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रामजन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला समाज विशेष का नहीं पूरी मानवता के लिए : डॉ हर्षवर्धन

संस्कृत भारती का 3 दिवसीय प्रथम विश्व सम्मेलन शुरू, 21 देशों के 76 प्रतिनिधि पहुंचे मोदी ने विश्व में संस्कृत का दायरा बढ़ने पर जताई खुशी विदेश राज्यमंत्री ने 'प्रज्ञानम' प्रदर्शनी का किया उद्घाटन अयोध्या में रामजन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला किसी समाज विशेष का नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए है. शनिवार को प्रथम विश्व संस्कृत सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने यह कहते हुए विश्व हिन्दू परिषद् (विहिप) के पूर्व संरक्षक और दिवंगत नेता अशोक सिंहल को भी याद किया. देश और दुनिया में संस्कृत को जन भाषा बनाने के लिए प्रयासरत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की संस्था 'संस्कृत भारती' द्वारा छतरपुर मंदिर परिसर में आयोजित प्रथम विश्व सम्मेलन के उद्घाटन कार्यक्रम में डॉ हर्षवर्धन के अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री प्रताप सारंगी, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, आचार्य, अध्यापक सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे. संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान के शैक्षणिक निदेशक प्रो. चांद किरण सलूजा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संदेश पढ़ा. इसमें प्रधानमंत्री ने विश्व में संस्कृत का दायरा बढ़ने पर प्रसन्नता जताई. डॉ हर्षवर्धन ने इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए यह भी कहा कि अशोक सिंहल अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए होने वाले तमाम आंदोलनों के मुख्य कर्ताधर्ता थे. उन्होंने पूरे देश को इस कार्य के लिए प्रेरित करने में अहम भूमिका निभाई थी. हर्षवर्धन ने कहा कि महर्षि अरविंद, डॉ भीमराव अंबेडकर, महात्मा गांधी, मैक्समूलर, राधाकृष्णन, जाकिर हुसैन और फखरुदीन अली अहमद आदि विद्वानों के तमाम प्रयासों के बावजूद संस्कृत भाषा को उचित स्थान नहीं मिल पाया लेकिन संस्कृत भारती के प्रयासों से अब यह स्वप्न साकार होने की उम्मीद जग रही है. आज 21 देशों में एक लाख लोग संस्कृत पढ़ रहे हैं. पूरे भारत में पहली से 12वीं कक्षा तक तीन करोड़ के लगभग छात्र संस्कृत पढ़ रहे हैं. केंद्रीय राज्यमंत्री प्रताप सारंगी ने संस्कृत में अपने विचार व्यक्त करते हुए संस्कृत भाषा के महत्व को प्रकाशित किया. उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं है बल्कि वह संस्कार का एक स्रोत है. इसके बिना भारत को नहीं जाना जा सकता है. उन्होंने संस्कृत के प्रति सम्मान की भावना जागृत करने का आह्वान करते हुए कहा कि अपनी माता की आलोचना पर जैसी कठोर प्रतिक्रिया हम देते हैं, उसी प्रकार का भाव संस्कृत भाषा के लिए भी जगाना होगा. संस्कृत भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रो. भक्तवत्सल शर्मा ने कहा कि संस्कृत भाषा नहीं बल्कि जीवन पद्धति है. 21वीं शताब्दी संस्कृत शताब्दी के रूप में हो ऐसा प्रयास करना है. संस्कृत भारतीय के अखिल भारतीय महामंत्री श्रीदेव पुजारी ने तीन वर्ष का कार्यवृत प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि 17 देशों में संस्कृत भारती का कार्य चल रहा है. सम्मेलन में अमेरिका, इंग्लैंड, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, रूस, न्यूजीलैंड, नेपाल, पोलेंड और अरब देशों सहित 21 देशों के 76 प्रतिनिधियों के अलवा भारत के 542 जिलों के 3883 स्थानों से प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं. इससे पहले, विदेश राज्यमंत्री वी. मुरलीधरन ने संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए दैनिक उपयोग और संस्कृत साहित्य पर आधारित 'प्रज्ञान' प्रदर्शनी का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि संस्कृत का समाज में प्रचलन जारी है क्योंकि इसका उपयोग देशभर के लोग करते हैं. उन्होंने कहा कि अधिकांश भारतीय भाषाओं में संस्कृत शब्द पाए जाते हैं. ../सुशील .

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