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केरल के वायनाड में भूस्खलन : 2 लोगों की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

केरल के वायनाड में भूस्खलन : 2 लोगों की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

केरल के वायनाड जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच मंगलवार सुबह मेप्पाडी इलाके में बड़ा भूस्खलन हो गया। यह हादसा मीनाक्षी पुल के पास चल रहे टनल निर्माण स्थल पर हुआ, जहां पहाड़ी का बड़ा हिस्सा ढहकर सड़क और समीप बह रही नदी में जा गिरा।

हादसे में अब तक 2 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई मजदूरों के मलबे में फंसे होने की आशंका है।

प्रशासन, पुलिस और राहत एजेंसियों की टीमें मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। अब तक 6 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। मलबा हटाने का काम लगातार जारी है और फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।

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कैसे हुआ हादसा?

जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 10 बजे कल्लाडी इलाके में मीनाक्षी पुल के पास टनल की खुदाई का काम चल रहा था। खुदाई के कारण वहां मिट्टी का बड़ा टीला बन गया था। लगातार हो रही बारिश से यह टीला और आसपास की पहाड़ी कमजोर हो गई, जिसके बाद अचानक पूरा हिस्सा ढह गया।

भूस्खलन की चपेट में प्रवासी मजदूरों का अस्थायी शिविर और स्थानीय मजदूरों को लाने वाली दो बसें भी आ गईं। हालांकि शुरुआती अनुमान है कि सुबह का समय होने के कारण अधिकांश मजदूर समय रहते सुरक्षित स्थानों की ओर भागने में सफल रहे।

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भूस्खलन क्या होता है?

भूस्खलन (Landslide) एक प्राकृतिक आपदा है, जिसमें पहाड़ी ढलान से चट्टानें, मिट्टी, गाद या मलबा तेजी से नीचे की ओर खिसक जाता है। इसके प्रमुख कारणों में भारी बारिश, भूकंप, बर्फ का पिघलना, ज्वालामुखीय गतिविधियां, नदी या समुद्र का कटाव और प्राकृतिक अपक्षय शामिल हैं। वहीं वनों की कटाई, खनन, सड़क एवं बांध निर्माण और अनियोजित शहरीकरण जैसे मानवीय कारण भी भूस्खलन का जोखिम बढ़ाते हैं।

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भूस्खलन से बचाव कैसे करें?

विशेषज्ञों के अनुसार, ढलानों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, रिटेनिंग वॉल और बेहतर ड्रेनेज सिस्टम का निर्माण, संवेदनशील क्षेत्रों का जोखिम मानचित्रण (GSI), समय पर चेतावनी प्रणाली तथा भूस्खलन संभावित ढलानों पर अनियंत्रित निर्माण पर रोक जैसी पहलें ऐसे हादसों के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

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