सुरेश पाण्डेय, सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से राजस्व विभाग की लापरवाही और पुलिस-प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली को उजागर करने वाले दो बेहद गंभीर मामले सामने आए हैं। जिले में एक तरफ जहां सरकारी रसूख का फायदा उठाकर ग्रामीणों की पुश्तैनी जमीन को कागजों में इधर-उधर करने का खेल चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ असहाय विधवा महिलाओं की जमीनों पर दबंगई से कब्जा और मारपीट की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
इन दोनों ही मामलों ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
पहला मामला: माड़ा तहसील में पटवारी का 'खेल', 6 ग्रामीणों की 3 एकड़ पुश्तैनी जमीन दूसरे के नाम दर्ज
पहला सनसनीखेज मामला माड़ा तहसील के बधौरा चौकी क्षेत्र अंतर्गत नगवा गांव का है। यहां गांव के 6 ग्रामीणों ने हल्का पटवारी राजकुमार विश्वकर्मा पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों का कहना है कि उनकी करीब 3 एकड़ पुश्तैनी जमीन जो वर्षों से उनके पूर्वजों के नाम दर्ज थी, उसे बिना किसी सक्षम शासकीय आदेश या न्यायालय के फैसले के चुपके से किसी दूसरे व्यक्ति के नाम चढ़ा दिया गया।
1938 के कागज का अनोखा खेल
पीड़ितों का आरोप है कि कथित तौर पर वर्ष 1938 के एक हाथ से लिखे कागज को आधार बनाकर इस पूरी जमीन का नामांतरण कर दिया गया। नियम के मुताबिक इतनी पुरानी जमीन का स्वामित्व बदलने के लिए एक पूरी वैधानिक प्रक्रिया और सक्षम राजस्व न्यायालय का आदेश अनिवार्य होता है, जिसे ताक पर रख दिया गया।
न्याय के लिए दर-दर भटक रहे पीड़ित
ग्रामीण अपनी मूल ऋण पुस्तिका और पुख्ता दस्तावेज लेकर लगातार प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी पूरी आजीविका इसी कृषि भूमि पर टिकी है।
पटवारी ने रखा अपना पक्ष
इस पूरे मामले को लेकर जब हल्का पटवारी राजकुमार विश्वकर्मा से बात की गई तो उन्होंने आरोपों को नकारते हुए कहा कि हाई कोर्ट ने इस संबंध में एसडीएम (SDM) को निर्देशित किया था। एसडीएम कार्यालय से मिले आधिकारिक आदेश के बाद ही यह पूरी कार्रवाई की गई है और इसके समस्त वैध दस्तावेज एसडीएम कोर्ट में सुरक्षित हैं।
दूसरा मामला: सरई में विधवा की जमीन पर कब्जा, विरोध करने पर बेरहमी से मारपीट
प्रशासनिक लापरवाही का दूसरा खौफनाक चेहरा सरई थाना क्षेत्र में देखने को मिला, जहां एक बेसहारा विधवा महिला न्याय के लिए पुलिस और जिला प्रशासन के चक्कर काट रही है। पीड़िता का आरोप है कि दबंगों द्वारा उसकी पुश्तैनी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया जा रहा है।
दस्तावेज होने पर भी पुलिस और प्रशासन का नहीं मिल रहा साथ
महिला के पास जमीन के सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं। जब उसने अपनी जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे का विरोध किया तो दबंगों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की।
एसपी से लगाई न्याय की गुहार
पीड़िता का आरोप है कि सरई थाना पुलिस ने उसकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे शह पाकर कब्जाधारियों के हौसले और बुलंद हो गए हैं। थक-हारकर अब पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक (SP) और जिला प्रशासन से अपनी सुरक्षा, न्याय और निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है।
ग्राउंड जीरो का सच: रसूखदारों के आगे बेबस तंत्र?
सिंगरौली के इन दोनों मामलों को देखकर साफ है कि जिले में जमीन से जुड़े विवादों को लेकर आम जनता में भारी आक्रोश है। माड़ा में कागजी हेरफेर और सरई में लाठी के दम पर कब्जा, दोनों ही घटनाएं यह साबित करती हैं कि निचले स्तर पर राजस्व और पुलिस महकमा पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने में नाकाम साबित हो रहा है।

