कर लिया गया और यह कदम इस मिले जबरदस्त समर्थन के कारण उठाया गया.

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न्यूज एजेंसी के मुताबिक, मैग्वेन्या ने कहा कि आमतौर पर घोषणापत्र को कार्यवाही के अंत में स्वीकार किया जाता है, लेकिन हमें ऐसा महसूस हुआ कि हमें शिखर सम्मेलन की घोषणापत्र को पहले ही पारित करने की पहल करनी चाहिए.

दक्षिण अफ्रीका के अधिकारियों ने इस बात की भी पुष्टि की कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रिटोरिया पर इस बात के लिए दबाव डाला था कि वे उनकी गैर-मौजूदगी में जी20 नेताओं के घोषणापत्र को कतई स्वीकार न करें. वहीं, प्रवक्ता विंसेंट मैग्वेन्या ने कहा कि हमने इस घोषणापत्र को स्वीकार करने के लिए पूरे साल काम किया है और पिछला सप्ताह भी काफी जोरदार रहा है.

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G-20 समिट में पहुंचे दुनिया के ये बड़े नेता

जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में दुनिया के कई ताकतवर देशों के नेता शामिल हुए. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैयब एर्दोगन, यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्योंग, UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस समेत कई अन्य नेता भी शामिल हुए.

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