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मुस्लिम महिलाओं का खतना और मस्जिद में नमाज पढ़ने पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज; सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री पर भी शीर्ष न्यायालय में होगी जिरह

मुस्लिम महिलाओं का खतना और मस्जिद में नमाज पढ़ने पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज; सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री पर भी शीर्ष न्यायालय में होगी जिरह

Supreme Court Hearing Today Issue of Circumcision of Muslim Women And offering prayers in Mosque: देश के शीर्ष न्यायालय सुप्रीम कोर्ट में आज देश की आधी आबादी यानी महिलाओं के अधिकारों से संबंधित कई मामलों में सुनवाई होगी।

इन मामलों में मुस्लिम महिलाओं का खतना और मस्जिद में नमाज पढ़ने से लेकर सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री (Sabarimala Temple Women Entry Issue) और गैर धर्म में शादी करने वाली पारसी महिलाओं (Parsi women marrying outside their religion) को धार्मिक स्थलों में जाने का अधिकार मिलने वाली याचिकाओं पर फैसला आएगा।

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धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव से जुड़े ये सवाल पिछले 26 साल से देश की अलग-अलग अदालतों में पेंडिंग हैं। सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ आज से 22 अप्रैल तक 50 से ज्यादा याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई करेगी।

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केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को एंट्री देने का आदेश जारी रहे या नहीं, सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ आज से इस पर सुनवाई करेगी। कोर्ट मस्जिदों में महिलाओं की एंट्री, दाऊदी बोहरा समुदाय में महिला खतना और गैर धर्म में शादी करने वाली पारसी महिलाओं को धार्मिक स्थलों में जाने का अधिकार मिले या नहीं, इस पर भी फैसला करेगा। सुप्रीम कोर्ट में 7 अप्रैल की सुबह 10.30 बजे सबरीमाला रिव्यू केस की सुनवाई शुरू होगी। रिव्यू पिटीशनरों और उन्हें सपोर्ट करने वाले 7 अप्रैल से 9 अप्रैल तक विरोध करने वले 14 अप्रैल से 16 अप्रैल तक दलीलें दे सकेंगे।

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इससे पहले 14 से 23 जनवरी के बीच चली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं ने महिलाओं के बहिष्कार को असंवैधानिक बताया, जबकि धार्मिक पक्ष ने आस्था और आर्टिकल 26 के तहत स्वतंत्रता का हवाला देते हुए न्यायिक हस्तक्षेप सीमित रखने की मांग की। इसी दौरान कोर्ट ने आवश्यक धार्मिक प्रथाएं और ज्यूडिशिअल रिव्यू की सीमाओं पर सवाल उठाए थे। 3 से 7 फरवरी के दौरान भी बहस जारी रही, जहां समानता बनाम धार्मिक स्वतंत्रता और न्यायिक सीमा के मुद्दों पर चर्चा हुई। लेकिन कोविड-19 के कारण सुनवाई रोक दी गई थी।

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इन प्रमुख मामलों में आझ आएगा फैसलाः-

दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं का खतना: क्या यह प्रथा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है? शिया इस्लाम की इस्माइली शाखा में 2017 में एड. सुनीता तिवारी ने दाऊदी बोहरा समुदाय में महिला खतना का मुद्दा उठाया और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश: क्या मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोका जा सकता है। 2016 में यास्मीन जुबैर अहमद पीरजादा नाम की महिला ने मुस्लिम महिलाओं का मस्जिद में प्रवेश का मुद्दा उठाया और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश: क्या सभी आयु की महिलाओं को प्रवेश का अधिकार है? बेंच यह तय करेगी कि साल 2018 में इंडियन यंग लायर एसोसिएशन Vs स्टेट ऑफ केरल मामले में हाईकोर्ट का फैसला सही था या नहीं। मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत दिए जाने के इस फैसले का रिव्यू करने के लिए मंदिर के पुजारी समेत कुछ संस्थाओं ने याचिका लगाई है, तो कुछ संगठन इसके खिलाफ हैं।

पारसी महिलाओं का अग्निमंदिर में प्रवेश: क्या गैर-पारसी से शादी करने वाली पारसी महिला को अग्नि मंदिर में प्रवेश से रोका जा सकता है? 2012 में पारसी महिला गूलरुख एम गुप्ता ने हिंदु व्यक्ति से शादी की। उन्हें पारसी धर्मस्थलों में प्रवेश से रोका जाने लगा। उन्होंने इसके खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में पारसी महिलाओं के धार्मिक अधिकार को लेकर याचिका लगाई। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

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