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मुंबई / सिर्फ 50% नर्सिंग स्टाफ के भरोसे लड़ी जा रही कोरोना से जंग

महाराष्ट्र में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 70 हजार पार कर गई है। इनमें से 40 हजार से ज्यादा केस सिर्फ मुंबई में मिले हैं। यहां कुल 40,877 संक्रमित हो गए हैं। सोमवार को राज्य में कोरोना के 2,361 नए केस सामने आए। मुंबई में 1,413 नए मरीज मिले। सोमवार को 76 मरीजों की मौत की पुष्टि हुई। मरने वालों की कुल संख्या 2,362 हो गई है। सबसे अधिक 40 मौतें मुंबई में हुईं। यहां कोरोना के कारण 1,319 लोगों की जान गई। सोमवार को मुंबई के बाद पुणे में सबसे ज्यादा 8, मीरा भाईंदर और नवी मुंबई में 6-6, वसई विरार और औरंगाबाद में 3-3, रायगढ़ और डोंबिवली में 2-2, ठाणे, नासिक, पिपरी चिंचव, जालना, बीड और नागपुर में 1-1 मरीज की मौत हुई। महाराष्ट्र में कुल मरीजों की संख्या 70 हजार 13 तक पहुंच गई है।

सिर्फ 50% नर्स और 33% वार्डब्वाय के सहारे लड़ी जा रही जंग

देश में कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित मुंबई के अस्पतालों में मरीजों की हालत बेहद खराब है। बेड और ऑक्सीजन की कमी के साथ साथ इनकी देखभाल के लिए नर्सें और स्वास्थ्यकर्मियों की भी कमी है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अस्पतालों में महज 50% नर्स और 33% वार्डब्वाय के सहारे ही कोरोना से जंग लड़ी जा रही है।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के बड़े अस्पताल किंग एडवर्ड मेडिकल कालेज (केईएम), नायर अस्पताल और लोकमान्य तिलक अस्पताल (सायन) में कोरोना वायरस के इलाज के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं लेकिन, केईएम अस्पातल से 250 नर्सें नदारद हैं और प्रशासन ने इनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

अस्पताल के एक डॉक्टर का कहना है कि 250 नर्सों की गैरहाजिरी से अन्य कर्मचारियों पर भारी दबाव है। इनकी ड्यूटी टाइम को छह घंटे से बढ़ाकर सात घंटे कर दी गई है। और दो पालियों में काम करना पड़ रहा है। वहीं रात की पाली को 10 घंटे कर दिया गया है। इससे दिक्कतें और अधिक बढ़ गई हैं। ऐसे ही कुछ हाल मुंबई के अन्य हॉस्पिटल्स में भी है।

मेयर किशोरी पेडणेकर ने बताया कि दूसरे राज्यों से आकर डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी सेवा दे रहे हैं। लेकिन बीएमसी अस्पताल का परमानेंट स्टॉफ मनमानी कर रहा है। उन्होंने कर्मचारी यूनियन को चेतावनी दी है कि अस्पताल के कर्मचारियों की कामचोरी बर्दास्त नहीं की जाएगी।

मरीजों की सुरक्षा राम भरोसे

केईएम अस्पताल में आईसीयू भी मरीजों के लिए सुरक्षित नहीं है। एक हृदयविदारक नई जानकारी सामने आई है कि केईएम अस्पताल के आईसीयू में कोविड-19 की महिला मरीज पानी मांगने के लिए बोतल हिला रही है, लेकिन उसे कोई पानी देने सामने नहीं आया। उसके परिजनों में से एक ने कोरोना वायरस के भय के बावजूद उसे पानी लाकर दिया। एक मरीज के परिजन बताते हैं कि आईसीयू से नर्स और वार्डब्वाय घंटों लापता रहते हैं। ऐसे में मरीजों की सुरक्षा राम भरोसे है।

मुर्दाघर के कर्मचारी संक्रमित

केईएम अस्पताल का मुर्दाघर के सभी कर्मचारी पॉजिटिव आने के बाद इसे अब बंद करने की नौबत आ गई है। जबकि मुर्दाघर लाशों से भरा पड़ा है। 30 से 40 लाशें पास में बिखरी पड़ी रहती है। हालांकि केईएम अस्पताल के डीन हेमंत देशमुख का कहना है कि मुर्दाघर बंद नहीं होगा। कुछ स्वास्थ्य कर्मी जरूर कोरोना पॉजिटिव हैं। लेकिन अन्य कर्मचारी 24 घंटे मुर्दाघर में कार्यरत हैं।

धारावी में 380% बढ़ा संक्रमण

बता दे, मुंबई में एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्तियों में से एक धारावी का भी बुरा हाल है। यहां पर मई महीने में संक्रमण 380% बढ़ा है। मई महीने में कोरोना वायरस के करीब 1 हजार 400 नए केस मिले। यह संक्रमितों की संख्या अप्रैल के मुकाबले 380% ज्यादा है जिससे यहां के लोगों की चिंता बढ़ गई है। अप्रैल महीने में धारावी में कुल 369 मामले सामने आए थे जो मई के अंत में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1 हजार 771 हो गई। मुंबई में सामने आए कुल संक्रमितों में अकेले 4.4% धारावी में आए हैं।

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