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Rajasthan News: चौंप स्टेडियम पर इंतजारशास्त्र का छठा अध्याय; 24 महीने का काम 36 महीने बाद भी अधूरा, गहलोत ने उठाए सरकार की मंशा पर सवाल!

Rajasthan News: चौंप स्टेडियम पर इंतजारशास्त्र का छठा अध्याय; 24 महीने का काम 36 महीने बाद भी अधूरा, गहलोत ने उठाए सरकार की मंशा पर सवाल!

Rajasthan News: राजस्थान को क्रिकेट की दुनिया का सिरमौर बनाने का सपना देख रहे खेल प्रेमियों के लिए एक परेशान करने वाली खबर है। जयपुर के चौंप (Chop) में बन रहे दुनिया के तीसरे सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम का काम अधर में लटक गया है।

इस मुद्दे पर अब प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया कैंपेन इंतज़ारशास्त्र का छठा चैप्टर (Chapter 6) जारी करते हुए मौजूदा भाजपा सरकार पर सीधा और तीखा प्रहार किया है।

डेडलाइन खत्म, काम अब भी बाकी

दरअसल, इस अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम की नींव कांग्रेस सरकार के समय 5 फरवरी 2022 को रखी गई थी। तय प्लान के मुताबिक, इसके पहले फेज का काम 24 महीने यानी फरवरी 2024 तक पूरा हो जाना चाहिए था। लेकिन हकीकत यह है कि 36 महीने बीत जाने के बाद भी प्रोजेक्ट पूरा होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि देरी की वजह से निर्माण लागत (Construction Cost) में करोड़ों रुपये का इजाफा हो रहा है, जिसका सीधा बोझ जनता की जेब पर पड़ने वाला है।

अशोक गहलोत ने एक्स (X) पर एक वीडियो शेयर करते हुए पूछा है कि क्या भाजपा सरकार को राजस्थान का मान बढ़ना रास नहीं आ रहा? गहलोत ने कहा कि यह प्रोजेक्ट उनकी सरकार का था, इसलिए वर्तमान सरकार इसे ठंडे बस्ते में डाल रही है। पिछले सवा दो साल से राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) की हालत खराब है और अब तक एक नया अध्यक्ष तक नहीं चुना जा सका है। देरी से बढ़ती लागत खेल सुविधाओं के विकास में बड़ी बाधा बन रही है।

75 हजार दर्शकों की थी तैयारी

गौरतलब है कि जयपुर के पास आरसीए (RCA) का अपना खुद का अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम नहीं है। इसी कमी को पूरा करने के लिए चौंप में यह मेगा प्रोजेक्ट शुरू हुआ था। पहला फेज 45 हजार दर्शकों की क्षमता का था जिसे दूसरे फेज में बढ़ाकर 75 हजार किया जाना था।
अगर यह समय पर पूरा होता, तो यह भारत का दूसरा और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम कहलाता।

जनता और खेल प्रेमियों पर असर

सूत्रों के अनुसार, जयपुर के क्रिकेट प्रेमी इस देरी से काफी मायूस हैं। अंतरराष्ट्रीय मैचों की मेजबानी छिनने का डर और बढ़ती लागत ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि गहलोत के इस इंतज़ारशास्त्र के बाद सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर क्या रुख अपनाती है।

स्टेडियम के काम में देरी का सीधा असर राजस्थान के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन पर पड़ रहा है। अगर यह समय पर तैयार होता, तो यहां IPL और अंतरराष्ट्रीय मैचों के जरिए स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा बूस्ट मिलता। अब यह मामला केवल खेल का नहीं, बल्कि साख की लड़ाई बन गया है।

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